बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी को ऐतिहासिक जीत मिल गई है। जीत मिलने के बाद येदियुरप्पा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली है। उनको बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है. वो तीसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने हैं।  वे कर्नाटक के 25वें मुख्‍यमंत्री हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर कौन हैं येदियुरप्पा ?

डॉ. बूकानाकेरे सिद्धलिंगप्पा येदियुरप्पा का जन्म मांड्या जिले के बुकानाकेरे में 27 फरवरी, 1943 को लिंगायत परिवार में हुआ था। 1965 में वे समाज कल्याण विभाग में क्लर्क बने। क्लर्क बनने के बाद में वे शिकारीपुर चले गए जहां उन्होंने वीरभद्र शास्त्री चावल मिल में क्लर्क की नौकरी की। सन 1967 में वीरभद्र शास्त्री चावल मिल के मालिक वीरभद्र शास्त्री की बेटी मैत्रादेवी से उनकी शादी हुई.

येदियुरप्पा कर्नाटक के शिकारीपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का प्रतिनिधित्व करते हैं। येदियुरप्पा कर्नाटक में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बने और उन्होंने तीन साल दो माह शासन किया ।

2008 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को येदियुरप्पा के नेतृत्व में ही जीत मिली थी। 2013 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान येदियुरप्पा ने अपनी एक अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा था, जिसकी वजह से बीजेपी को काफी नुकसान उठाना पड़ा था और उस चुनाव में बीजेपी को सिर्फ 40 सीटें ही मिली थीं।

2014 में नरेन्द्र मोदी ने येदियुरप्पा को फिर से बीजेपी में शामिल किया। जिसके बाद येदियुरप्पा ने 2014 में शिमोगा लोकसभा क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव भी जीता था।

इस बार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने येदियुरप्पा पर ही दांव लगाया था और उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था। येदियुरप्पा पार्टी के इस दांव पर खरे उतरे और कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। पार्टी दूसरी बार दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य में सरकार बना चुकी है।

कर्नाटक की राजनीति में लिंगायत समुदाय को चुनाव में महत्वपूर्ण माना जाता हैं। इस राज्य की पूरी आबादी का सर्वाधिक करीब 21 फीसदी लिंगायत हैं। यही वजह है कि कांग्रेस नेता और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देकर केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को मुश्किल में डाल दिया था । बता दें कि कर्नाटक विधानसभा की करीब 100 सीटें ऐसी हैं, जहां लिंगायत समुदाय अच्छी भूमिका निभाता है।

येदियुरप्पा जब मुख्यमंत्री थे तब उन पर जमीन आवंटन में गड़बड़ी के आरोप लगे थे, मगर बाद में उन्हें इस मामले में क्लीनचिट मिल गई थी।