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तम्‍बाकू पर बैन लगे, तभी मिलेगा मुंह के कैंसर से छुटकारा

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तंबाकू का इस्तेमाल करने से कैंसर होने की आशंका सबसे ज्‍यादा होती है। यही नहीं, इसके सेवन से दिल और फेफड़े से जुड़ी कई तरह की बीमारियां होने का भी खतरा होता है। तम्बाकू हमारे लिए कितना हानिकारक है, ये पता होने के बावजूद लोग तम्बाकू का इस्तेमाल करना नहीं छोड़ते हैं। और अब तो तम्‍बाकू उत्‍पादों पर बड़े-बड़े अक्षरों में चित्र के साथ चेतावनी भी लिखकर आ रही है कि इसके इस्‍तेमाल से मुंह का कैंसर हो सकता है, लेकिन ये जानते हुए भी इसके इस्‍तेमाल पर रोक नहीं लग रही है।

आज स्कूल, कॉलेज जाने वाले स्टूडेंट धूम्रपान या तंबाकू का इस्‍तेमाल करते करते नजर आते हैं। उनको इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इसका इस्तेमाल करने से उनके स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा। आज World No Tobacco Day पर हम आपको बता रहे हैं कि तम्बाकू का इस्तेमाल करने से क्या नुकसान है।

तम्‍बाकू के कारण देश में हर साल 2739 मौतें

धूम्रपान या तंबाकू का इस्तेमाल करने से हृदय और फेफड़ों को तो नुकसान पहुंचता ही है, साथ ही इससे हड्डियां भी कमजोर हो जाती हैं। तम्‍बाकू का इस्तेमाल करने से सबसे ज्यादा खतरा मुंह के कैंसर का होता है। हाल ही में सामने आए आकड़ों की मानें तो हर साल देश में करीब 2739 लोग तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों के कारण कैंसर की वजह से अपनी जान गंवाते हैं।

‘एशियन पेसिफिक जर्नल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन’द्वारा 2008 व 2016 में पब्लिश शोधपत्र में ये बात सामने आई कि वर्ष 2001 में पुरुषों में मुंह के कैंसर के मामले 42,725 और वहीं वर्ष 2016 में 65,205 थे। वहीं महिलाओं में 22,080 व 35,088 मामले पाए गए। गले और सांस नली के कैंसर के 2008 व 2016 में पुरुषों में 49,331 और 75,901 और महिलाओं में 9251 तथा 14550 मामले सामने आए।

युवा भी आ रहे इसकी चपेट में

आपको बता दें कि करीब 30 साल पहले तक 60-70 साल की उम्र वाले लोगों में मुंह और गले का कैंसर होता था, लेकिन अब यह उम्र सीमा घटकर 30-50 साल तक पहुंच गई है। आजकल 20 से 25 वर्ष की उम्र से भी कम के युवाओं में मुंह व गले का कैंसर देखा जा रहा है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की मानें तो 2008 में भारत में सिर व गले के कैंसर के मामलों में इजाफा देखा गया है। इन मामलों में 90 फीसदी कैंसर तंबाकू, शराब व सुपारी के इस्तेमाल से होते हैं। आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों में 50 प्रतिशत और स्त्रियों में 25 प्रतिशत कैंसर की वजह तंबाकू है। इनमें से 60 प्रतिशत मुंह के कैंसर हैं। धुआं रहित तंबाकू में 3000 से अधिक रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिनमें से 29 रसायन कैंसर पैदा कर सकते हैं।

क्या कहते हैं लखनऊ के डॉक्टर

कैंसर ट्रीटमेंट सेण्टर के डॉ. देवेन्द्र सिंह से जब हमने पूछा कि उनके पास रोजाना कितने ऐसे मरीज आते हैं जिन्हें कैंसर होता है तो उन्होंने बताया कि उनके पास रोजना करीब 10 मरीज ऐसे आते हैं जिनको तम्‍बाकू का सेवन करने से मुंह का कैंसर होता है। इस तरह एक महीने में करीब 250 ऐसे मरीज उनके पास आते हैं। डॉ. देवेन्द्र ने कहा कि मुंह का कैंसर ही अकेला ऐसा कैंसर है जिसे जड़ से खत्‍म किया जा सकता है। उनका कहना है कि अगर लोगों को मुंह के कैंसर से बचाना है तो सबसे पहले सरकार को टोबैको पर पूरी तरह से बैन लगा देना चाहिए।

भाऊराव देवरस अस्‍पताल के सीएमएस डॉ. आरसी सिंह का कहना है कि तम्बाकू का इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। इसका इस्तेमाल जानलेवा साबित हो सकता है। उनका कहना है कि तम्बाकू की लत इतनी बुरी होती है कि इसे शुरू करने के बाद इंसान का इसे छोड़ पाना बहुत मुश्किल होता है। उन्‍होंने भी तम्बाकू पर पूरी तरह बैन की वकालत की।

 

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