बेंगलुरु। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की बीएस येदियुरप्पा सरकार को कल यानी 19 मई शाम 4 बजे तक बहुमत साबित करने का आदेश दिया है। इसी के साथ ही करीब 20 साल पहले यूपी में हुई एक घटना ताजा हो गई है। उस वक्त जगदंबिका पाल (अब बीजेपी सांसद) ने बीजेपी की कल्याण सिंह सरकार से बगावत कर मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली थी। कोर्ट के आदेश से एक दिन बाद ही उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि कहीं 19 मई को येदियुरप्पा की हालत भी तो जगदंबिका पाल जैसी नहीं हो जाएगी ?

1998 में यूपी में क्या हुआ था ?
21 फरवरी, 1998 को यूपी विधानसभा में दलबदल की वजह से बहुमत साबित करने का दिन था। इस दौरान विधानसभा में जमकर मारपीट हुई थी। तत्कालीन गवर्नर रोमेश भंडारी ने इसके बाद यूपी में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी थी, लेकिन केंद्र ने ऐसा नहीं किया। इसके बाद सीएम रहे कल्याण सिंह ने अन्य दलों से आए विधायकों को मंत्री बना दिया। कुल 93 मंत्री सरकार में हो गए। इससे नाराज होकर दूसरे दलों ने कल्याण सिंह का तख्ता पलटने की तैयारी कर ली।

जगदंबिका पाल को बना दिया सीएम
कल्याण सिंह के पक्ष में बीएसपी विधायक थे, लेकिन गवर्नर रोमेश भंडारी ने इनके समर्थन को मानने से इनकार कर दिया। रात में ही कल्याण सिंह सरकार बर्खास्त कर दी गई और 22 फरवरी को जगदंबिका पाल को सीएम पद की शपथ दिला दी गई।

अटल बिहारी अनशन पर बैठे
गवर्नर के फैसले के खिलाफ उस वक्त नेता विपक्ष रहे अटल बिहारी वाजपेयी ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। वहीं, गवर्नर के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चुनौती दी गई। कोर्ट ने 23 फरवरी को फैसला सुनाया और जगदंबिका पाल 1 दिन के लिए ही सीएम रह पाए।

सचिवालय में बैठे थे 2 सीएम !
कोर्ट का फैसला जिस वक्त आया, उस वक्त जगदंबिका पाल दोपहर का भोजन करने घर गए थे। फैसला आते ही कल्याण सिंह सीएम सचिवालय पहुंच गए। वहीं, जगदंबिका पाल को जब पता चला कि कल्याण सिंह सचिवालय पहुंच गए हैं और कैबिनेट बैठक कर रहे हैं, तो वो भी शाम करीब 5 बजे दौड़े-भागे आए। अब सचिवालय में दो-दो सीएम बैठे दिख रहे थे। हाईकोर्ट का लिखित आदेश मिलने के बाद ही रात करीब 8 बजे जगदंबिका पाल ने सीएम की कुर्सी छोड़ी और घर चले गए। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 26 फरवरी को एक बार फिर यूपी विधानसभा में शक्ति प्रदर्शन हुआ। इसमें कल्याण सिंह की जीत हुई।