नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग नहीं चलेगा। विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव को उप राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने खारिज कर दिया है। वेंकैया नायडू ने पूरे हफ्ते कई कानूनविदों से बातचीत के बाद नोटिस को खारिज कर दिया। खास बात ये कि आज सुप्रीम कोर्ट में कामकाज शुरू होने के कुछ मिनट पहले ही नोटिस खारिज किया गया। बता दें कि इस नोटिस को लेकर कांग्रेस में ही विरोध के सुर सुनाई दे रहे थे।

कांग्रेस समेत 7 दलों ने दिया था नोटिस
कांग्रेस समेत 7 विपक्षी दलों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव दिया था। विपक्षी दलों ने इसके लिए चीफ जस्टिस पर भ्रष्टाचार, पद का दुरुपयोग और न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा न करने का आरोप लगाया था। विपक्षी दलों ने वेंकैया नायडू से बीते हफ्ते मुलाकात कर 64 सांसदों के दस्तखत वाला प्रस्ताव सौंपा था। प्रस्ताव में 7 ऐसे सांसदों के भी हस्ताक्षर थे, जो रिटायर हो चुके हैं।

इन दलों ने नहीं दिया था कांग्रेस का साथ
विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव को ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और करुणानिधि की डीएमके ने समर्थन नहीं दिया था।

किन कानूनविदों से वेंकैया ने की बात ?
सूत्रों के मुताबिक उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने प्रस्ताव को खारिज करने से पहले इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी, पूर्व अटॉर्नी जनरल के. परासरन, राज्यसभा के पूर्व महासचिव वीके अग्निहोत्री, लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप, कानून मंत्रालय के पूर्व सचिव पीके मल्होत्रा, विधायिका मामलों के पूर्व सचिव संजय सिंह और राज्यसभा सचिवालय के वरिष्ठ अफसरों से चर्चा की।

महाभियोग प्रस्ताव का हुआ था विरोध
संविधान के तमाम जानकारों ने कांग्रेस समेत 7 विपक्षी दलों के महाभियोग प्रस्ताव का विरोध किया था। इनमें कई पूर्व चीफ जस्टिस, वरिष्ठ अधिवक्ता फली नरीमन और वाजपेयी सरकार में सॉलीसिटर जनरल रहे सोली सोराबजी भी शामिल थे। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, पूर्व गृह और वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, पूर्व कानून मंत्री वीरप्पा मोइली, मनीष तिवारी और अश्विनी कुमार समेत कांग्रेस के कई नेताओं ने प्रस्ताव पर दस्तखत करने से भी साफ इनकार कर दिया था।