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अब मिर्गी से बचाएगी गांजे से बनी दवाई !

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वॉशिंगटन। मिर्गी काफी खतरनाक बीमारी है। एक बार इस रोग की गिरफ्त में आने के बाद मरीज को कभी भी झटके आने लगते हैं और वो गिर जाता है। इससे सिर तक में चोट लगती है और दांतों के बीच जीभ आ गई, तो वो भी कटने की आशंका होती है, लेकिन अब मिर्गी के दौरे से बचाने की एक दवा आ गई है। खास बात ये कि ये दवा गांजे से बनाई गई है। दवा बनाने वालों का दावा है कि गांजे से बनी ये दवा मिर्गी के दौरे रोकने में काफी असरदार है।
 
करोड़ों में है मिर्गी के मरीजों की संख्या
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनिया में मिर्गी के मरीजों की संख्या करीब 5 करोड़ है। भारत में इस मर्ज से 1 करोड़ से ज्यादा लोग ग्रस्त हैं। ऐसे में अमेरिकी स्वास्थ्य नियामकों ने सोमवार को मिर्गी से बचाने के लिए गांजे से बनी दवा को मंजूरी दे दी है। इस कदम को मील का पत्थर माना जा रहा है। बता दें कि गांजा को भारत समेत करीब-करीब हर देश में अवैध घोषित किया गया है।

गांजा से बनी दवा का ये है नाम
अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने 2 साल और उससे ज्यादा उम्र के मरीजों में मिर्गी के दो दुर्लभ प्रकारों का इलाज करने के लिए ‘एपिडियोलेक्स’ नाम की दवा को मंजूरी दी है। इस दवा को पूरी तरह गांजे से नहीं बनाया गया है। इस दवा का स्ट्रॉबेरी फ्लेवर सिरप तैयार किया गया है। इसमें गांजे के पौधे में पाए जाने वाले रसायन का शुद्ध रूप है। यानी दवा खाने वाले को उतना नशा नहीं होता, जितना गांजा पीने से होता है।

गांजे से कैसे रुकती है मिर्गी ?
गांजे से रसायन निकालकर मिर्गी की दवा बना तो ली गई है, लेकिन अभी ये साफ नहीं है कि आखिरकार गांजे में मिलने वाला कैनाबीडियोल या सीबीडी नाम का तत्व मिर्गी के दौरे कम कर देता है। बता दें कि पहले ब्रिटेन की ड्रग बनाने वाली कंपनी जीडब्ल्यू फार्मास्यूटिकल ने कई कानूनी बाधाओं को पार कर 500 से ज्यादा बच्चों और व्यस्कों पर इस दवा का असर देखा था। एपिडियोलेक्स अनिवार्य रूप से फार्मास्यूटिकल-ग्रेड वर्जन सीबीडी ऑयल है। इसे कुछ माता-पिता पहले से ही मिर्गी वाले बच्चों के इलाज के लिए इस्तेमाल करते हैं। गांजे के पौधे में 100 से ज्यादा रसायन पाए जाते हैं। इनमें से एक सीबीडी भी है। इसमें टीएचसी नहीं है। इस वजह से इस दवा का इस्तेमाल करने पर दिमाग पर असर होता है।

एचआईवी मरीजों में मोटापे को भी कर सकता है कम
एफडीए प्रमुख स्कॉट गॉटलिब ने कहा कि गांजे में मौजूद तत्वों का अगर उचित मूल्यांकन हो, तो इससे कई और बीमारियों का भी इलाज किया जा सकता है। एफडीए इससे पहले एचआईवी के रोगियों में वजन घटाने सहित गंभीर बीमारियों के इलाज में गांजे के एक अन्य सिंथेटिक वर्जन को मंजूरी दे चुका है।

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