नई दिल्ली। भारत में बेरोजगारी विकराल रूप ले रही है। हालत ये है कि जुलाई 2017 से अप्रैल 2018 तक करीब 70 लाख नौकरियों की कमी हुई है।

क्या है बेरोजगारी का आंकड़ा
सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2017 में बेरोजगारी की दर 3.39 फीसदी थी। जबकि मार्च 2018 में ये 6.3 फीसदी हो गई। अप्रैल 2018 में इसके बढ़कर 6.75 फीसदी होने का अंदेशा है।

सरकार नहीं दिखती है चिंतित
खास बात ये है कि बेरोजगारी के आंकड़े सरकार के लिए चिंताजनक नहीं हैं, लेकिन अर्थशास्त्री कह रहे हैं कि जिस तरह नई नौकरियों की कमी हो रही है, उससे आने वाले दिनों में हालात और बदतर हो सकते हैं।

ये हैं बेरोजगारी के आंकड़े
जुलाई 2017 से अक्टूबर 2017 के बीच बेरोजगारी की दर 3.39 से बढ़कर 5.04 फीसदी हो गई। नवंबर 2017 में ये दर गिरकर 4.76 फीसदी और दिसंबर 2017 में बेरोजगारी की दर 4.78 हो गई, लेकिन जनवरी 2018 से बेरोजगारी की दर ने फिर सिर उठाना शुरू कर दिया। कॉरपोरेट सेक्टर की बात करें, तो इसमें नई नौकरियों की दर में सिर्फ 2 से 3 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है।

खुद के रोजगार पर सरकार का बल
बेरोजगारी सुरसा की तरह मुंह फैला रही है। वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के मंत्री युवाओं के खुद स्वावलंबी होने पर जोर दे रहे हैं। मोदी सरकार ने हर हाथ को रोजगार के इरादे से मुद्रा योजना भी शुरू की हुई है, लेकिन इसके तहत भी हर हाथ को कर्ज नहीं मिलता है। हालांकि, अब एक और नई योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत कोई भी बैंक से हर रोज 5 हजार रुपए बतौर कर्ज ले सकेगा। इस कर्ज को दूसरे दिन चुकाने पर कोई ब्याज नहीं देना होगा।