बैंकॉक/जमशेदपुर। वो महज 17 साल का है। झारखंड के राजनगर के छोटे से गांव बालीझूड़ी में उसका घर है। घर के लोग खेती करते हैं। तीन और बड़े भाई हैं और पैरालिसिस से ग्रस्त उसके पिता दो साल से बिस्तर पर हैं। मां का निधन 2016 में ही हो गया था, लेकिन इतनी दुश्वारियां भी उसके हौसले को पस्त नहीं कर सकीं। ‘एकलव्य’ की तरह हर एक मुश्किल के साथ उसकी हिम्मत और बढ़ती गई और उसने हमेशा सटीक निशाना लगाया। ताजा खबर ये है कि इस किशोर ने बैंकॉक में चल रही एशिया कप तीरंदाजी में भारत को सोना दिलाया है।

स्वर्ण पदक के साथ गोरा हो

कौन है ये एकलव्य ?

17 साल के इस किशोर का नाम है गोरा हो। वो आदिवासी है। एशिया कप स्टेज वन तीरंदाजी प्रतियोगिता में अपने साथी आकाश और गौरव लांबे के साथ तीरंदाजी के रिकर्व ईवेंट में गोरा ने नंबर एक मानी जाने वाली मंगोलिया की टीम को गुरुवार को हरा दिया। गोरा इससे पहले सब जूनियर और जूनियर प्रतियोगिताओं में 100 से ज्यादा मेडल हासिल कर चुका है। छह साल पहले गोरा की प्रतिभा देखकर उसे झारखंड का एकलव्य कहा जाने लगा।

ओलंपिक में भेजना चाहते हैं कोच
गोरा हो अभी सरायकेला के दुगनी तीरंदाजी अकादमी में बी. श्रीनिवास राव से कोचिंग लेता है। श्रीनिवास राव का मानना है कि अगर गोरा ओलंपिक में जाता है, तो भारत के लिए एक मेडल जरूर हासिल करेगा। वो चाहते हैं कि 2020 के ओलंपिक में गोरा को भारतीय दल में मौका मिले। राव का ये भी कहना है कि विदेशी कोच अगर गोरा को तीरंदाजी की बारीकियां सिखाए, तो इससे काफी मदद मिलेगी।

झारखंड सरकार ने की मदद
गोरा के टैलेंट को देखते हुए राज्य सरकार ने भी उसकी काफी मदद की। जिस धनुष से गोरा तीरंदाजी करता है, उसे सरकार ने बीते साल करीब तीन लाख रुपये में खरीदा था। परिवार को भी गोरा के जरिए अपनी गरीबी मिटने की उम्मीद है। उसके बड़े भाइयों में से एक प्रेम शंकर का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गोरा काफी कुछ कर सकता है, बस उसे तीरंदाजी की बारीकियां सिखाने वाला कोई विशेष कोच मिलना चाहिए।