नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद से पेट्रोल-डीजल की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्‍तर पर पहुंच गई हैं।  दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 74.40 रुपये प्रति लीटर ओर डीजल 65.65 रुपये प्रति लीटर बिका। सोमवार को पेट्रोल के दाम जहां 55 महीनों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए, वहीं दिल्ली में डीजल अब तक के सबसे महंगे दाम पर मिल रहा है। वर्तमान में दक्षिण एशियाई देशों में भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम सबसे ज्यादा हैं।

क्‍यों बढ़ रहीं कीमतें ?

तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। ऐसी आशंका है कि आगे भी कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रह सकती है। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल विदेशी कंपनियों से खरीदता है। ऐसे में महंगे कच्चे तेल से घरेलू कंपनियों की लागत बढ़ जाती है और कंपनियां घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा देती हैं।

सरकार पर कीमतें कम करने का दबाव

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से आम आदमी को राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती का दबाव बढ़ता जा रहा है। एक बार फिर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की मांग तेज हो गई है। मोदी सरकार बनने के बाद से अब तक 9 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई जा चुकी है, जबकि कटौती केवल एक बार ही हुई और वह भी मात्र 2 रुपये की। बता दें कि तेल कंपनियां पिछले साल जून से रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव कर रही हैं।