• सुप्रीम कोर्ट ने कहा – अगर प्राइवेट हाथों से डेटा लीक हुआ तो क्या होगा, हम इसको लेकर चिंतित

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (17 अप्रैल) को आधार मामले की सुनवाई के दौरान इसकी सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल उठे। आधार के लिए ली गई जानकारी कितनी सुरक्षित है, इस पर भी चिंता जताई गई। सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि आधार डेटा लीक होने से चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि आधार के लिए लिया गया डेटा सुरक्षित है, यह कहना मुश्किल है क्योंकि देश में डेटा सुरक्षा को लेकर कोई कानून नहीं है। मामले की सुनवाई 18 अप्रैल को भी जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने ‘आधार’ के तहत दर्ज जानकारी के सुरक्षित होने को लेकर एक गंभीर सवाल उठाया। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि देश में डाटा सुरक्षा को लेकर कोई सख्त कानून नहीं है, तो ऐसे में यह कहना कि लोगों का डाटा सुरक्षित है, कहां तक उचित है ? ऐसे में अगर आधार का डाटा लीक हो गया तो इससे आगामी चुनाव का परिणाम को प्रभावित हो सकता है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘अगर आधार डेटा का इस्तेमाल चुनाव नतीजों को प्रभावित करने में होगा तो क्या लोकतंत्र बच पाएगा ?’

क्‍या कहा यूआईडीएआई ने ?

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के वकील राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि तकनीकी विकास हो रहा है और उसकी सीमाएं हैं। इस पर न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, ‘ज्ञान की सीमाओं के कारण हम वास्तविकता से आंख नहीं चुरा सकते क्योंकि कानून लागू करने जा रहे हैं और वह भविष्य को प्रभावित करेगा। यूआईडीएआई की ओर से कहा गया – ‘आधार के तहत डाटा का संग्रह कोई परमाणु बम नहीं है। यह याचिकाकर्ताओं की तरफ से फैलाया हुआ डर मात्र है। हम सुनिश्चित करेंगे कि डेटा लीक नहीं हो लेकिन 100 फीसदी गारंटी तो नहीं हो सकती।’ इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूआईडीएआई के लेवल पर डेटा लीक नहीं होता, ये हम मानते हैं लेकिन अगर प्राइवेट हाथों से डेटा लीक होता है तो क्या होगा ? हम इस बात को लेकर चिंतित हैं।