नई दिल्ली। कर्नाटक में बीजेपी की बीएस येदियुरप्पा सरकार को अगले 24 घंटे यानी शनिवार शाम 4 बजे तक अपना बहुमत साबित करना होगा। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए बोबडे की बेंच ने मामले में सुनवाई के बाद ये आदेश दिया है।

कोर्ट में बीजेपी और जजों ने क्या कहा ?
बीजेपी की ओर से मुकुल रोहतगी ने गवर्नर की चिट्ठी सौंपी। साथ ही येदियुरप्पा की वो चिट्ठी सौंपी, जो गवर्नर वजुभाई वाला को दी गई थी। रोहतगी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और जेडीएस अपने विधायकों को धमकाकर हैदराबाद ले गए हैं। उन्होंने बीजेपी का समर्थन कर रहे कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों के नाम बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और जेडीएस ने गवर्नर को समर्थक विधायकों की जो लिस्ट सौंपी है, उसमें कई विधायकों के दस्तखत नहीं हैं। इस पर बेंच के प्रमुख जज जस्टिस एके सीकरी ने कहा कि सरकारिया आयोग की रिपोर्ट में सबसे पहले सबसे बड़ी पार्टी को बुलाने का सुझाव दिया गया था। उन्होंने ये भी कहा कि ये तो नंबरों का खेल है। इसके अलावा वोटरों को किसी गठबंधन के बारे में पता नहीं था। जस्टिस सीकरी ने कहा कि वोटरों के मत का सम्मान होना चाहिए। बेंच ने दो सुझाव दिए। पहला ये कि इस मामले में बड़ी बेंच में सुनवाई हो। दूसरा कि 24 घंटे में येदियुरप्पा बहुमत साबित करें।

कांग्रेस ने कोर्ट में क्या कहा ?
कांग्रेस और जेडीएस की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि येदियुरप्पा ने चुनाव से पहले ही बहुमत का दावा कर दिया था। उन्होंने कहा कि गोवा, मणिपुर वगैरा में सबसे बड़े दल को बुलाने के नियम का पालन नहीं किया गया और चुनाव के बाद बने गठबंधन की सरकारें बनवाई गईं। इस पर कोर्ट ने कहा कि सदन में बहुमत साबित करना महत्वपूर्ण है। इसके बाद कांग्रेस आलाकमान से बात करने के बाद सिंघवी ने कहा कि वो 24 घंटे में बहुमत साबित करने की बात मान लेते हैं। उन्होंने कांग्रेस और जेडीएस विधायकों के लिए सुरक्षा की मांग की। इस पर बीजेपी की ओर से मुकुल रोहतगी ने कम से कम एक हफ्ते की मांग की। कोर्ट ने इसे मानने से इनकार कर दिया।

गवर्नर की चिट्ठी पर क्यों मचा विवाद ?
दरअसल, चुनाव नतीजे आने के बाद कांग्रेस ने जेडीएस को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया था। इसके बाद दोनों पार्टियों ने 116 विधायकों की सूची गवर्नर वजुभाई वाला को देते हुए सरकार गठन के लिए न्योता मांगा था। वहीं, गवर्नर ने बीएस येदियुप्पा को न्योता देते हुए बीजेपी की सरकार बनवा दी। साथ ही बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का वक्त भी दे दिया। कांग्रेस और जेडीएस का कहना है कि येदियुरप्पा ने बहुमत साबित करने के लिए गवर्नर से 7 दिन का वक्त मांगा था, लेकिन ज्यादा वक्त दिया गया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में गठबंधन की ओर से कहा गया था कि गवर्नर वजुभाई वाला को पहले गठबंधन को सरकार बनाने का न्योता देना चाहिए था, लेकिन वो नहीं दिया गया। कांग्रेस और जेडीएस इसे संविधान का उल्लंघन कहते हैं।

कर्नाटक में किसको कितनी सीटें ?
कर्नाटक में 15 मई को आए चुनाव नतीजों में बीजेपी को 104 सीटें मिली हैं। जबकि कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 38 सीटें मिली हैं। इसके अलावा 2 सीटें निर्दलीय विधायकों को मिली हैं। एक निर्दलीय विधायक ने बीजेपी को समर्थन देने की चिट्ठी गवर्नर को सौंपी है।

बहुमत के लिए क्या है आंकड़ा ?
कर्नाटक विधानसभा में 224 सीटें हैं। 222 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। 2 सीटों के लिए 28 मई को वोट डाले जाएंगे। फिलहाल बहुमत के लिए 112 विधायकों का समर्थन चाहिए।

देवेगौड़ा को पीएम मोदी ने किया फोन
आज पूर्व पीएम और जेडीएस के संस्थापक एचडी देवेगौड़ा का जन्मदिन है। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें फोन कर बधाई दी। देवेगौड़ा ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि वो मोदी के आभारी हैं। हालांकि, नतीजे आने के बाद देवेगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा कर दिया था।

हैदराबाद ले जाए गए कांग्रेस-जेडीएस विधायक
पहले कांग्रेस और जेडीएस ने अपने विधायकों को खरीद-फरोख्त से बचाने के लिए बेंगलुरु के ही इगलटन रिसॉर्ट में रखा था। बीएस येदियुरप्पा के सीएम पद का शपथ लेने के बाद रिसॉर्ट के आसपास सुरक्षा हटा दी गई थी। जिसके बाद कांग्रेस और जेडीएस ने विधायकों को तीन बसों में बिठाकर गुरुवार रात को ही तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद भेज दिया।