नई दिल्ली। मोदी सरकार में ग्रामीण इलाकों का विकास थम गया है। पीएम नरेंद्र मोदी के 4 ड्रीम प्रोजेक्ट के टारगेट पिछड़ गए हैं। इसका खामियाजा 2019 में बीजेपी को भुगतना पड़ सकता है। इस आशंका में केंद्र सरकार ने दिसंबर 2018 तक हर हाल में योजनाओं को 100 फीसदी पूरा करने का आदेश बीजेपी शासित राज्यों के अफसरों को दिया है।

कौन सी योजनाएं पटरी से उतरीं ?
ग्रामीण इलाकों में रोजगार देने वाली मनरेगा, पीएम आवास योजना, सांसद आदर्श ग्राम योजना और दीन दयाल उपाध्याय कौशल विकास योजना पटरी से उतरी हुई हैं। इन सारी योजनाओं में 40 से 50 फीसदी ही काम हुआ है।

केंद्र ने दिए निर्देश
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बीते दिनों सभी योजनाओं की समीक्षा की थी और राज्यों को 31 दिसंबर, 2018 तक इन्हें सौ फीसदी पूरा करने को कहा गया है। 2016-17 और इससे भी पुरानी योजनाओं को 30 जून 2018 तक पूरा करने के निर्देश भी राज्यों को दिए गए हैं।

मनरेगा का बुरा हाल
मनरेगा के तहत यूपी में 16.49 लाख में से 3.66 लाख काम पूरे हुए। बिहार में 67 हजार काम ऐसे हैं, जिन पर कोई रकम खर्च नहीं हुई है। अब तक यहां टारगेट का 13 फीसदी ही काम हुआ है। छत्‍तीसगढ़ में 46 फीसदी, गुजरात में 30 फीसदी, झारखंड में करीब 70 फीसदी, मध्य प्रदेश में करीब 80 फीसदी, महाराष्ट्र में 73 फीसदी, राजस्थान में करीब 90 फीसदी और असोम में 75 फीसदी काम 2017-18 के बाकी हैं।

आवास योजना में भी नहीं बने घर
पीएम आवास योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में 95 लाख से ज्यादा घर बनने थे। अब तक इनमें से 34 लाख से कुछ ज्यादा घर बने हैं। सिर्फ अरुणाचल प्रदेश, आंध्र और तमिलनाडु में ही टारगेट के मुताबिक पीएम आवास योजना के घर बने हैं।

सांसदों के आदर्श ग्रामों का भी पुरसाहाल नहीं
सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत 703 गांवों में 40 हजार प्रोजेक्ट शुरू हुए, लेकिन 53 से 85 फीसदी तक काम अभी बचा है।

कौशल का क्या ऐसे होगा विकास ?
दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के तहत गांवों में रहने वाले करीब 8 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देना था, लेकिन अब तक करीब 6 लाख युवा ही प्रशिक्षित हो सके हैं।