लंदन। जिन लोगों को जुकाम, निमोनिया, फेफड़ों से संबंधित अन्य इन्फेक्शन या यूरिनरी ट्रैक्ट का इन्फेक्शन होता है, उनके लिए सावधान होने का वक्त है। बर्मिंघम के एस्टन मेडिकल स्कूल और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एक शोध से पता चला है कि ऐसे मरीजों को हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा पड़ने की आशंका ज्यादा होती है।

क्या कहता है शोध ?
इस शोध को 12 लाख मरीजों पर किया गया। इनमें निमोनिया और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के मरीज थे। शोध में पाया गया कि इन मरीजों में से 40 फीसदी को बीमार होने के आठ साल के भीतर हार्ट अटैक होने की 150 फीसदी आशंका होती है। शोध के मुताबिक, मोटापे के मुकाबले इन्फेक्शन से दिल की बीमारी की आशंका भी ज्यादा होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि इन्फेक्शन होने से नसों में सूजन आ जाती है। इससे खून का थक्का जमने की आशंका भी होती है। नसों में जमे खून के थक्के से दिल का दौरा पड़ सकता है।

शोधकर्ताओं ने क्या सुझाव दिया ?
शोधकर्ताओं ने कहा है कि जुकाम, निमोनिया या अन्य फेफड़े संबंधी इन्फेक्शन का इलाज उसी तरह होना चाहिए, जैसा हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल या डायबिटीज के मरीज का किया जाता है। मरीज को भविष्य में हार्ट अटैक से बचाने के लिए स्टैटिन्स या एस्प्रिन दी जानी चाहिए। शोध के मुताबिक, हार्ट अटैक पड़ने पर इन्फेक्शन के मरीजों की मौत अन्य हार्ट अटैक के मरीजों की मौत से ज्यादा होती है।

करोड़ों लोगों को होता है निमोनिया, यूटीआई
दुनिया में हर साल करोड़ों लोगों को निमोनिया होता है। ब्रिटेन में ही हर साल करीब छह लाख लोगों को निमोनिया या फेफेड़े के अन्य इन्फेक्शन की वजह से अस्पतालों में दाखिल कराया जाता है। इसके अलावा हर साल ब्रिटेन में करीब तीन लाख मरीज यूरिनरी इन्फेक्शन के होते हैं।