वॉशिंगटन/टोरंटो। अगर आपको भरपूर नींद नहीं आती है तो सावधान। एक शोध कहता है कि जो लोग कम सोते हैं, उन्हें अल्जाइमर हो सकता है।

किसने किया शोध ?
अमेरिका में नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज ने इस शोध को छापा है। शोध को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने किया है। शोधकर्ताओं ने तो यहां तक पाया कि एक रात भी अगर ठीक से नींद न आई हो, तो दिमाग में बीटा एमीलॉयड नाम का प्रोटीन बन जाता है। इस प्रोटीन का अल्जाइमर से सीधा संबंध है। बीटा एमीलॉयड प्रोटीन आपस में जुड़कर एमीलॉयड का जमाव करते हैं, जो अल्जाइमर का संकेत होता है।

शोधकर्ताओं में शामिल जॉर्ज एफ. कूब ने बताया कि इस शोध से साफ हो गया है कि नींद न आने से दिमाग पर क्या असर पड़ता है। कूब ने कहा कि इस शोध से अल्जाइमर की बीमारी का उपचार खोजने में भी आसानी होगी। कूब ने बताया कि इस शोध में 22 से 72 साल तक के 20 लोगों को रखा गया। इनका पॉजीट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी यानी पीईटी टेस्ट किया गया। शोध के दौरान सभी को एक दिन भरपूर सोने दिया गया, जबकि दूसरे दिन उन्हें 31 घंटे जगाकर रखा गया। इससे पता चला कि नींद कम होने पर दिमाग के थैलामस और हिप्पोकैम्पस रीजन को नुकसान पहुंचा। बता दें कि दिमाग के इन्हीं दो रीजन को नुकसान पहुंचने से अल्जाइमर होता है।

दिमाग के इस हिस्से से होता है डिमेंशिया
भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया दिमाग के याददाश्त वाले हिस्से से होती है, लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो में हुए शोध से पता चला है कि दिमाग का ये हिस्सा मानसिक बीमारी, तनाव और डिप्रेशन का भी कारण बनता है। इस शोध को न्यूरोसाइंटिस्ट्स के एक दल ने किया। उन्होंने पाया कि दिमाग के याददाश्त वाले हिस्से यानी हिप्पोकैम्पस से ही ऊपर बताई गईं दिक्कतें होती हैं। शोधकर्ताओं ने चूहों के हिप्पोकैम्पस पर शोध करने के बाद ये जानकारी दी है।