• 5,000 करोड़ का लोन डिफॉल्ट करने के बाद रीड एंड टेलर और एस. कुमार्स ने कोर्ट का रुख किया

नई दिल्ली। देशभर में रेडीमेड कपड़ों के लिए मशहूर रीड एंड टेलर कंपनी ने 5,000 करोड़ रुपए का लोन न चुकाने के बाद बैंकों की तरफ से उसको दिवालिया घोषित करने के लिए अर्जी दाखिल की गई है। इसके अलावा रीड एंड टेलर की अभिभावक कंपनी एस. कुमार्स ने भी कोर्ट का रुख किया है।

फैशन ब्रांड रीड एंड टेलर कंपनी के प्रमोटर नितिन कासलीवाल को बैंकों ने विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया है। बैंक इस कदम के बाद अब कंपनी को दिलाविया घोषित करने के लिए कोर्ट की शरण में गए हैं। IDBI बैंक और एडेलवाइस असेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी ने रीड एंड टेलर और एस. कुमार्स को दिवालिया घोषित करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आईडीबीआई और एडेलवाइस ने इस मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल से जल्द फैसला लेने की अपील की है। इन दोनों कंपनियों ने कोर्ट में अभय मनुधने को आईआरपी नियुक्त करने का अनुरोध किया है। मनु ही दोनों कंपनियों को दिवालिया घोषित करने की पूरी प्रक्रिया देखेंगे।

कौन हैं विलफुल डिफॉल्‍टर ?

विलफुल डिफॉल्टर वो लोग होते हैं जिनके पास लोन चुकाने की क्षमता तो होती है लेकिन इसके बावजूद वो लोन के रूप में लिया गया पैसा नहीं लौटाते। ऐसे लोग बैंक से ली गई लोन की रकम को उसी काम में न लगाकर किसी और काम में खर्च कर देते हैं। इसके अलावा लोन के एवज में वे जो ऐसेट बैंक के पास गिरवी रखते हैं, उन्‍हें बैंक को बिना बताए ही बेच देते हैं। ऐसे ही लोगों को विलफुल डिफॉल्टर की श्रेणी में रखा जाता है।

कौन हैं कुमार्स और रीड एंड टेलर ?

टेक्सटाइल कंपनी एस. कुमार्स समूह वर्ष 1943 में इंदौर में स्थापित की गई थी। इसके संस्थापक शंकरलाल जी कासलीवाल और चंद्रावती शंकरलाल जी कासलीवाल थे। एस का मतलब संस्थापक शंकरलाल और कुमार्स का मतलब शंकरलाल के 6 बेटों से है। साल 2000 में एस. कुमार्स का नाम बदलकर एस. कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड (SKNL) हो गया। साल 1998 में एसकेएनएल ने स्कॉ़टलेंड की रीड एंड टेलर के साथ गठजोड़ किया।   (एजेंसी)