नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा न दिए जाने को मुद्दा बनाकर वाईएसआर कांग्रेस, मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाई है, जिसे अब ज्यादातर विपक्षी दलों का समर्थन मिलता दिख रहा है। हालांकि, आंकड़ों की बात करें, तो संख्याबल न होने की वजह से लोकसभा में विपक्ष के इस प्रस्ताव का गिरना तय है। यहां तक कि अगर शिवसेना भी एनडीए के पाले से हटकर विपक्ष के साथ खड़ा हो जाए, तो भी मोदी का बाल बांका नहीं होगा।

लोकसभा में विपक्ष का गणित
लोकसभा में विपक्ष का गणित उसे अविश्वास प्रस्ताव पास कराने में फिलहाल नाकाम है। विपक्ष के सांसदों की बात करें तो 543 सदस्यीय सदन में कांग्रेस के 48, तृणमूल कांग्रेस के 34, एआईएडीएमके के 37, बीजेडी के 20, टीडीपी के 16, सीपीएम के 9, वाईएसआर कांग्रेस के 9 और एआईएमआईएम का 1 सांसद है। यानी विपक्ष के खाते में कुल मिलाकर 174 सांसद होते हैं। अगर सपा के 7 सांसद और विपक्ष के प्रस्ताव के साथ खड़े हों, तो भी 181 ही संख्या बनती है, जबकि बहुमत के लिए 272 सांसदों का होना जरूरी है। इस तरह विपक्ष काफी पीछे है।

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लोकसभा में पार्टीवार सांसदों की स्थिति

बीजेपी का आंकड़ा मजबूत
बीजेपी के लोकसभा में 273 सांसद हैं। इसके अलावा उसके सहयोगियों के पास अभी 35 सीटें हैं, यानी 308 सांसद एनडीए के खाते में हैं। इनमें मोदी सरकार से नाराज चल रही शिवसेना के 18, रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के 6, शिरोमणि अकाली दल के 4, रालोसपा के 3, अपना दल के 2 और जेडीयू के 2 सांसद शामिल हैं। शिवसेना अगर विपक्ष के प्रस्ताव के साथ खड़ी भी हो जाए, तो भी अविश्वास प्रस्ताव पर फिलहाल बीजेपी ही जीतती दिखाई देती है।

बीजेपी ने साधा निशाना
बीजेपी ने आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ टीडीपी के एनडीए से बाहर जाने और वाईएसआर कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर निशाना साधा है। संसदीय कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि हर बार आम चुनाव से पहले संसद में इस तरह का नाटक दिखता ही है। वहीं, बीजेपी के नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा है कि टीडीपी ने मौकापरस्ती दिखाई और बीजेपी के पास मौका है कि वो अब खुद के बूते आंध्र प्रदेश से लोकसभा की सीटें हासिल करे।