•  27 अप्रैल तक अंतरराष्‍ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी नासा को भेज सकते हैं अपना नाम

चांद पर घर बसाना और अंतरिक्ष की सैर करने का सपना तो हर किसी का होता है, लेकिन ये हर किसी के लिए मुमकिन नहीं है। लोगों की ये ख्वाहिश अधूरी ही रह जाती है। आपका सूरज पर पहुंचना तो मुमकिन नहीं है, लेकिन अब अंतरराष्‍ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक ऐसा तरीका निकाला है जिससे आप अपना नाम सूरज तक जरूर पहुंचा सकते हैं। आपको ये सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन ये बात सोलह आने सच है।

नासा ने ढूंढी तरकीब

नासा एक ऐसी तरकीब लेकर आया हैजिसके जरिये लोग अपना नाम सूरज तक भेज सकते हैं। जी हां, वाशिंगटन में नासा के एक सीनियर साइंटिस्ट थॉमस ज्यूबर्शेन ने बताया कि सूरज ब्रह्मांड का सबसे चमकीला तारा हैजिसके चारों तरफ नौ ग्रह चक्कर लगाते हैं। उसके पास पहुंचना न तो आम लोगों के बस की बात है और न ही वैज्ञानिकों के। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नायाब तरीका निकाला है जिसके जरिये आप अपना नाम सूरज के वातावरण के अंदर पहुंचा सकते हैं। सूरज की तपिश और उसके चारों ओर फैले विकिरण को पार करते हुए आपका नाम सूरज के वातावरण के अंदर बहुत करीब तक पहुंचाएगा नासा का यान पार्कर सोलर प्रोब।

कैसे भेजा जा सकता है सूरज तक अपना नाम

सवाल उठता है कि आखिर यह संभव कैसे होगा? थॉमस का कहना है कि लोग अपना नाम नासा को भेज सकते हैं। इन नामों को एक माइक्रोचिप पर लिखा जाएगा। यह माइक्रोचिप स्पेसक्राफ्ट के माध्यम से सूरज के नजदीक भेजा जाएगाजो सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाएगा।

इसी साल शुरू होगा मिशन

नासा के मुताबिक, सूरज पर नाम भेजने के लिए अंतिम तारीख 27 अप्रैल,  2018 है। नासा का कहना है यह मिशन इस साल शुरू हो जाएगा। इतना ही नहीं, नासा ने बताया कि यह मिशन उन सभी सवालों के जवाब ढूंढ़ेगाजिनके जवाब पिछले छह दशक से सारे वैज्ञानिक तलाश रहे हैं। मई, 2017 में नासा ने इस यान का नाम सोलर प्रोब प्लस से बदलकर खगोलविद् यूजीन पार्कर के सम्मान में पार्कर सोलर प्रोब रख दिया था।  

छोटी कार जैसा है स्पेसक्राफ्ट

आपको बता दें इस मिशन में यूज़ होने वाला स्पेसक्राफ्ट एक छोटी कार के आकार है जो कि 5.9 मिलियन किलोमीटर का सफर तय करेगा। इस स्पेसक्राफ्ट की रफ्तार 4,30,000 मील प्रति घंटा है। प्रोफेसर थॉमस का कहना है कि इसका मतलब यह हुआ कि वाशिंगटन से टोक्यो पहुंचने में एक मिनट भी नहीं लगेगा। यह यान सीधे सूरज के वातावरण का सफर तय करेगा। नासा के मुताबिक इस मिशन का उद्देश्य यह जानना है कि किस प्रकार ऊर्जा और गर्मी सूर्य के चारों ओर घेरा बनाकर रखती हैं।