नई दिल्ली। अपराधियों और खासकर बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को कानून का कोई डर शायद नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में जो आंकड़े दिए गए, उससे यही निष्कर्ष निकलता है। अदालत को दी गई जानकारी के मुताबिक साल 2016 में ही देशभर में एक लाख बच्चे यौन अपराधियों का शिकार बने। चिंता की बात ये भी है कि इनमें से सिर्फ 229 मामलों में निचली अदालतें सजा सुना सकीं।

आंकड़े हैं चिंताजनक
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ को बच्चों के खिलाफ अपराधों के बारे में जानकारी दी गई। दरअसल, आठ महीने की मासूम से रेप के मामले में जनहित याचिका कोर्ट के सामने थी। याचिका दाखिल करने वाले ने बताया कि साल 2016 में पॉक्सो एक्ट के तहत कुल 1 लाख 1 हजार 326 मामले दर्ज हुए। इन मामलों में से 229 में ही फैसला आया, जबकि पॉक्सो एक्ट में दर्ज मामलों में एक साल में फैसला आ जाना चाहिए।

बच्चों के खिलाफ मामलों में बेतहाशा तेजी
आंकड़ों के मुताबिक, बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में बेतहाशा तेजी आई है। बीते 10 साल में ऐसे अपराधों में 500 फीसदी इजाफा हुआ है। आंकड़े ये भी बताते हैं कि 2006 से 2011 के मुकाबले 2012 से 2016 के बीच बच्चों के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी हुई है।

डराते हैं एनसीआरबी के आंकड़े
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के आंकड़े डराने वाले हैं। इनके मुताबिक, 2015-16 में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में 12786 की बढ़ोतरी दर्ज हुई। साल 2015 में केस की संख्या 94172 थी, लेकिन 2016 में ये 1 लाख 6 हजार 958 हो गईं।

किन राज्यों में बच्चों के खिलाफ अपराध ?
एनसीआरबी के मुताबिक, सभी राज्यों में बच्चों के खिलाफ होने वाले कुल अपराधों में से 50 फीसदी से ज्यादा पांच राज्यों में होते हैं। ये राज्य हैं यूपी, एमपी, दिल्ली, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल।

कोर्ट ने क्या कहा ?
आंकड़े देखने के बाद जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरलों से कहा कि वे पॉक्सो कानून के तहत दर्ज लंबित मामलों के आंकड़े जुटाकर केस को जल्दी निपटाने की कवायद में जुटें।