मुंबई। कैशलेस इंडिया की तरफ मोदी सरकार ने कदम बढ़ाए थे और इसे गेमचेंजर बताया था, लेकिन एक नई रिपोर्ट बैंकों के सामने नई मुश्किल का खुलासा कर रही है। बैंकों को चूना लगाने की खबरों के बीच अब ये जानकारी सामने आई है कि लोग अपनी जमा रकम को तेजी से निकाल रहे हैं। बताते हैं कि ऐसे में आपने अगर कर्ज लिया है तो आप पर इसका क्या असर होने जा रहा है।

क्या है मामला ?
बीते दिनों पीएनबी समेत कई बैंकों को कर्ज के नाम पर चूना लगाने की शिकायत सामने आई थी। एनपीए यानी ऐसे कर्ज जो चुकाए नहीं जा रहे हैं, भी हजारों करोड़ का है। इन सबके बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई की ताजा रिपोर्ट बताती है कि बीते दो महीने में जमाकर्ताओं ने बैंकों से काफी तेजी से पैसा निकाला है।

जनवरी-फरवरी में बैंकों की तिजोरी कितनी हुई खाली ?
एसबीआई के मुताबिक, जनवरी में सिस्टम में करेंसी 45 हजार करोड़ बढ़ गई थी, जबकि फरवरी में ये आंकड़ा 51 हजार करोड़ का हो गया। हालांकि करेंसी का सर्कुलेशन इन दो महीनों में औसतन 10 से 20 हजार करोड़ तक ही पहले बढ़ता था। इस साल मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हैं। उस दौरान करेंसी सर्कुलेशन और भी बढ़ सकता है।

लगातार गिर रहा जमा का आंकड़ा
नोटबंदी के बाद नवंबर, 2016 में बैंकों में जमा की दर अपने उच्चतम स्तर 15.6 पर पहुंची थी। अप्रैल में ये गिरकर 10.9 फीसदी पर आ गई, जबकि फरवरी 2018 में जमा की दर में और गिरावट हो गई और फिलहाल ये 5.9 फीसदी है।

क्या होगा असर ?
एसबीआई की रिपोर्ट कहती है कि लोग अगर जमा पूंजी को ज्यादा निकालेंगे, तो बैंकों के पास पैसा कम हो जाएगा। इससे बैंक डिपॉजिट पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। बैंकों के पास जब रकम कम होगी, तो कर्ज पर भी ब्याज दरें बढ़ेंगी। बता दें कि बीते हफ्ते ही एसबीआई, पीएनबी और आईसीआईसीआई ने कर्ज पर ब्याज दरें बढ़ा दी थीं। इसके अलावा बाजार में ज्यादा रकम आने पर महंगाई बढ़ने का अलर्ट भी रिजर्व बैंक ने दिया था।