नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा न देने से नाराज तेलुगूदेशम पार्टी यानी टीडीपी और आंध्र की ही वाईएसआर कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। आपको बताते हैं कि आखिर अविश्वास प्रस्ताव क्या होता है और मोदी सरकार को इस प्रस्ताव से कितना खतरा है।

अविश्वास प्रस्ताव आखिर क्या ?
संसद के नियमों के मुताबिक, केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ विपक्षी दल अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं। ऐसे प्रस्ताव छह महीने के अंतर पर ही लाए जा सकते हैं। प्रस्ताव पास होने पर सरकार गिर जाती है। प्रस्ताव का मतलब होता है कि सरकार पर भरोसा नहीं है या उसे किसी मामले में बहुमत हासिल नहीं है।

प्रस्ताव को कितने सांसदों का समर्थन जरूरी
अविश्वास प्रस्ताव तभी माना जाता है, जब प्रस्ताव का समर्थन कम से कम 50 सांसदों ने किया हो। फिलहाल टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के प्रस्ताव के पक्ष में कांग्रेस, ममता बनर्जी की टीएमसी और कुछ अन्य दल हैं, जिनके सांसदों को मिलाकर कुल संख्या 50 से ज्यादा हो जाती है।

मोदी सरकार को कितना खतरा ?
लोकसभा में सांसदों की कुल सीटें 543 हैं। अभी इनमें से पांच सीटें खाली हैं। बीजेपी के पास स्पीकर समेत खुद के 275 सांसद हैं। अगर सभी सहयोगी दल भी साथ छोड़ दें, तो भी मोदी सरकार अविश्वास प्रस्ताव खारिज कराने के लिए जरूरी वोटों से लैस है।

बीजेपी को कैसे हो सकता है खतरा ?
बीजेपी के पास भले ही बहुमत है, लेकिन अगर उसके 10 सांसद बगावत कर दें, और सारे सहयोगी भी विपक्ष का साथ दें, तो मोदी सरकार अल्पमत में हो जाएगी और उसे इस्तीफा देना पड़ेगा।

लोकसभा में किस पार्टी के कितने सांसद ?

  • बीजेपी के 275 सांसद
  • कांग्रेस के 48 सांसद
  • एआईएडीएमके के 37 सांसद
  • टीएमसी के 34 सांसद
  • बीजेडी के 20 सांसद
  • शिवसेना के 18 सांसद
  • टीडीपी के 16 सांसद
  • टीआरएस के 11 सांसद
  • सीपीएम के 9 सांसद
  • वाईएसआर कांग्रेस के 9 सांसद
  • समाजवादी पार्टी के 7 सांसद
  • इनके अलावा 26 अन्य पार्टियों के 56 सांसद
  • लोकसभा में 5 सीटें हैं खाली

बीजेपी के सहयोगियों की संख्या

  • शिवसेना के 10 सांसद
  • लोक जनशक्ति पार्टी के 6 सांसद
  • अकाली दल के 4 सांसद
  • राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के 3 सांसद
  • जनता दल यूनाइटेड के 2 सांसद
  • अपना दल के 2 सांसद
  • अन्य दलों के 4 सांसद

दो सहयोगियों की भूमिका नहीं है साफ
बीजेपी के दो सहयोगियों शिवसेना और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी की भूमिका साफ नहीं है। दोनों दल वोटिंग में गैर मौजूद रह सकते हैं। अपना दल का भी एक सांसद बागी है। फिर भी बीजेपी को कोई खतरा फिलहाल नहीं दिख रहा है।

विपक्ष को क्या होगा फायदा ?

मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले दलों को पता है कि उनका प्रस्ताव पास नहीं हो पाएगा, लेकिन फिर भी वो प्रस्ताव खास वजह से लाए हैं। मोदी सरकार के विरोधी दलों को पता है कि प्रस्ताव पर चर्चा होगी, जिसमें वो अपने आरोपों से मोदी सरकार को घेर सकेंगे। चूंकि, संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण होता है, ऐसे में मोदी सरकार के खिलाफ उठी आवाज पूरे देश में सुनाई देगी। इसके अलावा मीडिया सारे आरोपों को लोगों तक पहुंचाएगा। चुनाव से पहले ऐसे में विपक्ष अपनी स्थिति वोटरों के बीच मजबूत करने की उम्मीद बांधे हुए है।