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दस्तावेजी प्रक्रिया में पेच की वजह से ‘सौभाग्यशाली’ नहीं बन पा रहे गांव

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  • जोहानेस उरपेलेने
जोहानेस उरपेलेने

पीएम नरेंद्र मोदी ने हर घर में बिजली पहुंचाने के लिए महत्वाकांक्षी योजना ‘सौभाग्य’ नाम से शुरू की थी। इस योजना के तहत हर घर में मार्च 2019 तक बिजली पहुंचाई जानी है। इसके लिए मुफ्त या काफी सब्सिडी दिया जाना था, लेकिन योजना की सफलता के लिए जरूरी था कि गांव के लोग बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करें।

जब योजना बनाई गई, तो लग रहा था कि मोदी का ये ड्रीम प्रोजेक्ट हर घर और हर गांव को रोशन कर देगा, लेकिन सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि मार्च 2018 तक 3 करोड़ घर ‘सौभाग्यशाली’  नहीं बन सके और इन घरों में अंधेरा कायम है। इनमें से 1 करोड़ 30 लाख घर अकेले यूपी में और 30 लाख घर बिहार में हैं।

सौभाग्य योजना में 16 हजार 320 करोड़ रुपए का खर्च आना था। 2011 के सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना के आंकड़ों के तहत ऐसे घरों को चिह्नित किया जाना था, जहां बिजली नहीं है। वहीं, दूरदराज के इलाकों में सौर ऊर्जा से घरों को रोशन किया जाना था।

योजना में किस वजह से रुकावट ?
हमने उत्तर प्रदेश में जारी फील्डवर्क के दौरान पाया कि कनेक्शन लेने के लिए हर परिवार को आवेदन करना होता है, अपने पते का प्रूफ देना होता है, फोटो देनी होती है और पहचान का दस्तावेज भी देना होता है। गांव के प्रधान से लिखवाकर भी देना होता है कि संबंधित परिवार सौभाग्य योजना के तहत चुनी गई ग्राम पंचायत का निवासी है।
हालांकि, ये सारे दस्तावेज ऐसे परिवार के लिए दिक्कतों का सबब नहीं हैं, जिनके घर के सदस्य नौकरी में हों और सारे कागजात तैयार करना जानते हों। असली दिक्कत वहां है, जहां परिवार के सदस्य पढ़े-लिखे नहीं हैं और दो जून की रोटी भी मुश्किल से उन्हें मिलती है। जब हम बिना बिजली वाले घरों में गए और उनके कागजात पूरे करने में मदद देने की बात कही, तो कई लोगों को दस्तावेज जुटाने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हमने ऐसे में उनसे आसान सवाल पूछे और उनके दस्तावेज पूरे कराने की कोशिश की, लेकिन तमाम लोग ऐसे भी थे, जिनके पास पते या पहचान का कोई दस्तावेज नहीं था।

कैंप तो लगाए जा रहे, लेकिन ये हैं नाकाफी
केंद्र सरकार सौभाग्य योजना को पूरी तौर पर लागू करने के लिए कोशिश कर रही है। गांवों में कैंप लगाकर बिजली के कनेक्शन दिए जा रहे हैं। सरकारी अफसर कई गांवों के लिए एक कैंप लगाते हैं और कनेक्शन के लिए दस्तावेज पूरे कराते हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सरकार ने 500 से ज्यादा ऐसे कैंप लगाए हैं। फिर भी किसी गांव में एक कैंप लगाना काफी नहीं है। अगर कैंप में कोई परिवार नहीं आ पाता या कागजात नहीं दे पाता, तो बिजली कनेक्शन उसे नहीं मिल पाता है। हमारा अनुभव ये कहता है कि दस्तावेज पूरे करने में जो गलतियां लोग करते हैं, ऐसे में उन्हें कई बार आवेदन करने का मौका दिया जाना जरूरी है।

सभी घरों को बिजली कनेक्शन देने के लिए सुझाव
इस अनुभव के आधार पर हम सरकार को कुछ सुझाव दे रहे हैं, ताकि हर घर में बिजली पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना वो पूरी कर सके।

  • पहला सुझाव ये है कि बिजली कनेक्शन लेने के इच्छुक ग्रामीणों के लिए आवेदन को आसान बनाया जाए। आवेदन करने में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए मदद की जाए। आवेदकों को सुविधा मिले कि जो दस्तावेज वो दे नहीं सके, उन्हें बाद में जमा कर सकें। हर पावर हाउस में ऐसा फोन हो, जिस पर कॉल करके ग्रामीण अपनी दिक्कत बता सकें।
  • दूसरा सुझाव ये है कि स्थानीय नेता ही लोगों के दस्तावेज पूरे कराएं क्योंकि सरकारी अफसर बार-बार किसी गांव में दौड़ नहीं लगा सकते। अगर ग्राम स्तरीय अफसर या ग्राम पंचायत के सदस्य आवेदन करने में मदद कर सकें, तो ग्रामीणों के लिए सौभाग्य योजना के तहत बिजली कनेक्शन लेना आसान हो जाएगा।

इन सुझावों पर अमल कर मोदी सरकार के साथ ही यूपी और बिहार की सरकारें भी बड़ी बाधा दूर कर सौभाग्य योजना का लक्ष्य हासिल कर सकती हैं। इस योजना के लिए अगले कदम के तौर पर ग्रामीण इलाकों में दी जाने वाली बिजली में सुधार की जरूरत है, ताकि ग्रामीणों को नए कनेक्शन लेने का फायदा दिखे। इसके लिए विद्युतीकरण के रेट भी पहले बढ़ाए जाने की जरूरत है।

(लेखक जोहानेस उरपेलेने जॉन हॉपकिंस स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज में प्रिंस सुलतान बिन अब्दुलअजीज चेयर में ऊर्जा, संसाधन और पर्यावरण के प्रोफेसर हैं। वो इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबेल एनर्जी पॉलिसी (ISEP) के संस्थापक निदेशक भी हैं। जोहानेस ने यह आलेख ‘द प्रिंट’ के लिए लिखा था। )

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