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YOUTUBE को गुरु बनाकर नीरज चोपड़ा ने CWG के जेवलिन थ्रो में पा लिया गोल्ड

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गोल्ड कोस्ट (ऑस्ट्रेलिया)। हरियाणा के सोनीपत में एक गांव है कांदरा। इस गांव के लोग खेती करते हैं। ऐसे ही एक किसान के घर पैदा हुए नीरज चोपड़ा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में वो कर दिखाया, जो किसी करिश्मे से कम नहीं है। नीरज ने गेम्स में जेवलिन थ्रो का गोल्ड मेडल हासिल किया है। आप सोचेंगे कि भला इसमें करिश्मा क्या है ? जरा सब्र कीजिए। आगे हम आपको बताने जा रहे हैं कि नीरज का ये कदम आखिर करिश्मे से कम क्यों नहीं है।

YOUTUBE को बनाया गुरु
नीरज गांव में रहते थे। उनका कोई कोच नहीं था, लेकिन जेवलिन थ्रो यानी भालाफेंक का खेल उन्हें बहुत अच्छा लगता था। गांव छोड़कर खेल सीखने शहर जा नहीं सकते थे, लेकिन नीरज धुन के थे पक्के। सो उन्होंने यूट्यूब को जेवलिन थ्रो सीखने का जरिया बनाया। यूट्यूब में इस खेल के वीडियो बार-बार देखकर नीरज ने गांव में ही प्रैक्टिस शुरू की और अब 20 साल की उम्र में कॉमनवेल्थ गेम्स में सोने का पदक जीतकर देश को गौरवान्वित कर दिया।

नीरज ने किसे पछाड़ा ?
नीरज ने गेम्स के 10वें दिन जेवलिन थ्रो में फाइनल में 86.47 मीटर की दूरी तक भाला फेंका। इस स्पर्धा में सिल्वर मेडल ऑस्ट्रेलिया के हेमिश पीकॉक ने 82.59 मीटर जेवलिन फेंककर हासिल किया। भारत के विपिन कसाना भी इसमें हिस्सा ले रहे थे, लेकिन वो 77.87 मीटर की दूरी तक जेवलिन फेंककर पांचवें स्थान पर रहे। ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स ने 82.20 मीटर की दूरी तक भाला फेंककर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

पिछले महीने भी जीता था गोल्ड मेडल
नीरज ने मार्च में पटियाला में हुए फेडरेशन कप में 85.94 मीटर की दूरी तक जेवलिन फेंककर गोल्ड मेडल हासिल किया था।

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