शिमला। एक छोटी सी कोशिश कब मिसाल कायम कर दे, कुछ कहा नहीं जा सकता। आज हम आपको एक ऐसा ही किस्सा बताने जा रहे हैं। ये सुनने में अजीब जरूर लगे लेकिन ये बहुत से लोगों के लिए प्रेरणादायक साबित हो सकता है। आपने अक्सर देखा होगा कि सरकारी स्कूल में न तो लोग पढ़ाने जाते हैं और न ही उन स्कूल में कोई अपने बच्चों को पढ़ने भेजता है, लेकिन आईआईटी मंडी के सहायक प्रोफेसर ने कुछ ऐसा किया जिसने सभी को हैरान कर दिया। उन्होंने अपने बेटे का दाखिला एक सरकारी स्कूल में कराया है।

उनकी पहल से यह साबित हो गया कि एक कोशिश कई लोगों की सोच बदल सकती है। आपको बता दें कि सहायक प्रोफेसर ने न केवल अपने बच्चे का सरकारी स्‍कूल में दाखिला करवाया, बल्कि उन्होंने अपने खर्च पर इस स्कूल में अंग्रेजी मीडियम से पढ़ाई कराने के लिए एक शिक्षक तैनात करने की पेशकश भी विभाग के सामने रखी।

प्रोफेसर रजनीश शर्मा की पत्नी ने स्कूल में नि:शुल्क पढ़ाने की शुरुआत की है। इससे पहले वह बतौर प्रोफेसर पढ़ा चुकी हैं। जॉब से ब्रेक के चलते उन्होंने सरकारी स्कूल में नि:शुल्क बच्चों को पढ़ाने का फैसला लिया है। वे दो घंटे तक बच्चों को पढ़ाएंगी। आपको बता दें कि गुरुवार को प्रोफेसर बच्चे के साथ स्कूल में पहुंचीं और बच्चों को पढ़ाया।

आईआईटी मंडी के सहायक प्रोफेसर रजनीश शर्मा मूलत: हमीरपुर के रहने वाले हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने राजकीय केंद्रीय प्राथमिक पाठशाला बाल मंडी में अपने बेटे का दाखिला करवाया है। गुरुवार को उनकी पत्नी बेटे को लेकर स्कूल पहुंचीं और खुद भी दो घंटे तक यहां बच्चों को पढ़ाया। इस स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक कुल 101 बच्चे शिक्षा पढ़ रहे हैं। इनमें 60 फीसदी से अधिक बच्चे बाहरी राज्यों के हैं।