• आईआईटी खड़गपुर के जियोलॉजी और जियोफिजिक्‍स विभाग के शोधकर्ताओं ने अध्‍ययन में किया दावा

नई दिल्‍ली। दुनिया की सबसे पुरानी नदी घाटी सभ्‍यताओं में से एक सिंधु घाटी सभ्‍यता का विनाश कैसे हुआ, इसको लेकर इतिहासकारों और वैज्ञानिकों में अलग-अलग मत हैं। कुछ का मानना है कि सिंधु घाटी सभ्‍यता के समाप्‍त होने का कारण बाढ़ थी तो कुछ का मानना है कि जलवायु परिवर्तन इसके लिए जिम्‍मेदार था। लेकिन अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान (आईआईटी), खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने दावा किया है सिंधु घाटी सभ्‍यता सूखे के कारण ही समाप्‍त हुई थी।

किसने किया शोध ?

एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक, आईआईटी खड़गपुर के जियोलॉजी और जियोफिजिक्‍स विभाग के प्रोफेसर अनिल के गुप्ता के नेतृत्व वाले शोधकर्ताओं के दल ने यह महत्‍वपूर्ण शोध किया है। शोधकर्ताओं ने लेह-लद्दाख की त्‍यो मोरिरी झील पर पिछले 5,000 वर्षों के दौरान मानसून में आए बदलावों का भी अध्‍ययन किया। ।

और कौन-कौन शोध में शामिल ?

प्रोफेसर गुप्ता के साथ वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादून और इंस्टीट्यूट ऑफ ईस्टुरिन एंड कोस्टल रिसर्च, शंघाई (चीन) के सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर के लद्दाख में स्थित सो मरोरी लेक में यह अध्ययन किया। यह अध्ययन बेहद प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका ‘क्‍वार्टरनरी इंटरनेशनल जर्नल’ में प्रकाशित किया जाएगा।

क्‍या कहा शोधकर्ताओं ने ?

आईआईटी खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि 4,350 साल पहले सिंधु घाटी सभ्‍यता के समाप्‍त होने के पीछे 900 साल का सूखा था। उन्‍होंने पाया कि उत्‍तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में 900 वर्षों तक ना के बराबर वर्षा हुई। इससे सिंधु घाटी सभ्‍यता को जीवन देने वाली नदियों के स्रोत सूख गए। इन्‍हीं नदियों के आसपास के इलाकों में सिंधु घाटी सभ्‍यता की बसावट थी। अभी तक कुछ थ्‍योरी बताती थीं कि यह सूखा करीब 200 साल रहा था, लेकिन इस नए शोध ने इस थ्‍योरी को गलत साबित कर दिया है। इन सबके कारण कृषि उत्पादन पर असर पड़ा और लोग यहां से हरियाली वाले क्षेत्रों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए। उन्‍होंने मुख्‍य रूप से पूर्व-मध्‍य उत्‍तर प्रदेश, पूर्व में बिहार और पश्चिम बंगाल, मध्‍य प्रदेश, विध्‍यांचल के दक्षिणी हिस्‍से और दक्षिण गुजरात की ओर पलायन किया।

कहां तक फैली थी सिंधु घाटी सभ्यता ?

सिंधु घाटी सभ्यता प्राचीन सभ्यताओं में सबसे ज्यादा भू-भाग में फैली हुई थी। यह प्रमुख रूप से दक्षिण एशिया के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों तक फैली थी। इसके तहत करीब 15 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र था जहां इस समय भारत, पाकिस्तान, बलूचिस्तान और अफगानिस्तान बसे हैं। सभ्यता में बेहद विकसित आधारभूत ढांचा, वास्तुकला, धातु विद्या मौजूद थी और विश्व की अन्य तत्कालीन सभ्यताओं के साथ उसके व्यापार एवं सांस्कृतिक संबंध थे।