लंदन। आने वाले वक्त में भारत समेत दुनिया के 122 देशों में अनाज के एक-एक दाने के लिए जंग मच सकती है। ब्रिटेन में हुए एक शोध से ये नतीजा निकला है। शोध के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन से खाद्यान्न की जबरदस्त कमी हो सकती है।

शोधकर्ताओं ने क्या कहा ?
ये शोध ब्रिटेन की एक्जेटर यूनिवर्सिटी ने किया है। इस शोध में दुनियाभर के 122 देशों से मिले आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इन देशों में एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के विकासशील और कम विकसित देश शामिल हैं। फिलॉसॉफिकल ट्रांजेक्शन ऑफ द रॉयल सोसायटी नाम की पत्रिका में एक्जेटर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिचर्ड बेट्स ने बताया कि जलवायु में बदलाव से भारी बारिश भी हो सकती है और सूखा भी पड़ सकता है। इससे अनाज उत्पादन पर बड़ा असर होगा।

क्या निकला शोध का नतीजा ?

  • टेंपरेचर बढ़ने से नमी बढ़ेगी। बाढ़ और सूखे से खेती पर असर पड़ेगा।
  • बाढ़ सबसे ज्यादा दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में आएगी। गंगा में पानी दोगुना से ज्यादा हो सकता है।
  • भारत और बांग्लादेश में बाढ़ ज्यादा आएगी। वहीं, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में सूखे के हालात बनेंगे।
  • भारत में कुल फसल में से 42 फीसदी से ज्यादा धान होता है। तापमान बढ़ने से इसका उत्पादन गिरेगा। हर 2 डिग्री सेल्सियस पर धान का उत्पादन 75 टन प्रति हेक्टेयर गिरेगा।
  • हर 1 डिग्री सेल्सियस तापमान की बढ़ोतरी पर गेहूं का उत्पादन 4 से 5 करोड़ टन कम होगा।
  • साल 2100 तक फसलों में 10 से 40 फीसदी की कमी आएगी। रबी की फसल को ज्यादा नुकसान होगा।
  • तापमान बढ़ने से पाला कम गिरेगा। इससे आलू, मटर और सरसों की फसल को कम नुकसान होगा।
  • समुद्र और नदियों का टेंपरेचर बढ़ने से मछली व अन्य जलीय जंतु भी कम हो जाएंगे। कीड़ों की संख्या बढ़ेगी, सूक्ष्म जीवाणु नष्ट होंगे।