Breaking News

नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा हुए रिकॉर्ड जाली नोट, संदिग्ध लेनदेन में 480% का इजाफा

17 0
  • वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाली फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट की रिपोर्ट में खुलासा
  • 2016-17 में जाली करेंसी के लेनदेन के मामलों में पिछले साल के मुकाबले 79% की बढ़ोतरी
  • 2016-17 में बैंकों और अन्य वित्तीय इकाइयों से 4.73 लाख संदिग्ध लेनदेन की मिलीं रिपोर्ट

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी लागू करते समय 500 और 1,000 नोटों को अवैध घोषित कर दिया था। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा था कि यह फेक करेंसी के खिलाफ एक बड़ा कदम साबित होगा। अब इसके विपरीत खुलासा हुआ है कि नोटबंदी के बाद देश के बैंकों को सबसे अधिक मात्रा में जाली नोट मिले हैं। यही नहीं, इस दौरान संदिग्ध लेनदेन के मामलों में भी 480% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।

किसने दी रिपोर्ट ?

वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाली फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) ने यह रिपोर्ट जारी की है। एफआईओ का कहना है कि वित्तीय संस्थानों में साल 2016-17 में जाली नोट पाए जाने के मामले अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। यही नहीं, संदिग्‍ध लेनदेन के मामलों में भी बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। यह एजेंसी देश में होने वाले संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन पर नजर रखती है।

क्‍या कहा गया है रिपोर्ट में ?

नोटबंदी के बाद आई इस पहली रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2016-17 के दौरान जाली नोटों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले 79 फीसदी का इजाफा हुआ है। 2015-16 में जाली मुद्रा रिपोर्ट (सीसीआर) की संख्या 4.10 लाख थी, जो 2016-17 में यह 3.22 लाख की बढ़ोतरी के साथ 7.33 लाख पर पहुंच गई। नोटबंदी के बाद बड़ी मात्रा में फेक करेंसी जब्त हुई है। पिछले दिनों हैदराबाद में डीआरआई ने एक यात्री से 2000 के 510 नकली नोट बरामद किए थे। पूछताछ में उसने बताया कि ये नकली नोट बांग्लादेश से लाए जा रहे थे। एक रिपोर्ट के अनुसार, फेक करेंसी जब्ती के मामले में गुजरात सबसे ऊपर है। यहां जनवरी 2017 से फरवरी 2018 तक कुल 2.31 करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं, जबकि पूरे देश में यह आंकड़ा 6.77 करोड़ का है।

संदिग्ध लेनदेन भी बेतहाशा बढ़ा

एफआईओ की रिपोर्ट के अनुसार, देश में संदिग्ध लेनदेन में भी 480 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी और निजी बैंकों में 400 फीसदी से अधिक संदिग्ध लेनदेन के मामले पकडे गए हैं। वर्ष 2016-17 में कुल मिलाकर 4.73 लाख से भी अधिक संदिग्ध लेनदेन के बारे में बैंकों ने एफआईयू को सूचित किया। 2015-16 के मुकाबले इसमें 489% की बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2015-16 में संदिग्‍ध लेनदेन 1.05 लाख था। उधर, वित्तीय इकाइयों के मामले में यह बढ़ोतरी 270% रही। वित्तीय इकाइयों के संबंध में 2015-16 में संदिग्‍ध लेनदेन का आंकड़ा 40,033 था, जो नोटबंदी के बाद बढ़कर 94,837 पर पहुंच गया।

Related Post

पीएम मोदी का नया ड्रेसिंग स्टाइल, ब्‍लेजर व पठानी सूट में फिलीपींस पहुंचे

Posted by - November 12, 2017 0
मनीला। प्रधानमंत्री बनने से लेकर अब तक हमेशा नरेंद्र मोदी अपने ड्रेसिंग सेंस को लेकर चर्चा में रहे हैं। चाहे…

येदियुरप्पा होंगे कर्नाटक के नए सीएम, राज्यपाल ने दिया सरकार बनाने का न्यौता

Posted by - May 16, 2018 0
बेंगलुरु/नई दिल्ली। कर्नाटक के राज्‍यपाल वजुभाई वाला ने बुधवार (16 मई) रात को बीजेपी को सरकार बनाने का न्‍योता भेज दिया…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *