नई दिल्ली। कांग्रेस के नेतृत्व में 7 विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव दिया है। जज लोया केस में चीफ जस्टिस की बेंच ने गुरुवार को एसआईटी जांच कराने से इनकार कर दिया था। इसके एक दिन बाद ही सात विपक्षी दलों ने महाभियोग प्रस्ताव दिया। हालांकि बाद में आरजेडी और टीएमसी ने इस प्रस्‍ताव से अपने कदम पीछे खींच लिये।

किन दलों ने दिया समर्थन ?
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर 50 सांसदों ने दस्तखत किए हैं। ये सांसद कांग्रेस, बीएसपी, सपा, सीपीआई, सीपीएम, एनसीपी और मुस्लिम लीग के हैं। बता दें कि कांग्रेस ने प्रस्ताव लाने के लिए 11 विपक्षी दलों की बैठक संसद भवन के सेंट्रल हॉल में बुलाई थी। खास बात ये भी है कि पिछली बार बैठक के बाद महाभियोग प्रस्ताव लाने का फैसला हो गया था। तब प्रस्ताव पर 70 सांसदों ने दस्तखत किए थे। इस बार ये आंकड़ा 50 सांसदों का है।

वेंकैया नायडू को सौंपा महाभियोग प्रस्ताव
राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने प्रस्ताव तैयार करने के बाद उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के उपसभापति वेंकैया नायडू से मुलाकात कर चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव उन्हें सौंपा। बता दें कि जज लोया की कथित संदिग्ध हालात में मौत की जांच के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में कई विपक्षी दलों के नेताओं ने पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मिलकर मांग की थी।

4 जजों ने चीफ जस्टिस के खिलाफ खोला था मोर्चा
बता दें कि इस साल 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तमाम आरोप लगाए थे। ये जज थे जस्ती चलेमेश्वर, रंजन गोगोई, एमबी लोकुर और कुरियन जोसफ। चारों जजों ने सबसे बड़ा आरोप ये लगाया था कि लोया केस समेत तमाम बड़े मामलों को उनकी बेंच की जगह या तो चीफ जस्टिस सुनते हैं या जूनियर जजों की बेंच को ऐसे केस भेजे जाते हैं।