• कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 46,861 महिलाओं और पुरुषों के डीएनए की जांच की
  • वैज्ञानिकों ने पाया कि सहानुभूति के मामले में मात्र 10 फीसद अलग होना ‘जीन’ से निर्धारित होता है
  • रिजल्ट में सहानुभूति और प्रतिभागी के लिंग के बीच कोई संबंध नहीं दिखा

नई दिल्ली। जब कभी भी पुरुष भटका-भटका सा महसूस करते हैं तो वह जीव विज्ञान को दोष देने का प्रयास करते हैं। दरअसल वे ऐसे ही बने हैं, इसलिए यह उनकी गलती नहीं है। हालांकि सहानुभूति और आनुवांशिकी के बीच सबंध को देखने के लिए अब तक का जो सबसे बड़ा अध्ययन पुरुषों के डीएनए पर किया गया, उससे कुछ भी हासिल नहीं हुआ। जैसे- क्या सच में महिलाओं की तुलना में पुरुष कम देखभाल करने वाले होते हैं?

वास्तविकता तो यह है कि महिलाओं में हर तरह से दूसरों के प्रति अधिक सहानुभूति होती है। इसका मुख्य कारण है उनकी परवरिश, जीवन के अनुभव और सामाजिक स्तर पर मतभेद। इसी की वजह से महिलाओं में केयरिंग और सहानुभूति का स्तर पुरुषों के मुकाबले अधिक हो जाता है।

इस रिसर्च में ‘23 एंड मी’ जेनेटिक्स कंपनी में काम करने वाले कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 46,861 पुरुषों और महिलाओं का डीएनए सीक्वेंस देखने के लिए की लार का सैंपल लिया। फिर सभी प्रतिभागियों से 60 सवाल पूछे गए। जैसे – एक ग्रुप में किसी को अजीब या असुविधाजनक महसूस होने पर कौन जल्दी रिस्पांड करता है? वहीं किसी के बाल अच्छे या बुरे कटे होने पर कौन ईमानदारी ये कहने में नहीं हिचकिचाता कि बाल कैसे दिख रहे हैं? इन सभी जवाबों से यह जांचने की कोशिश की गई कि किसके जीन्स खुद को सहानुभूति से जोड़ते हैं, यानी उनकी जीन्स का झुकाव केयरिंग नेचर की तरफ है।

इस रिसर्च में सहानुभूति के मामले में सिर्फ 10 फीसद लोगों में जीन्स के कारण अंतर दिखाई दिया, लेकिन इस मामले में प्रतिभागियों के पुरुष या महिला होने से सहानुभूति का कोई लेना-देना नहीं मिला। बावजूद इसके महिलाओं ने सहानुभूति और केयरिंग के इस टेस्ट में 80 में से 50.4 नम्बर स्कोर किए, जबकि पुरुषों ने मात्र 41.9 फीसदी। ये नतीजे सीधे तौर पर पिछले शोध का समर्थन करते हैं, जिसमें पाया गया था कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं हर मामले में चेहरा बनाने, भाव बदलने में एक जैसी होती हैं।