• राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिनिधि सभा की नागपुर में चल रही बैठक में हुआ चुनाव
  • भैयाजी का कार्यकाल मार्च 2021 तक होगा, सरसंघचालक के बाद यह सबसे अहम पद

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने सुरेश भैयाजी जोशी को चौथी बार संगठन का सरकार्यवाह चुना है। वे वर्ष 2009 से ही इस पद पर हैं। मार्च में उनका कार्यकाल खत्म हो रहा था। आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की इस बैठक के लिए पूरे देश से करीब 3000 प्रचारकों को नागपुर बुलाया गया था। अब भैयाजी मार्च, 2021 तक इस पद पर रहेंगे।

सरसंघचालक के बाद सबसे अहम पद

सरकार्यवाह को आरएसएस प्रमुख यानी सरसंघचालक के बाद सबसे अहम पद माना जाता है। आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा हर तीन साल में आयोजित होती है और इसी में राष्ट्रीय महासचिव का चुनाव होता है। यह संघ के अहम फैसले लेने वाली संस्था है। सभा की बैठक 9 मार्च को शुरू हुई और 11 मार्च तक चलेगी। हालांकि इस चुनाव से पहले सरकार्यवाह के पद के लिए सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले या कृष्ण गोपाल के नामों की भी चर्चा चल रही थी, लेकिन अब इस पर विराम लग गया है।

कौन हैं भैयाजी जोशी ?
सरकार्यवाह बनाए गए भैयाजी जोशी का जन्म वर्ष 1947 में मध्‍य प्रदेश के इंदौर में हुआ। मुंबई यूनिवर्सिटी से स्‍नातक करने के बाद भैयाजी जोशी ने कुछ वर्ष तक एक निजी कंपनी में नौकरी की। इसके बाद संघ के पूर्णकालीन प्रचारक के रूप में नया जीवन शुरू किया। आपातकाल के दौरान उन्‍होंने भूमिगत रह कर कार्य किया। इसके बाद जोशी महाराष्ट्र के ठाणे, धुले, जलगांव और नासिक में जिला प्रचारक बने। वर्ष 1977 से 1990 तक वे विभाग प्रचारक रहे।

महाराष्ट्र में वर्ष 1990 से 1995 तक प्रांत सेवा प्रमुख सहित संघ के विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों को संभालने के बाद वह 1997 में अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख बने। अगले साल वह अखिल भारतीय सेवा प्रमुख बनाए गए। जोशी पिछले छह साल से आरएसएस के महासचिव (सरकार्यवाह) हैं। जोशी अब संयुक्त महासचिवों की अपनी टीम चुनेंगे। फिलहाल उनके तीन संयुक्त महासचिव दत्तात्रेय होसबोले, सुरेश सोनी और कृष्णगोपाल हैं।