लखनऊ। लोकसभा उपचुनावों में बीजेपी ने यूपी में इलाहाबाद की फूलपुर सीट के अलावा 28 साल पुराना भगवा गढ़ गोरखपुर भी गंवा दिया है। इसके साथ ही बीजेपी का टॉप नेतृत्व योगी के समर्थकों के निशाने पर आ गया है। गोरखपुर के बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पराजय का ठीकरा सीधे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर फोड़ा है।

क्या कहते हैं कार्यकर्ता ?
अमित शाह पर सीधा आरोपः एक वाट्सएप ग्रुप पर कार्यकर्ताओं ने लिखा है कि गोरखपुर मे नाथ संप्रदाय के मठ से प्रत्याशी न उतारने का अमित शाह का फैसला भारी पड़ा है।

एससी, ओबीसी से दूरीः कार्यकर्ताओं का मानना है कि एससी और ओबीसी मिलकर आबादी का 85 फीसदी हैं, लेकिन इनमे से किसी को सीएम नहीं बनाया गया। बीजेपी के राज्य में अध्यक्ष भी ब्राह्मण हैं।

ब्राह्मण-ठाकुर की राजनीतिः वाट्सएप ग्रुप में एक संदेश के मुताबिक योगी सरकार ठाकुरवाद को बढ़ावा दे रही है। इससे ब्राह्मण नाराज हैं। इसका असर गोरखपुर और फूलपुर दोनों जगह दिखा है।

छात्रों की नाराजगीः वाट्सएप ग्रुप पर आए संदेशों में से कई में कहा गया है कि छात्रों को नकल करने से रोकना, मेधावी छात्रों को वजीफा न देना और अब तक लैपटॉप न बांटे जाने का असर भी युवाओं का वोट न मिलने के रूप में सामने आय़ा है।

कार्यकर्ताओं में भी गुस्साः कई मैसेज ऐसे भी हैं, जिनमें कहा गया है कि बीजेपी में कार्यकर्ताओं की सुनी नहीं जाती। यहां तक कि सरकारी अफसर भी बीजेपी कार्यकर्ताओं की नहीं सुनते। इससे नाराज कार्यकर्ताओं ने पार्टी के लिए काम नहीं किया और दूरी बना ली। जिसकी वजह से पराजय हासिल हुई।

सिद्धांतों से भटकी बीजेपीः वाट्सएप में एक कार्यकर्ता ने एक हिंदी अखबार में विहिप नेता के बयान का हवाला दिया है। इसमें कहा गया है कि बीजेपी लगातार अपने और आरएसएस के सिद्धांतों से समझौता कर रही है। जिसका खामियाजा गोरखपुर और फूलपुर में पराजय के तौर पर बीजेपी को भुगतना पड़ा है।