• सबसे कम उम्र में नोबेल शांति पुरस्‍कार पाने वाली मलाला को तालिबान ने 2012 में मारी थी गोली
  • महिला शिक्षा की पैरवी करने के बाद हुआ था हमला, लंदन में इलाज के बाद वहीं रह रही थीं मलाला

इस्‍लामाबाद। सबसे कम उम्र में नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली मलाला यूसुफजई करीब छह साल बाद अपने देश पाकिस्तान वापस लौटी हैं। तालिबानी आतंकियों द्वारा साल 2012 में किए गए हमले के बाद मलाला पहली बार पाकिस्तान पहुंची हैं।

तालिबान ने 2012 में मारी थी गोली

बता दें कि महिलाओं के लिए शिक्षा की पैरवी करने पर मलाला यूसुफजई को तालिबान आतंकियों ने पाकिस्तान में 9 अक्टूबर, 2012 को सिर पर गोली मार दी थी। गोली लगने के बाद मलाला बुरी तरह घायल हो गईं थी, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए ब्रिटेन ले जाया गया था। इस घटना के बाद मलाला ने पाकिस्तान छोड़ दिया था और वह इंग्लैंड में ही रहने लगी थीं।

कौन हैं मलाला युसुफजई

मलाला का जन्म 1997 में पाकिस्तान के खैबर पख्‍तूनख्‍वाह प्रांत के स्वात जिले में हुआ। मलाला यूसुफजई पश्चिमोत्तर पाकिस्तान में सभी बच्चों को शिक्षा के अधिकार लिए अभियान चला रही थीं। वो सभी लोगों से तालिबान के हुक्मनामों को दरकिनार कर अपनी बहन-बेटियों को स्कूल भेजने की वकालत करती थीं। इससे तालिबान के लड़ाके खफा हो गए और अक्तूबर 2012  में मलाला जब घर जाने के लिए स्कूल वैन में सवार हो रही थीं, तभी उनके सिर में गोली मार दी गई। इसके बाद उन्हें पेशावर के मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए लंदन भेज दिया गया। उसके बाद से मलाला लंदन में ही रहती हैं।

2014 में मिला नोबेल पुरस्‍कार

तालिबानी हमले को मात देकर मलाला दुनिया के सामने महिलाओं की आवाज को बुलंद करने वाली महिला बनकर उभरीं। 2014 में मलाला को शांति का नोबेल पुरस्कार मिला। मलाला 17 साल की उम्र में नोबेल पाने वाली सबसे युवा पुरस्‍कार विजेता हैं।

मलाला को मिल चुके हैं कई पुरस्कार

मलाला जब पूरी तरह ठीक हुईं तो अंतरराष्‍ट्रीय बाल शांति पुरस्कार, पाकिस्तान के राष्ट्रीय युवा शांति पुरस्कार (2011) के अलावा कई बड़े सम्मान मलाला के नाम दर्ज होने लगे। 2012 में सबसे अधिक चर्चित शख्सियतों में पाकिस्तान की इस बहादुर बाला का नाम छाया रहा। लड़कियों की शिक्षा के अधिकार की लड़ाई लड़ने वाली साहसी मलाला यूसुफजई की बहादुरी के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा मलाला के 16वें जन्मदिन 12 जुलाई को ‘मलाला दिवस’ घोषित किया गया। मलाला को साल 2013 में भी नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। 2013 में ही मलाला को यूरोपीय यूनियन का प्रतिष्ठित ‘शैखरोव मानवाधिकार’ पुरस्कार भी मिला।