• गाँव तक बिजली पहुँची पर आधे गाँव में नहीं है कनेक्शन, यूपी में ऐसे सैकड़ों गाँव
  • लो वोल्टेज की समस्या से परेशान है आधी जनता

दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना की वेबसाइट बताती है कि 99.5% गांवों   बिजली पहुँच चुकी है और यूपी में तो यह संख्या 99.9% है, फिर भी निर्बाध और भरोसेमंद बिजली एक सुनहरा सपना ही है। बिजली कब आएगी और कब चली जाएगी, कोई भरोसा नहीं। कितना वोल्टेज आएगा, यह भी पक्का नहीं। जब भरोसेमंद और क्वालिटी की बिजली ही नहीं तो कैसे पनपेंगे ग्रामीण रोजगार और उद्योग? प्रस्‍तुत है रजनीश राज की रिपोर्ट :

भरोसेमंद बिजली दूर की कौड़ी

सरकारी आंकड़ों के उलट भारत में लगभग 25 करोड़ लोगों के लिए भरोसेमंद बिजली दूर का सपना है। पुणे स्थित एनर्जी ग्रुप ‘प्रयास’ देश के कई राज्‍यों में बिजली की गुणवत्ता का अध्ययन करता है। प्रदेश के कई जिलों में भी यह संस्था कार्यरत है। इस संस्था के अगर बीते 15 सितंबर के आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो प्रदेश में लो वोल्टेज की समस्या का सच सामने आ जाएगा। सहारनपुर के ग्राम पंचायत कुमारहेडा में 15 सितम्बर को पूरे दिन में 269 मिनट लो वोल्टेज की समस्या रही। फतेहपुर के हुसेपुर में 137 मिनट, झांसी के चिरगांव में 201 मिनट और वाराणसी के सोनारपुरवा में 116 मिनट इस दिन लो वोल्टेज रहा। वहीं सीतापुर के सिधौली में मात्र 19 मिनट ही लो वोल्टेज रहा। यह अलग बात है कि यहां इस दिन 514 मिनट बिजली ही नहीं आई। कमोवेश यही हाल प्रदेश के बाकी जिलों का भी है।

क्या है लो और नार्मल वोल्टेज और इससे क्या है नुकसान

पावर कॉरपोरेशन के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी राजेश अरोरा बताते हैं कि अगर उपभोक्ताओं को 220 वोल्ट से कम बिजली मिल रही है तो उसे लो वोल्टेज की श्रेणी में रखा जाएगा। अगर थोड़ा वोल्टेज कुछ समय के लिए लो है तो आम तौर पर उसका कुछ खास असर नहीं पड़ता है, लेकिन अगर वोल्टेज काफी लो आ रहा है तो यह बिजली से चलने वाले उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकता है। खास रूप से फ्रिज, टीवी, कूलर और वाशिंग मशीन को लो वोल्टेज से नुकसान पहुंच सकता है।

लो वोल्टेज की समस्‍या क्यों

बिजली चोरी और कम शक्तिशाली ट्रांसफार्मर के कारण आमतौर पर लो वोल्टेज की समस्या सामने आती है। जर्जर तारों के कारण टी एंड डी लॉस यानी ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लॉस होता है, जिसके कारण भी यह समस्या आती है। गांवों में भी लो वोल्टेज का मुख्य कारण ये ही हैं। यह जानकारी पावर कॉरपोरेशन के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी राजेश अरोरा ने दी।

क्यों नहीं मिल पाती क्वालिटी वाली बिजली

क्‍वालिटी की बिजली का मतलब है, बिना फ्लक्‍चुएशन के निर्धारित वोल्‍टेज (220 वोल्ट) में बिजली मिलना यानी लो या हाई वोल्टेज की समस्या न हो। जनरेशन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन के बीच तारतम्य रहेगा, तभी क्वालिटी की बिजली मिल पाएगी। क्वालिटी की बिजली न मिलने के निम्न कारण हैं–

  • ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लॉस
  • बिजली चोरी
  • कम शक्तिशाली ट्रांसफार्मर
  • ट्रांसफार्मरों की कमी
  • जर्जर तार
  • मांग के अनुरूप बिजली का उत्पादन न होना

बिजली टेस्ट में अच्छे-अच्छे क्षेत्र फेल

बिजली टेस्ट में अच्छे—अच्छे क्षेत्र फेल हैं। अगर 29 सितम्बर से 5 अक्टूबर, 2017 के बीच के एनर्जी ग्रुप ‘प्रयास’ के आंकड़ों पर गौर करें तो पाएंगे राष्ट्रीय राजधानी के करीब का एनसीआर क्षेत्र गाजियाबाद भी बिजली संकट में रहा है। यहां के इंदिरापुरम में इस दौरान 10.41 प्रतिशत समय बिजली नहीं रही। इसी प्रकार प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र वाराणसी के पांडेयपुर की बात की जाए तो वहां भी 2.29 प्रतिशत समय न सिर्फ बिजली संकट रहा बल्कि 1.56 प्रतिशत समय लो वोल्टेज की समस्या भी रही। सहारनपुर के बरीबग में 4.76 प्रतिशत समय बिजली तो नहीं रही, लेकिन लो वोल्टेज की समस्या यहां नहीं हुई। नीचे ग्राफ देखें –

Source : www.watchyourpower.org

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ग्राम पंचायतों में भी बिजली की दशा कुछ खास अच्छी नहीं मानी जा सकती है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे सीतापुर के धरमपुर में 29 सितम्बर से 5 अक्टूबर के बीच 40.25 प्रतिशत समय बिजली संकट रहा। 1.25 प्रतिशत समय में लो वोल्टेज की समस्या भी रही। इसी प्रकार से राजधानी से कुछ दूर पर स्थित झांसी के मोठ की बात करें तो यहां बिजली कटौती से अधिक लो वोल्टेज की समस्या रही। यहां इस दौरान 21.81 प्रतिशत समय बिजली नहीं रही तो 26.14 प्रतिशत समय में लो वोल्टेज का संकट रहा। हां, पर्यटन नगरी होने के नाते आगरा में स्थिति कुछ नियंत्रण में दिखी। यहां के धनौली में मात्र 3.32 प्रतिशत समय ही बिजली नहीं रही। नीचे ग्राफ देखें –

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इसी प्रकार नगर क्षेत्र सीतापुर के सिधौली व झांसी के चिरगांव की बात की जाए तो यहां भी 29 सितम्बर से 5 अक्टूबर के बीच करीब एक चौथाई समय यहां बिजली नहीं रही। चिरगांव में जहां 23.17 प्रतिशत समय बिजली की सप्लाई नहीं रही, वहीं सोने पे सुहागा यह रहा कि 11.50 प्रतिशत समय लो वोल्टेज की समस्या अलग से रही। सिधौली में लो वोल्टेज की शिकायत तो नहीं रही, लेकिन 26.87 प्रतिशत समय बिजली नहीं रही। नीचे ग्राफ देखें –

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इनके लिए तो डीजल मिनी ग्रिड ही पालनहार

लो वोल्‍टेज छोटे शहरों में बड़ी समस्‍या बन चुका है। यही कारण है कि जगह-जगह व्‍यापारी और दुकानदार शाम को बिजली के लिए डीजल जनरेटर पर निर्भर हैं। महराजगंज जिले के खुटहा बाजार की स्थिति 5 साल पहले यह थी कि वहां लो वोल्‍टेज की वजह से बल्ब का एलीमेन्ट किसी तरह लाल होता था और पंखे कभी-कभार नाच जाते थे। साइकिल मरम्मत करने वाले मुरलीधर ने उपाय निकाला। उन्‍होंने बड़े पावर का एक जनरेटर लगाया और दुकानों को 5 रुपये रोज के हिसाब से बिजली देना शुरू किया। देखते-देखते लोग जुड़ते गए और बाजार शाम को रोशन रहने लगा। यही नहीं, गोरखपुर के पॉश इलाके गोलघर के व्‍यापारी भी बिजली कटौती होने पर ऐसे ही जनरेटरों का सहारा लेते हैं। कमोवेश ज्‍यादातर बाजारों में यह चलन अब आम हो गया है।

विद्युतीकरण की कहानी

प्रदेश में सैकड़ों गाँव ऐसे हैं जहाँ आधे हिस्से में बिजली है और आधे में नहीं। सरकारी नियम के अनुसार, अगर किसी गाँव के 10% घरों और सरकारी सुविधाओं वाले भवनों जैसे स्कूल, पंचायत घर या हेल्थ सेंटर तक बिजली पहुँच जाती है तो उस गाँव को विद्युतीकृत माना जाता है। अक्‍सर यह देखने में आता है कि गांव में बिजली तो पहुंच गई है, लेकिन उसके विभिन्‍न पुरवे और मजरे विद्युतीकरण से महरूम हैं। इसके बावजूद उस पूरे गांव को विद्युतीकृत मान लिया जाता है, लेकिन ऐसा कहना पूरी तरह ठीक नहीं।

60 लाख परिवारों के पास कनेक्शन ही नहीं

प्रदेश में आज भी 60 लाख परिवार ऐसे हैं जिनके पास बिजली का कनेक्शन नहीं है। प्रदेश सरकार ने हर घर को रोशन करने के उद्देश्य से ‘पावर फॉर ऑल’ योजना के तहत 31 दिसम्बर, 2018 तक एक करोड़ घरों को बिजली कनेक्‍शन देने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने बीपीएल परिवारोंको मुफ्त एवं एपीएल को किश्तों में धनराशि पर बिजली कनेक्शन देने का प्रावधान भी किया है। बिना भागदौड़ के बिजली कनेक्शन मिल जाए, इसके लिए विद्युत समाधान मेले आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन मेलों के जरिए उपभोक्ताओं की समस्याओं का निस्तारण और आसानी से कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। आवेदन के 07 दिन के अन्दर कनेक्शन देने की बात कही जाती है,लेकिन वास्तव में ऐसा हो नहीं पाता है।

इस संबंध में नाका निवासी प्रभात गुप्ता का कहना है कि योजना चाहे कुछ भी हो लेकिन अधिकारी बिना लिए-दिए काम करते ही नहीं हैं। फार्म में कुछ न कुछ कमी निकाल कर उनको दौड़ाया जाता है। सात दिन में कनेक्शन प्राप्त करना किसी सपने के पूरे होने जैसा है। वहीं विकास नगर के मोहित सूरी कहते हैं कि उनको तो मालूम ही नहीं है कि बिजली का कनेक्शन प्राप्त करने के लिए कोई समय सीमा भी निर्धारित है।

कनेक्‍शन के नाम पर वसूली की शिकायतें

विकसित कॉलोनी में यदि 3 उपभोक्ता एक साथ कनेक्शन के लिए आवेदन करते हैं और उनके घर से पोल की दूरी 40 मीटर से अधिक है तो उनके लिए एक पोल निःशुल्क लगाने की व्यवस्था है। योजना में 5 पोल निःशुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है यानी एक साथ 15 आवेदक कनेक्शन के लिए आवेदन करेंगेतो 5 पोल तार सहित लगा दिए जाएंगे। इस योजना के बाद भी उपभोक्ताओं को दौड़ाया जाता है और कनेक्शन के एवज में अतिरिक्त धनराशि वसूले जाने की शिकायतें भी आम हैं। विद्युत उपभोक्ताओं की समस्याओं के निस्तारण के लिए प्रत्येक बृहस्पतिवार को ग्रामीण तथा प्रत्येक शनिवार को शहरी क्षेत्रों में विद्युत कैम्प लगाने की व्यवस्था है, लेकिन अक्‍सर उच्चाधिकारी ऐसे कैम्प से दूरी बनाए रखते हैं। ऐसे में ये कैम्प बेमानी साबित होते हैं।

हुसैनगंज के उपभोक्ता रामभरोसे लाल का कहना है कि शिकायती कैम्प लगाने की योजना को अच्छी है, लेकिन प्राय: कैम्प में अधिकारी आते ही नहीं हैं और जब अधिकारी कैम्प में आ जाते हैं तो इतनी भीड़ एकत्र हो जाती है ​कि अपनी बात रखना आसान नहीं होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थिति और भी दयनीय है। मोहनलालगंज के अशोक तिवारी का कहना है कि कैम्प कब और कहां लगता है, इसकी जानकारी भी आसानी से लोगों को नहीं मिल पाती है। अगर बिजली विभाग इसका प्रचार-प्रसार करवाए तो उपभोक्ताओं को लाभ हो सकेगा।

उपभोक्ता के पास क्या हैं उपाय

बिजली क्वालिटी खराब होने पर बिजली निगम से हर्जाना प्राप्त कर सकते हैं। उपभोक्ता सुरक्षा कानून-1986 (सेवा में कमी का मामला) बिजली विभाग पर भी लागू होता है। उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम या जन अदालत में जा सकते हैं। विद्युत नियामक आयोग के लखनऊ स्थित मुख्यालय में भी शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें बकाया बिल की एक तिहाई राशि जमा करनी होगी। बिजली चोरी को छोड़कर उपभोक्ताओं की हर तरह की समस्या के निस्तारण के लिए यह लोकपाल बना है, जहां 50 रुपये के पोस्टल ऑर्डर पर कोई भी अपील कर सकता है। यहां तीन महीने में समस्याओं का निस्तारण हो जाता है।