• अर्ध्य देते समय भी सीधे न देखें, जा सकती है रौशनी
  • 20 सेकेंड से ज्यादा देखने से जल सकती है रेटिना

दीपाली अग्रहरि

रोज सूर्यदेव को जल चढ़ाएं और बदलें अपना भाग्य, होगी धन–धान्य की वर्षा। बहुत से लोग आज भी इसका पालन अपनी रेगुलर लाइफ में करते हैं। इसी मनोकामना के साथ सदियों से लोग सूर्य को ‘जल’ चढ़ाते आ रहे हैं। हालाँकि इसमें थोड़ी सी चूक आपकी आँख की रोशनी भी ले सकती है।

यह है धार्मिक मान्यता

हिंदू धर्म के पंचदेवों में सूर्यदेव को प्रमुख देवता माना जाता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार दिन का आरंभ सूर्य को अर्घ्य देकर उनकी वंदना से किया जाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि सूर्य की दृष्टि से रोग और शोक नष्ट हो जाते हैं। प्रात: काल जब सूर्य लालिमा युक्त हो, उस समय उनके दर्शन करके अर्घ्य देना शुभ होता है। ऐसी मान्‍यता है कि रविवार को सूर्यदेव को अर्घ्‍य देने से मनचाही कामना पूरी होती है।

क्‍या कहता है ज्योतिष

ज्‍योतिष में सूर्य को व्‍यक्ति का प्राण कहा गया है। ज्योतिष में कहा गया है कि सूर्य नौ ग्रहों के स्वामी हैं। अगर आपका कोई भी ग्रह खराब है तो आप सूर्य देवता को प्रसन्न करें। ऐसा करने से बाकी सभी ग्रह खुद ही प्रसन्न हो जाएंगे। इसलिए अपने किस्मत को चमकाने के लिए रोज सूर्यदेव को जल चढ़ाना चाहिए, जिससे उनकी कृपा आपके ऊपर हमेशा बनी रहे।

क्या कहता है विज्ञान

विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो सूर्य और पृथ्वी के बीच करीब 1496000000 किलोमीटर की दूरी है। पृथ्वी तक सूर्य का प्रकाश पहुंचने में 8 मिनट 19 सेकेंड का समय लगता है। सूर्य को जल चढ़ाते समय पानी की धारा के बीच से उगते सूरज को देखते हैं तो हमारे आंखों की रोशनी तेज होती है। सूर्य की किरणों में विटामिन डी जैसे कई गुण भी मौजूद होते हैं,  जो हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन सूर्य को जल चढ़ाते समय उसे सीधी आंखों से नहीं देखना चाहिए, ऐसा करना आंखों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

दिल्ली के एम्स में आया था मामला

हाल ही में दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में 62 वर्षीय व्यक्ति की आँखों के इलाज़ के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि उस व्यक्ति को सोलर रेटिनोपैथी की समस्या है जिससे उसकी आँखों की रोशनी चली गई है। वह व्यक्ति 35 साल से रोजाना सूर्य को जल देते समय उसे 10 मिनट तक घूरता था जिससे उसकी रेटिना क्षतिग्रस्‍त हो गई और उस पर सूर्य की परछाई बन गई थी।

डॉक्टरों का मानना है कि अगर आप सूरज को बहुत लंबे समय तक घूरते हैं,  तो आपको सोलर रेटिनापैथी की समस्या हो सकती है। इस बीमारी में रेटिना हानिकारक किरणों, जैसे सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणों से क्षतिग्रस्त हो जाती है। सूर्य की किरणें आंख की पुतली से सिर के पिछले हिस्से में मौजूद रेटिना में प्रवेश करती हैं और उसे नुकसान पहुंचाती हैं। यहाँ तक कि ये अल्ट्रा वायलेट किरणें रेटिना को भी जला सकती हैं।

इससे रंगों को न पहचान सकने की समस्या पैदा हो जाती है और आंख की रोशनी पूरी तरह चले जाने की आशंका भी होती है। इन किरणों से आँखों के कोंस और रॉड को बहुत अधिक नुकसान पहुँचता है। कोंस और रॉड आँखों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे फोटोरिसेप्टर हैं, जो रंगों में अंतर पहचानने में सहायक होते हैं।

सूर्य को जल चढाने के फायदे

  • सूर्य  की किरणों में विटामिन डी होता  है जो शरीर के लिए आवश्यक है
  • पानी की धारा के बीच से आती हुई सूर्य की किरणों को देखने से आँखों की रौशनी तेज़ होती है
  • पानी के बीच से होकर आने वाली किरणों से जो रंग निकलता है वो शरीर में ऑब्जर्ब  होकर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं

गलत तरीका दे सकता है बड़ा नुकसान

लखनऊ की आँखों की विशेषज्ञ डॉ. आरती बताती हैं कि सूर्य को जल चढ़ाते समय कभी भी सीधे नहीं देखना चाहिए। जब आप सूर्य को देखते हैं तो कुछ समय बाद आँखों के सामने अँधेरा हो जाता है। ऐसा लगातार करने से आँखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगती है और चीजें धुंधली दिखने लगती हैं। उगते सूर्य की किरणों की इंटेंसिटी बहुत कम होती है जो आँखों के लिए बिलकुल भी हानिकारक नहीं हैं|

लखनऊ के एडिशनल सीएमओ डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि सौर रेटिनोपैथी के मुताबिक सूर्य को डायरेक्ट देखने से रेटिना पर बुरा असर पड़ता है। महज 20 सेकेण्ड भी अगर सूर्य को आप लगातार घूरते हैं तो वह भी नुकसानदेह है। सूर्य की रोशनी धरती पर आते–आते लगभग 1,350 वाट/वर्ग मी. पर बहुत तेज हो जाती है, जो कि रेटिना में 1.5 मी तक प्रवेश करती है। इसलिए किसी भी स्थिति में सूर्य को डायरेक्ट नहीं देखना चाहिए। सूर्य उगने के दो घंटे तक अल्ट्रा वायलेट किरणों की इंटेंसिटी बहुत कम होती है लेकिन इसके बाद वह आँखों के लिए खतरनाक हो सकती है।