• पासपोर्ट सेवा से जुड़ेगी अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम्स परियोजना
  • आवेदकों को पुलिस वेरिफिकेशन के लिए नहीं होना पड़ेगा परेशान, घूस देने से मिलेगी मुक्ति

आपके लिए खुशखबरी है। अब आपको पासपोर्ट बनवाने लिए पुलिस वेरिफिकेशन का इंतजार नहीं करना होगा। सरकार अब पासपोर्ट सेवा को अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम्स परियोजना (CCTNS)  के साथ जोड़ने की योजना बना रही है। CCTNS से जुड़ने के बाद एक क्लिक पर आवेदकों की पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी मिल जाएगी और इस प्रकार आवेदक का ऑनलाइन वेरिफिकेशन हो जाएगा। इससे पुलिस वेरिफिकेशन की झंझटों से मुक्ति मिल जाएगी। यह प्रक्रिया पूरी होने में करीब साल भर का वक्‍त लगेगा। प्रस्‍तुत है धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी की रिपोर्ट :

अब विदेश जाने के इच्‍छुक नागरिकों को अपने पासपोर्ट बनवाने के लिए ज्‍यादा परेशान नहीं होना पड़ेगा और न ही उन्‍हें पुलिस वेरिफिकेशन के नाम पर पुलिस वालों की मुट्ठी गरम करनी पड़ेगी। केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि का कहना है कि CCTNS को विदेश मंत्रालय की पासपोर्ट सेवा के साथ जोड़े जाने की तैयारी है। इसके बाद पुलिस को घर-घर जाकर आवेदक का सत्‍यापन करने की जरूरत नहीं होगी। सारा काम ऑनलाइन ही पूरा कर लिया जाएगा। इससे पुलिस वालों के घूस लेने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी।

कुछ राज्‍यों में हो रहा सीसीटीएनएस  का उपयोग

केंद्रीय गृह सचिव ने बताया कि कुछ राज्यों में पुलिस पहले से ही पासपोर्ट संबंधी आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए CCTNS का उपयोग कर रही है। पुलिस को आवेदक के पते पर जाने के लिए हैंडहेल्‍ड उपकरण दिए जाएंगे। इसके जरिए उनकी जानकारियां नेटवर्क पर डाली जाएंगी। ऐसा करने से आवेदक को पुलिस से संपर्क करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और इसमें समय भी कम लगेगा। उल्‍लेखनीय है कि बीते दिनों गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सीसीटीएनएस परियोजना के तहत एक डिजिटल पुलिस पोर्टल शुरू किया, जिसके जरिए अपराधों और अपराधियों का राष्ट्रीय ब्यौरा तैयार किया जाएगा। यही नहीं, डिजिटल पुलिस पोर्टल पर नागरिक ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे। इसके जरिए बैकग्राउंड वेरिफिकेशन का अनुरोध भी किया जा सकेगा।

पुलिस पोर्टल उपलब्ध कराएगा रिपोर्ट

राजनाथ सिंह ने पोर्टल शुरू करने के बाद बताया था कि पुलिस पोर्टल राज्य पुलिस और केन्द्रीय जांच एजेंसियों के लिए से 11 सर्च और 46 रिपोर्ट उपलब्ध कराएगा।  केन्द्रीय जांच एवं अनुसंधान एजेंसियों को अपराध आंकड़ों तक पहुंचने के लिए डिजिटल पुलिस ब्यौरे के लिए लॉग इन भी उपलब्ध कराए हैं।  गृहमंत्री ने बताया कि फिलहाल सीसीटीएनएस राष्ट्रीय ब्यौरे में अतीत और वर्तमान आपराधिक मामलों से जुड़े करीब 7 करोड़ डेटा रिकार्ड हैं। उन्होंने कहा कि सीसीटीएनएस परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यूनतम सरकार, कारगर शासन’ के सपने को पूरा करने में मदद करेगी।

देश के 15398 थाने आपस में जुड़ेंगे

गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि सीसीटीएनएस पूरे राष्ट्रीय अपराध एवं अपराधी ब्योरे पर पूरे भारत में खोजने में मदद करेगा। यह ब्‍योरा देशभर के जांच अधिकारियों की पहुंच में होगा। यही नहीं, सीसीटीएनएस परियोजना देशभर के करीब 15398 थानों और पांच हजार अतिरिक्त शीर्ष पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों को आपस में जोड़ेगी और इसके माध्‍यम से सभी थानों में प्राथमिकी दर्ज होने, जांच तथा आरोपपत्र के संबंध में डेटा का डिजिटलीकरण हो सकेगा।