• केंद्र ने बनाया है दुकानदारों को 4000 रुपये प्लास्टिक कूड़ा प्रबंधन शुल्क देने का कानून

मोटे पॉलीथीन बैग (50 माइक्रॉन से ज्यादा) बनाने, बेचने और इस्तेमाल करने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन ऐसे बैग रखने और ग्राहकों को इस्तेमाल के लिए देने वालों को 4000 रुपये मासिक फीस सरकार को देनी होगी। यह केन्द्र सरकार का कानून है, जो 8 अप्रैल 2016 को देशभर में लागू किया गया था। लखनऊ नगर निगम को भारत सरकार के इस कानून की जानकारी ही नहीं है। यही वजह है कि लखनऊ में छोटी-बड़ी मिलाकर हजारों दुकानें हैं जो ग्राहकों को पॉलीथान बैग में रखकर सामान देती हैं। कानून के अनुसार, इन  दुकानदारों को नगर निगम में रजिस्ट्रेशन करवा कर मासिक फीस देनी चाहिए लेकिन नगर निगम में ऐसा एक भी रजिस्ट्रेशन नहीं है। शिवम अग्निहोत्री की एक रिपोर्ट :

क्या है कानून

नियमों में कहा गया है कि पॉलीथीन बैग 50 माइक्रॉन से ज्यादा मोटाई के ही होने चाहिए। ऐसे प्लास्टिक बैग, कैरी बैग और पैकेजिंग पर उसके निर्माता का नाम-पता दर्ज करना अनिवार्य होगा। मोटी पॉलीथीन (50 माइक्रॉन से ऊपर) की बिक्री के लिए दुकानदारों को 4000 रुपये का प्लास्टिक कूड़ा प्रबंधन शुल्क हर महीने जमा करना होगा। यही नहीं, यह भी प्रावधान है कि केवल पंजीकृत दुकानदार ही प्लास्टिक के बैग में ग्राहकों को सामान दे सकेंगे।

पॉलीथीन की जांच करती नगर निगम की टीम

शासन कानून लागू करने में फेल

ड्रग्स, जहरीली शराब, नकली दवाइयां, सिन्थेटिक दूध व अन्य ऐसी ही चीजें गैरकानूनी हैं। इसी तरह 50 माइक्रॉन से नीचे की पॉलीथान का इस्तेमाल भी गैरकानूनी है। लेकिन जिस तरह तमाम गैर कानूनी चीजें धड़ल्ले से बनती, बिकती और इस्तेमाल की जाती हैं, ठीक इसी तरह प्रतिबंधित पॉलीथीन भी धड़ल्ले से बनती, बिकती और एक शहर से दूसरे शहर में ले जाई जाती हैं। इस पर रोक लगाने की जिम्मेदारी सरकार के प्रथम स्तर यानी जिलाधिकारी, नगर निगम और पुलिस की है और इस जिम्मेदारी में कम से कम यूपी में तो तीनों ही फेल हैं।

मोटी पॉलीथीन पड़ती है महंगी

50 माइक्रॉन से ज्यादा की पॉलीथीन बनाने की लागत में 20 प्रतिशत की वृद्धि हो जाती है। सरकार का तर्क है कि 50 माइक्रॉन से ज्यादा की पॉलीथीन महंगी होगी तो वह महंगी बिकेगी। इससे इसका इस्तेमाल स्वतः घट जाएगा। इसके अलावा ऐसी पॉलीथीन रिसाइकिल करने में आसान होती है।

4000 रुपये की फीस क्यों

4000 रुपये की फीस निर्धारित करने के पीछे सरकार का उद्देश्य यह है कि प्लास्टिक कूड़ा एकत्र करने, नष्ट या रिसायकल करने का खर्चा दुकानदार से ही लिया जाए। मोटी फीस के कारण भी प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल घटेगा।

गांवों में भी लागू है कानून

2016 का कूड़ा प्रबंधन कानून सिर्फ शहर में ही नहीं, गांव-गांव तक लागू किया गया है। उद्देश्य है कि लोग पॉलीथीन के इस्तेमाल के प्रति हतोत्साहित हों और इसका प्रयोग गांवों में भी कम हो सके।

नगर निगम के अधिकारी कानून से अनजान

प्लास्टिक पर रोक का हाल लखनऊ नगर निगम के पर्यावरण अभियन्ता पंकज भूषण का यह बयान साफ करता है कि ‘हमें इस तरह के किसी भी कानून के बारे नहीं पता है। हमारे यहां दुकानदार के पंजीकरण की कोई व्यवस्था नहीं है।’