• अभावग्रस्त लोगों के लिए रोटी, कपड़ा, खिलौना और बुक बैंक चलाने की अनूठी पहल

 वैसे तो तमाम बैंक हर दिन लाखों रुपयों का लेन-देन करते होंगे, लेकिन कुछ ऐसे बैंक भी हैं जो रुपया-पैसा नहीं बल्कि खुशियां बांटते हैं। अभावग्रस्त लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाना ही इन बैंकों का मुख्य बिजनेस है। ये ऐसे बैंक हैं जो रोटी, कपड़ा और खिलौने बांटते हैं या मूर्तियों और पुस्तकों को जमा करते हैं। इन बैंकों के बारे में जानकारी दे रहे हैं रजनीश राज

महोबा और हजारीबाग का रोटी बैंक

महोबा में रोटी बैंक शुरू करने वाले तारा पाटकर

बुंदेलखंड कई साल से सूखे और भूख से जंग लड़ रहा है। ऐसे में ग़रीबों और बुजुर्गों के लिए महोबा में ‘रोटी बैंक’ एक बड़ा सहारा है। रोटी बैंक अभियान के सूत्रधार हैं तारा पाटकर। वे कहते हैं कि सभी विचारधारा और दर्शन व्यर्थ हैं, अगर आपके आस-पास कोई भी भूखे पेट सोने के लिए मजबूर है। इस सोच के साथ ही रोटी बैंक की शुरुआत 15 अप्रैल 2015 को हुई। तारा पाटकर बताते हैं कि शुरुआती दिनों में उन्होंने 10 घरों से दो से चार रोटी और सब्जी का संग्रह करना शुरू किया था, जिसे शाम को ग़रीब ज़रूरतमंद को बांट दिया जाता था। जैसे-जैसे लोगों को इस अनूठे बैंक के बारे में पता चला, लोग जुड़ते गए। आज इस पहल से पांच सौ से अधिक लोगों का पेट भरता है। गरीबों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए शहर में जगह-जगह काउंटर बनाए गए हैं।

वहीं, झारखंड के हज़ारीबाग़ में भी ऐसे ही एक रोटी बैंक का संचालन किया जा रहा है। इस बैंक में रोजाना करीब 3,000 रोटियां जमा होती हैं। ईस्ट प्वाइंट स्कूल और हज़ारीबाग़ स्थित सेंट जेवियर्स स्कूल के बच्चे इन रोटियों के मुख्य कंट्रीब्यूटर हैं। ये बच्चे टिफ़िन में अधिक रोटियां लाते हैं। असेंबली के वक्त सभी बच्चों की रोटियां एक बड़ी टोकरी में जमा की जाती हैं और बाद में इन्हें रोटी बैंक भेज दिया जाता है। वास्तव में यह ‘आर्ट ऑफ गिविंग’ है और बच्चों में इससे दान देने की प्रवृत्ति बढ़ने लगी है। कई दूसरी संस्थाएं भी रोटी बैंक का संचालन कर रही हैं।

औरंगाबाद व जमशेदपुर का कपड़ा बैंक

रोटी के बाद जो सबसे अहम जरूरत है, वह है कपड़ा। इस कारण कपड़ा बैंक की शुरुआत हुई। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में ‘हारून मुकाती इस्लामिक सेंटर’ (HMIC) ने ‘कपड़ा बैंक’ शुरू किया है। यह बैंक गरीबों को मुफ्त में कपड़े मुहैया करा रहा है। पुराने कपड़ों को घर—घर जाकर एकत्र किया जाता है। यह ध्यान रखा जाता है कि कोई भी कपड़ा कटा या फटा न हो। इसी प्रकार जमशेदपुर के लायंस क्लब ने भी कपड़ा बैंक खोला है। कई दूसरे शहर भी इनसे प्रेरणा लेकर ऐसे अनूठे बैंक को प्रारंभ कर चुके हैं।

‘सर्च फाउंडेशन’ के संस्थापक सर्वेश अस्थाना ने लखनऊ में खोला है खिलौना बैंक

लखनऊ और हल्‍द्वानी का खिलौना बैंक

गरीबों के बच्चों को जब दो वक्त की रोटी ही नसीब नहीं तो खिलौना तो उनके लिए दूर की बात है। ऐसे बच्चों में भी बचपना जीवित रहे और वे खिलौने से खेल सकें, इसके लिए लखनऊ के ‘सर्च फाउंडेशन’ ने लखनऊ में खिलौना बैंक की स्थापना की है। यह बैंक पुराने खिलौनों को एकत्र करता है और उन्हें गरीब बच्चों में बांटता है. ‘सर्च फाउंडेशन’ के संस्थापक सर्वेश अस्थाना कहते हैं कि बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने का यह अभिनव प्रयास है। इसी प्रकार उत्तराखंड के हल्द्वानी में भी पिछले 15 वर्षों से खुशियां बांटने के लिए टॉय बैंक का संचालन किया जा रहा है। इस संस्था के दिल्ली, नोएडा में भी कलेक्शन सेंटर हैं। टॉय बैंक देश के विभिन्न शहरों में आंगनबाड़ी केंद्रों में खिलौना लाइब्रेरी भी बना रहा है। चम्पावत से इसकी शुरुआत हो भी चुकी है।

ऋद्धि किशोर गौड़ ने लखनऊ में मूर्ति बैंक की शुरुआत की है

लखनऊ का मूर्ति बैंक

देवी—देवताओं की मूर्तियों को लोग अक्‍सर पुरानी हो जाने पर इधर—उधर रख देते हैं या फिर नदियों में विसर्जित कर देते हैं। भगवान की मूर्तियों को ऐसे ही फेंकने से उनका अनादर होता है और अगर उन्हें नदियों में प्रवाहित किया जाए तो जल प्रदूषण का खतरा रहता है। इससे बचने के लिए लखनऊ की संस्था ‘श्री शुभ संस्कार समिति’ ने मूर्ति बैंक की स्थापना की है। समिति के महामंत्री ऋद्धि किशोर गौड़ का कहना है कि मूर्तियों और पूजन सामग्री को जमा करने के लिए काउंटर बनाए गए हैं। बैंक में जमा मूर्तियों का हर रविवार को विधि-विधान से भूमि विसर्जन किया जाता है। यह समिति गोमती को निर्मल बनाने के प्रयास में 2005 से निरंतर काम कर रही है।

बुक बैंक

देश के कई निजी स्कूल बुक बैंक के माध्यम से भी न सिर्फ शिक्षा की अलख जगा रहे हैं बल्कि ‘सेव पेपर’ की मुहिम में योगदान दे रहे हैं। बुक बैंक के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को मुफ्त में किताबें देने का लक्ष्य रखा गया है। इन बैंकों के माध्यम से बच्चों की पुरानी किताबें जमा कराई जाती हैं और इन्हें उन बच्चों को दिया जाता है जो नई किताबें खरीदने में समर्थ नहीं है। बुक बैंक की ओर सरकारें भी रुचि दिखा रही हैं। पंजाब सरकार ने राज्य के विभिन्न स्कूलों में ‘बुक बैंकों’ की स्थापना का फैसला किया है, जिससे जरूरतमंद छात्रों को हर शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में किताब न खरीदना पड़े और कागज की बर्बादी भी रोकी जा सके। गोवा और राजस्थान में भी इस तरह का प्रयास हो रहा है। बुक बैंक की सफलता के बाद कुछ स्कूल यूनिफॉर्म बैंक भी खोलेंगे।