‘हम बदलेंगे युग बदलेगा ’ – गायत्री परिवार के संस्थापक आचार्य श्रीराम शर्मा के इस सूत्र वाक्य को पूरी तरह से अपनी जिन्दगी के उतार रखा है उमानंद शर्मा ने। गायत्री परिवार के इस वरिष्ठ कार्यकर्ता ने खुद को पूरी तरह से बदल कर अब समाज को बदलने का बीड़ा उठाया है। आचार्य श्री के साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने का काम उनके द्वारा किया जा रहा है। विचार क्रान्ति अभियान ज्ञान यज्ञ के अन्तर्गत उनके नेतृत्व में अब तक 27 पुस्तक मेलों में ऋषि का साहित्य प्रचारित किया जा चुका है। 265 से अधिक अति महत्वपूर्ण संस्थानों के पुस्तकालयों में युगऋषि का वाङ्मय तथा यज्ञ संस्कारों के माध्यम से युगऋषि का सद्साहित्य ज्ञान प्रसाद के रूप में वे वितरित करा चुके हैं। उनके बारे में बता रहे हैं  the2is.com के रजनीश राज :

उमानंद शर्मा पूर्व में एचएएल में कार्यरत थे। वे वहां के सैकड़ों कर्मचारियों के  एकमेव नेता हुआ करते थे। उनकी एक आवाज पर सैकड़ों कर्मचारी कुछ भी कर सकते थे। इस शक्ति के कारण श्री शर्मा प्रारंभ में काफी उग्र स्वभाव के थे। गायत्री परिवार के संस्थापक श्रीराम शर्मा के साहित्य को पढ़ने के साथ उनके अंदर धीरे-धीरे परिवर्तन आया और वे नौकरी से वीआरएस लेकर तन-मन-धन से समाज सेवा की ओर उन्मुख हो गए। उनके अंदर इतना परिवर्तन आया कि वे अपना तीन मंजिला मकान भी गायत्री परिवार को समर्पित करने में पीछे नहीं रहे।

उमानंद शर्मा

लोककल्याण का लक्ष्य 

उमानंद शर्मा गायत्री ज्ञान मंदिर इंदिरा नगर, लखनऊ के मुख्य प्रबन्ध ट्रस्टी एवं वाङ्मय स्थापना, ज्ञान यज्ञ अभियान के मुख्य संयोजक भी हैं। समाज सुधार की गतिविधियों में वे बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। गायत्री परिवार की व्यसन मुक्ति रैली को भी वे संयोजित करते हैं। उनके नेतृत्व में इन्दिरा नगर के सेक्टर 9/181 स्थित गायत्री ज्ञान मंदिर में पितृपक्ष के अवसर पर सामूहिक पिण्ड तर्पण कार्यक्रम हर वर्ष आयोजित किया जाता है। उमानन्द शर्मा कहते हैं कि ऋषियों द्वारा प्रणीत व्यवस्था के तहत इस अवसर पर पूर्वजों को श्रद्धांजलि देकर उनसे विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है। समाज को संस्कार के महत्व की जानकारी हो, इसलिए यह कार्यक्रम किया जाता है। तर्पण के दौरान युगऋषि द्वारा रचित जीवन मृत्यु एवं पूर्वजों से जुड़े साहित्य का वितरण भी किया जाता है। इस अवसर पर लोककल्याण के लिए गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, नवग्रह मंत्र, रुद्र गायत्री मंत्र आदि द्वारा भी आहुतियाँ दी जाती हैं।

देहदान का संकल्प भी

उन्होंने सपत्नीक देहदान का संकल्प भी ले रखा है। वे कहते हैं कि जिन्दा रहने के साथ ही मरने के बाद भी समाज के काम आना चाहते हैं, इसी कारण देहदान का निर्णय उन्होंने लिया है। उनके इन कार्यों को समाज के लिए आदर्श रूप में देखा जा सकता है। आप विभिन्न अवसरों पर विभिन्न लोगों के यहां हजारों यज्ञ करवा चुके हैं।

युग व्यास स्मृति सम्मानसे सम्मानित

उनके इन कार्यों को कई मंचों से सम्मानित भी किया जा चुका है। अखिल विश्व गायत्री परिवार, गायत्री तीर्थ शान्तिकुंज, हरिद्वार के प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने 08 जुलाई, 2017 को शान्तिकुंज, हरिद्वार में ‘युग व्यास स्मृति सम्मान’ भी से उनको सम्मानित किया।