• खेत में ही हो जाता है खेल

देश में कुछ स्वार्थी और लालची किसान मौत के सौदागर बन चुके हैं। चंद रुपयों के मुनाफे के लिए वे फल और सब्जियों को जहरीला कर रहे हैं। मिलावट का खेल खेत में ही शुरू हो जाता है और मंडियों तक जारी रहता है। इस पूरे मसले पर रिपोर्ट पेश कर रहे हैं the2is.com के रजनीश राज :

नकली स्वाद और बड़ा आकार देने के लिए भी खेल

फल और सब्जी न सिर्फ देखने में ताजी लगे बल्कि उनका आकार भी बढ़ा हुआ दिखे, इसके लिए भी खेल किया जाता है। फलों का स्वाद बढ़कर मिले इसके लिए कृत्रिम रूप से प्रयास किया जाता है। मसलन तरबूज को ज्यादा लाल दिखाने के लिए उसमें केमिकल, रंग और चीनी या सेक्रीन का घोल इंजेक्शन से भरा जाता है।



लखनऊ के पास के माल ब्लॉक के एक किसान ने बताया कि स​ब्जियों को जल्द बड़ा करने और चमकीला बनाने के लिए खेत में ही लौकी आदि में ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाया जाता है। वैसे तो इसकी बिक्री प्रतिबंधित है, लेकिन परचून और दवा की दुकानों पर ये मिल जाता है। अगर ये इंजेक्शन लौकी, कद्दू, बैंगन, टमाटर या किसी दूसरी सब्जी में शाम को लगाया जाए तो सुबह तक वह आकार में बढ़ जाती है और उसका रंग भी अधिक चमकीला हो जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि ऐसी सब्जियों का लंबे समय तक उपयोग किया जाए तो लिवर और किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है। मॉल के डॉ. प्रवीन निगम का कहना है कि ऐसी सब्जियों का लगातार सेवन जानलेवा भी हो सकता है। यही इंजेक्शन गाय–भैंस में दूध उतरने के लिए लगाया जाता है। यह असला में एक हार्मोनल इंजेक्शन है जो शरीर पर विपरीत असर डालता है।

बासी सब्जियों की होती है रंगाई

खेत के बाद मंडियों में भी सब्जी के साथ कम खेल नहीं होता है। मंडियों में सब्जियों को ताजा दिखाने के लिए उनके कलर के अनुसार ही उनकी रंगाई की जाती है। सब्जियों को हरा दिखाने के लिए उसमें हरे रंग का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है। इसमें कॉपर सल्फेट का प्रयोग किया जाता है। रंगे जाने वाली सब्जियों में आलू, परवल, करेला, भिंडी, बैगन, मटर, बोदी, टमाटर आदि शामिल हैं। दुबग्गा, सीतापुर रोड की मंडियों में बड़े व्यापारी नांद में केमिकल डाई घोल कर उसमें सब्जियां डाल देते हैं। सिर्फ कलर ही नहीं, चमक दिखाने के लिए बैंगन, जामुन, शिमला मिर्च आदि पर मोबिल आयल लगा दिया जाता है।

आलू को पीले रंग से रंगकर उसे ताजा दिखाने का प्रयास किया जाता हैं। डॉ. प्रवीन कहते हैं कि रंगी हुई सब्जियों के खाने से डायरिया, उल्टी, चक्कर और पेट की कई बीमारियां हो सकती हैं। शरीर में इसकी मात्रा ज्यादा हो जाने पर यह जहर का काम करता है। इससे लोगों की जान भी जा सकती है।

ताजा दिखाने के लिए होता है खेल

हर ग्राहक को ताजी सब्जी ही चाहिए, लेकिन खेती से मंडी फिर बाजार में आते-आते सब्जियों को हर मौसम में लंबा सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में हर किसी को हरी सब्जी उपलब्ध करना आसान नहीं है। यह कहना है दुबग्गा सब्जी मंडी के एक थोक सब्जी विक्रेता का। पहचान उजागर न करने की शर्त पर उन्‍होंने स्वीकार किया कि सब्जियों को नाना प्रकार से ताजा दिखाने का प्रयास किया जाता है।



गाड़ी वाले स्प्रे से चमकती हैं सब्जियां

आपने अपनी कार को चमकाने के लिए स्प्रे का प्रयोग कभी जरूर किया होगा, लेकिन अब इससे बासी सब्जियों को भी चमकाया जाने लगा है। यह कहना है सीतापुर रोड स्थित सब्जी मंडी के एक थोक विक्रेता का। उनका कहना है कि बासी सब्जियों को कौड़ियों के दाम खरीदा जाता है, इससे मूल्य भी नहीं निकल पाता है। इस कारण मजबूरी में स्प्रे कर उन्हें चमकीला किया जाता है, जिससे वे ताजी लगने लगती हैं।

आधी से अधिक बीमारी का कारण मिलावट

एक सर्वे के अनुसार, भारत में 52 % बीमारी मिलावटी तत्वों की वजह से होती है। इसमें कीटनाशक से होने वाली बीमारियां भी शामिल हैं। मिलावटी तत्वों से कैंसर, किडनी संबंधी रोग, दिमाग की बीमारी, नर्व तंत्र ख़राब होना, नपुंसकता, त्वचा रोग, एलर्जी जैसी बीमारियां हो सकती हैं। निजी चिकित्सक डॉ. मनीष मिश्रा का कहना है कि रंगों में लेड, मैग्नीशियम फॉस्फेट, जिंक, अल्युमीनियम और दूसरे हैवी मेटल मिले होते हैं, जो बेहद नुकसानदेह हैं। बाराबंकी में तैनात डॉ. सौरभ सोनकर का कहना है कि ऑक्सीटॉसिन वाली सब्जियां और फल स्त्री और पुरुष दोनों को नपुंसक बनाती हैं। रंगी हुई सब्जियां सीधे किडनी पर असर डालती हैं।

एम्सटर्डम विश्वविद्यालय ने किया शोध

नीदरलैंड के एम्सटर्डम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर दुधारू पशु से ज्यादा दूध लेने के लिए उसे ‘ऑक्सीटोसिन’ का इंजेक्शन दिया जाए तो उस दूध का सेवन करने वाले में कई विकार पैदा हो सकते हैं। ऐसा ही कुछ दुष्चक्र सब्जियों में इनके प्रयोग पर होता है। भारत में ऐसी दवाइयों पर रोक लगाई गई है, लेकिन इसके बाद भी किसानों तथा थोक में सब्जी बेचने वालों को ये आसानी से मिल जाती हैं।

किसको है जांच का अधिकार

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन यानी एफएसडीए समय-समय पर सब्जी, फल और जूस की दुकानों की चेकिंग करता है। शायद ही ऐसा कभी हुआ होगा कि जांच हुई और सब कुछ सही पाया गया हो। नियमित रूप से जांच न होने के कारण मिलावट करने वालों के हौसले बुलंद रहते हैं। सच तो यह है कि आंखों के सामने खेल होता रहता है और जिम्मेदार अनजान बने रहते हैं।

 होटलों में खपाते हैं सड़ी—गली सब्जियां

होटलों में सड़ी-गली सब्जियों का प्रयोग किया जाता है। शाम को दिन भर की बिक्री करने के बाद प्राय: ठेले वाले बची हुई सब्जियों को होटल संचालकों को सौंप देते हैं। आमतौर पर ये वे सब्जियां होती हैं, जिनकी अगले दिन बिक्री नहीं हो सकती है। हालांकि चारबाग स्थित आनन्द होटल के संचालक अंकुर अग्रवाल का कहना है कि वे क्वालिटी से समझौता नहीं करते हैं। जो होटल सस्ता परोस रहे हैं, उनसे सावधान हो जाना चाहिए।

कैसे पहचान करें

  • जो सब्जी अप्राकृतिक रूप से चमकीली दिखे, छूने में तैलीय लगे उसे उपयोग न ही करें तो बेहतर।
  • धोने में यदि रंग निकले तो ऐसी सब्जी का इस्तेमाल नहीं करें।