आईफा अवॉर्ड्स के मंच पर एक मजाक से शुरू हुई ‘भाई-भतीजावाद’ की बहस में अभी तक काफी कुछ बोला जा चुका है. आईफा के मंच से कंगना रनौट का मजाक उड़ाने और भई-भतीजावाद की तारीफ करने को लेकर वरुण धवन, करण जौहर औरसफै अली खान की जमकर आलोचना भी हो चुकी है और इसपर यह तीनों ही अपने-अपने तरीके से माफी भी मांग चुके हैं. लेकिन शुक्रवार को सैफ अली खान ने एक ओपन लेटर लिखकर इस पूरे विवाद को सोशल मीडिया और मीडिया से जोड़ दिया. हफ्ते भर से चल रहे इस विवाद में सबसे ज्‍यादा नाम कंगना रनौत का खींचा गया लेकिन अभी तक कंगना रनौत की इस विषय पर कोई टिप्‍पणी सामने नहीं आई थी.

आखिरकार कंगना रनौत ने अपनी चुप्‍पी तोड़ी है और कंगना ने कुछ ऐसा कह दिया है कि शनिवार को सुबह से ही कंगना रनौट सोशल मीडिया पर छा गईं. दरअसल सैफ अली खान के ओपन लेटर के जवाब में अब फिल्‍म ‘रंगून’ की उनकी को-स्‍टार कंगना ने अपना ओपन लेटर जारी किया है.

सैफ को दिया कंगना ने जवाब: मिड-डे में प्रकाशित इस ओपन लेटर में कंगना रनौट ने सैफ अली खान की टिप्‍पणी पर कंगना ने अपने ओपन लेटर की शुरुआत में कहा, ‘ पिछले कुछ समय से नेपोटिज्‍म (भाईभतीजावाद) पर काफी बहस हो रही है पर यह स्‍वस्‍थ्‍य बहस है. जहां कुछ नजरिए इस बात पर मुझे काफी पसंद आए तो कुछ बातें सुन कर थोड़ी परेशान हूं. आज सुबह मेरी नींद एक ऐसे लेटर से खुली जो सुबह से इंटरनेट पर घूम रहा है, जिसे सैफ अली खान ने लिखा है.’ कंगना ने लिखा, ‘आखिर बार मैं तब परेशान हो गई थी जब मैंने करण जौहर का ब्‍लॉग इस विषय पर पढ़ा था.. और यहां तक की एक इंटरव्‍यू में फिल्‍म बिजनेस में रहने के लिए कई जरूरी चीजें बताई गईं. उसमें टैलेंट कहीं नहीं था.’

koffee with karan kangna ranaut

करण जौहर के शो ‘कॉफी विद करण’ में कंगना के साथ नजर आए थे सैफ. 

नेपोटिज्‍म’ सिर्फ मेरा विषय नहीं:कंगना ने अपने इस लेटर में लिखा, ‘सैफ अपने अपने ओपन लेटर में लिखा था कि ‘मैंने कंगना से माफी मांग ली और अब मुझे किसी को कोई स्‍पष्‍टीकरण देने की जरूरत नहीं है.’ लेकिन यह मेरे अकेले का विषय नहीं है. ‘भाई-भतीजावाद’ एक प्रैक्टिस है जहां लोग तार्किक सोच की जगह मानवीय भावनाओं के आधार काम करते हैं. कोई व्‍यापार जो मानवीय भावनाओं से चले, न कि मूल्‍यों पर, वह सतही लाभ पा सकता है लेकिन वह कभी भी वास्‍तविक तौर पर रचनात्‍मक नहीं हो सकता. वह 1.3 बिलियन लोगों के इस देश की क्षमता पर रोक लगा देता है.’ कंगना ने अपने इस ओपन लेटर में विवेकानंद, आइंस्‍टाइन और शेक्‍सपीयर का उदाहरण भी दिया है.

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