• हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ता डॉ. जॉर्ज शैवरो ने अध्‍ययन में किया दावा
  • हालांकि ब्रिटेन के वैज्ञानिकों की राय इससे अलग, ज्‍यादा सोयाबीन न खाने की सलाह
  • रोजाना 20-25 ग्राम तक सोयाबीन खाया जाए तो वह स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक नहीं

भारत में सोयाबीन की बड़े पैमाने पर खेती होती है। इसे दलहन की बजाय तिलहन की फसल माना जाता है। यह प्रोटीन का अच्‍छा स्रोत तो है ही, फाइबर और कैल्शियम भी इसमें पर्याप्‍त मात्रा में पाए जाते हैं। सोयाबीन में 33 प्रतिशत प्रोटीन, 22 प्रतिशत वसा, 21 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट और 12 प्रतिशत नमी होती है। सोयाबीन को लेकर कई रिसर्च हुए हैं। कुछ में इसे अच्छा तो कुछ में हानिकारक बताया गया है। एक रिसर्च का यह भी कहना है कि पुरुषों को सोयाबीन नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें सेक्सुअल प्रॉब्लम हो सकती है। प्रस्‍तुत है the2is.com के लिए दीपाली अग्रहरि की रिपोर्ट :



हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ता डॉ. जॉर्ज शैवरो और उनके साथियों द्वारा किए गए एक शोध के अध्ययन में पता चला है कि जो पुरुष रोज़ाना सोयाबीन या उससे बनी चीज़ें खाते हैं, उनमें शुक्राणुओं की संख्या घट कर आधी रह जाती है। इससे पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या हो जाती है। ‘ह्यूमन रिप्रोडक्शन’ नाम के जर्नल में छपे इस शोध के अनुसार, उन लोगों के वीर्य सैंपल में करीब चार करोड़ शुक्राणु कम पाए गए जिन लोगों ने रोज़ाना या एक दिन छोड़कर सोया से बने उत्पाद खाए थे। डॉ. शैवरो के अनुसार, सोया में पाया जाने वाला रसायन ‘इसोफ्लावोन्स’ इन शुक्राणु की संख्या में कमी की वजह हो सकता है।

इस जर्नल में लिखा गया है कि सोया से बनी कुछ खास चीज़ों जैसे टोफ़ू, सोया मिन्स, या सोया दूध में पाया जाने वाला ‘ओइस्ट्रोजेन’ हार्मोनों में असंतुलन भी पैदा कर सकता है। हालांकि, ब्रिटेन के वैज्ञानिकों की राय इससे कुछ अलग है। उनका कहना है कि एशिया में ज़्यादातर पुरुष सोया से बनी चीज़ें खाते हैं लेकिन उनमें ‘फ़र्टिलिटी’ की कोई कमी नहीं पाई गई। लेकिन वे यह भी कहते हैं कि अधिक मात्रा में सोयाबीन खाने से पुरुषों में ऐसी समस्या हो सकती है। इससे पुरुषों के हार्मोन, लिबिडो, स्पर्म की संख्या और प्रजनन क्षमता का स्तर कम हो सकता है। जिन पुरुषो में हेयर लॉस की समस्या है उनको भी सोयाबीन ज्यादा खाने की सलाह दी जाती है क्योंकि ‘टेस्टोस्टेरोन’ ज्यादा होने से हेयर लॉस होता है।

क्या कहते हैं भारतीय डॉक्टर और विशेषज्ञ

लखनऊ की डायटीशियन डॉ. स्मिता ने बताया कि सोयाबीन उत्‍पादों में मौजूद खास तत्‍व फाइटोएस्ट्रोजन स्‍त्रीत्‍व गुण की अधिकता के लिए उत्‍तरदायी होते हैं।सके ज्यादा सेवन से महिलाओं और पुरुषों में लिबिडो पॉवर (सेक्सुअल पॉवर) कम होती है और प्रजनन क्षमता भी। शरीर में स्‍त्री गुण को कम कर पौरुष को बनाए रखने में टेस्‍टोस्‍टेरॉन की भूमिका होती है और एस्‍ट्रोजन की अधिकता टेस्‍टोस्‍टेरॉन को प्रभावित करती है। यानी सोया उत्‍पादों के अधिक सेवन से पुरुषों में पौरुष के लिए उत्‍तरदायी हॉर्मोन घटने लगते हैं। रोजाना 20-25 ग्राम तक सोयाबीन खाया जाए तो वह हानिकारक नहीं होता है।

लखनऊ के सेक्सोलोजिस्ट आनंद कहते हैं कि जो कपल बच्‍चे के लिए प्लानिंग कर रहे हों, वो उस दौरान सोयाबीन का सेवन न करें तो अच्छा रहेगा क्योंकि यह स्पर्म की संख्या और सेक्स की इच्छा को कम कर देता है। गर्भवती महिलाओं को इसके इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

लखनऊ की फैमिली प्लानिंग एक्सपर्ट डॉ. अनीता चंद्रा का कहना है कि एस्‍ट्रोजन महिला हॉर्मोन होते हैं। महिला के लिए भी सोयाबीन का अधिक सेवन लाभकारी नहीं क्‍योंकि इससे शरीर में हॉर्मोन की मात्रा बढ़ जाएगी जिसे शरीर के लिए संभाल पाना आसान नहीं होगा। साथ ही, इससे पुरुषों में पौरुषत्‍व कम हो सकती है और मानसिक तथा शारीरिक रूप से स्‍त्रीत्‍व गुण हावी हो सकता है, जो मैरिड कपल के लिए ठीक नहीं है।

कोलेस्टेरॉल की मात्रा कम करने में सहायक सोयाबीन

सोयाबीन तेल में लिनोलिक अम्ल एवं लिनालेनिक अम्ल प्रचुर मात्रा में होते हैं। ये अम्ल शरीर के लिए आवश्यक वसा अम्ल होते हैं। इसके अलावा सोयाबीन में आइसोफ्लावोन, लेसिथिन और फाइटोस्टेरॉल के रूप में कुछ अन्य स्वास्थवर्धक उपयोगी घटक होते हैं। सोयाबीन कई शारीरिक क्रियाओं को भी प्रभावित करता है। विभिन्न शोधकर्ताओं द्वारा सोया प्रोटीन का प्लाज्मा लिपिड एवं कोलेस्टेरॉल की मात्रा पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया गया है और यह पाया गया है कि सोया प्रोटीन मानव रक्त में कोलेस्टेरॉल की मात्रा कम करने में सहायक होता है।

बालों को बनाए घना और चमकदार  

सोयाबीन का सेवन कमजोर और टूटते बालों को मजबूती प्रदान करता है। सोयाबीन में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन होता है, जो बालों को घना और चमकदार बनाता है। 100 ग्राम सोयाबीन में जितनी प्रोटीन होती है, उतना ही प्रोटीन पाने के लिए 200 ग्राम पिश्ते की गिरी या 1200 मिली गाय-भैंस का दूध या 7-8 अंडे या 300 ग्राम हड्डी विहीन मांस की आवश्यकता पड़ती है। इसके अन्दर अधिक मात्रा में आयरन रहने के कारण यह एनीमिया में भी विशेष रूप से लाभकारी है।