• पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के साथ बीमार भी बना रही पॉलीथिन

यूपी की अखिलेश सरकार ने जनवरी, 2016 में पॉलीथिन की थैलियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। यह प्रतिबंध हर तरह की प्लास्टिक थैलियों पर हैप्रतिबंध लागू होने के बाद कुछ दिनों तक तो इसका असर दिखा, आदेश न मानने वालों पर थोड़ीबहुत कार्रवाई भी हुई, लेकिन अब प्रतिबन्ध कहीं भी नजर नहीं आता। किराना की दुकान हो, सब्‍जी वाले हों या ठेलेखोमचे वाले, हर किसी के यहां पॉलीथिन का धड़ल्‍ले से इस्‍तेमाल हो रहा है। जिन पर प्रतिबंध लागू कराने की जिम्‍मेदारी है, वे आंखें मूंदे हुए हैं। प्रस्‍तुत है the2is.com के लिए शिवम अग्निहोत्री की रिपोर्ट :

यूपी में हैं पॉलीथिन की 2000 फैक्ट्रियां

उत्‍तर प्रदेश में लगभग 1500 से 2000 हजार फैक्ट्रियों में पॉलीथीन बैग्स का उत्पादन हो रहा है। अकेले राजधानी लखनऊ में ही ऐसी 100 से 150 फैक्ट्रियां हैं। ज्यादातर कारखाने बिना किसी लाइसेंस के चलाए जा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, यूपी में हर साल 5 से 10 हजार टन कैरी बैग और 2 से 4 लाख टन पैकेजिंग पॉलीथिन का उत्पादन किया जा रहा है। एक शहर से दूसरे शहरों में पॉलीथिन बैग्स ट्रकों से पहुंचाई जाती हैं। यह स्थिति तब है, जबकि यूपी में पॉली बैग्स पर प्रतिबन्ध लगा हुआ है।



शासनादेश

कारवाई के नाम पर शमन शुल्‍क की वसूली

उत्‍तर प्रदेश में निर्धारित मानक से कम माइक्रॉन वाली पॉलीथिन मार्केट में खुल्लमखुल्ला उपलब्ध हैं। पॉलीथिन पर प्रतिबंध लागू कराने का जिम्‍मा प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम के ऊपर है, लेकिन दोनों ही महकमे हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। व्यापारियों का कहना है कि शमन शुल्क के नाम पर 500 से 1000 रुपये वसूल कर मामला ख़त्‍म कर दिया जाता है, यानी चंद रुपये का जुर्माना दो फिर धड़ल्ले से पॉलीथिन बैग्स बेचो या इस्तेमाल करो। लखनऊ के अमीनाबाद के एक पॉलीथिन व्यापारी ने बताया कि तय मानकों से कम की पॉलीथिन मार्केट में उपलब्ध है। पॉलीथिन की वैराइटी के आधार पर अलग-अलग शासनादेश है। कैरी बैग, बनियान कट बैग, यू व डी कट बैग पर प्रतिबन्ध लगा है, लेकिन पैकिंग पॉलीथिन व 50 माइक्रॉन से ऊपर के पॉलीथिन उत्पादन पर बैन नहीं है।

बेहद घातक है पॉलिथीन

पर्यावरण एवं स्‍वास्‍थ्‍य दोनों के लिए 40 माइक्रॉन से कम पतली पॉलीथिन की थैलियां बेहद नुकसानदायक होती है। चूंकि ये पॉलीथिन काफी सस्‍ती पड़ती हैं, इसलिए इनका उपयोग धड़ल्‍ले से किया जाता है। इस्तेमाल के बाद यह कूड़े में फेंक दी जाती हैं। यहीं से पर्यावरण और पशुओं की दुर्दशा की कहानी शुरू हो जाती है। इन पॉलीथिन को खाकर गायों के मरने का सिलसिला आज भी जारी है।

कुछ कंपनियां ज्‍यादा मुनाफे के चक्‍कर में प्‍लास्टिक को लचीला और टिकाऊ बनाने के लिए घटिया एडिटिव (रासायनिक पदार्थ) मिलाती हैं, जो प्‍लास्टिक में रखे खाद्य पदार्थों के संपर्क में आकर घुलने लगते हैं। ऐसी पन्नियां तरह-तरह की बीमारियों का भी सबब बनती हैं।

नियमों का नहीं किया जा रहा पालन
प्लास्टिक कचरे से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने नियमों को और सख्त किया है। नया प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेन्ट नियम 18 मार्च, 2016 से लागू कर दिया गया है। इसके तहत केन्द्र सरकार ने सरकारी महकमों के साथ प्लास्टिक बैग बनाने वाले कंपनी मालिकों से लेकर स्ट्रीट वेन्डर तक की जिम्मेदारी तय की है। नए नियमों के तहत प्लास्टिक से बने कैरी बैग की मोटाई 50 माइक्रॉन से कम नहीं होगी। इससे पहले प्लास्टिक के कैरी बैग की मोटाई न्यूनतम 40 माइक्रॉन निर्धारित थी, लेकिन कहीं भी इन नियमों का पालन होता नजर नहीं आ रहा है।

  • बनियान कट
    बनियान कट
  • अमीनाबाद मार्केट
    अमीनाबाद मार्केट
  • डी कट बैग
    डी कट बैग
  • लूप बैग
    लूप बैग
  • पैकिगं पॉलीथीन
    पैकिगं पॉलीथीन

क्‍या कहते हैं अधिकारी

लखनऊ के डीएम कौशल राज शर्मा का कहना है कि शासनादेश के आधार पर प्रतिबन्धित पॉलीथिन बेचने वालों पर कार्रवाई जारी है। निर्धारित मानक से कम की पॉलीथिन बनाने वाली फैक्ट्रियां सील की गई हैं।

पर्यावरण अभियन्ता पंकज भूषण ने बताया कि 50 माइक्रॉन से कम की पॉलीथिन की बिक्री करने वालों पर हम सख्ती से कार्रवाई कर रहे हैं, हालांकि वह पिछले डेढ़ साल में एक ही कार्रवाई के बारे में बता पाए। उन्‍होंने बताया कि  21 जनवरी, 2016 को लखनऊ के फन मॉल में स्‍पेंसर, आरचीज़ व अन्य स्टोर पर छापेमारी में 50 से कम माइक्रॉन के कैरी बैग इस्‍तेमाल करने वालों पर कार्रवाई की गई थी।

पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के डायरेक्टर राजीव उपाध्याय का कहना है कि आदेशों का पालन न करने वालों पर कार्रवाई हो रही है। उन्‍होंने बताया कि 2016 के अभियान की तरह हम एक टीम का गठन कर रहे हैं, जिसमें नगर निगम व पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी और पुलिस प्रशासन एक दस्ते के रूप में कार्य करेंगे। यह दस्ता अगस्त, 2017 से उन पॉलीथीन व्यापारियों पर कार्रवाई करेगा, जो नियमों के विरुद्ध पॉलीथिन की बिक्री कर रहे हैं।