• खाद्य विभाग को नहीं पता लखनऊ में अवैध बूचड़खाने कितने
  • अपर आयुक्त रामअरज मौर्य बोले, अवैध रूप से नहीं कट रहा बकरा व भैंसा
  • मीट की अवैध दुकानों के खिलाफ 1 से 5 हज़ार तक चालान काटने का है निर्देश

प्रदेश की सत्ता संभालते ही योगी आदित्‍यनाथ की सरकार ने अवैध बूचड़खानों पर लगाम कसी और सभी अवैध बूचड़खाने बंद कराने का फरमान जारी कर दिया था। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में अवैध बूचड़खाने बंद करने की बात कही थी, जिसके चलते योगी सरकार ने पहली ही कैबिनेट मीटिंग में अवैध बूचड़खाने बंद करने के आदेश जारी कर दिए। सरकार के इस फैसले के बाद से ही मीट व्यापारी ख़ासे परेशान हैं और सरकार के इस फैसले का लगातार विरोध कर रहे हैं। हालांकि लखनऊ में सड़क किनारे मांस काटने और उनकी बिक्री पर आज भी कोई रोक नहीं दिखाई देती। प्रस्‍तुत है the2is.com के लिए दीपाली अग्रहरि की पड़ताल :



शहरों में खुले में जानवर काटने और उन्‍हें बेचने पर प्रतिबन्ध है। नगर निगम का सख्त निर्देश है कि बूचड़खानों में काटने के लिए लाए गए जानवरों को जबतक बूचड़खानों में तैनात चिकित्सक का प्रमाणपत्र नहीं मिल जाता, तबतक उसके मीट की बिक्री नहीं होगी। लेकिन इस आदेश का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। अवैध बूचड़खानों के बंद होने के बावजूद शहर में आप किसी भी सड़क पर निकल जाइए, खुले में बकरे और मुर्गे कटते हुए दिख जाएंगे। हालांकि अवैध दुकानों के खिलाफ 1 से 5 हज़ार रुपये तक के चालान काटने के भी निर्देश दिए गए हैं, लेकिन लगता है मीट विक्रेताओं को इसका कोई भय नहीं और उन्‍होंने नियमों को ताक पर रख दिया है।

लखनऊ में 50 मीट विक्रेताओं के लाइसेंस ही रिन्‍यूअल

लखनऊ में कुल 400 मीट विक्रेता हैं जिनमें से सिर्फ 50 मीट विक्रेताओं के ही लाइसेंस अभी तक रीन्‍यूअल हुए हैं। इसके अलावा 155 लोगों के लाइसेंस इसलिए रीन्‍यूअल नहीं हुए क्योंकि उनकी दुकानें धार्मिक स्थल के पास थीं (धार्मिक स्थल के 50 मीटर के अन्दर)

फ़ूड एंड ड्रग विभाग के अपर आयुक्त राम अरज मौर्या से हमारी रिपोर्टर ने पूछा कि मीट विक्रेता अब भी बिना लाइसेंस और बिना जानवरों की जाँच के चिकन-मटन खुलेआम बेच रहे हैं, इसके खिलाफ आपने क्‍या कदम उठाए? इसके जवाब में मौर्या ने कहा कि उन्‍हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि मीट विक्रेता अब भी अवैध रूप से चिकन और मटन काट रहे हैं और उन्हें बेच रहें हैं।

वहीं, चीफ फ़ूड ऑफिसर वीरेन्द्र द्विवेदी का कहना है कि लखनऊ में अभी कितने लोग अवैध रूप से मीट बेचने का कारोबार कर रहे हैं, इसकी ठीक-ठीक संख्‍या उन्‍हें नहीं पता। उन्‍होंने बताया कि जो लोग बूचड़खाने खोलने के नियमों और शर्तों को पूरा करेंगे, उन्हें फ़ूड एंड ड्रग विभाग लाइसेंस उपलब्ध कराएगा।

फ़ूड एंड ड्रग विभाग का स्टाफ

वीरेन्द्र द्विवेदी ने बताया कि लखनऊ में स्थानीय स्तर पर  652 एफ़एसओ है। इनके अलावा जिला स्तर पर 75 डिविजनल ऑफिसर्स हैं, 78 चीफ फ़ूड सेफ्टी ऑफिसर्स हैं, 19 अस्सिस्टेंट फ़ूड ऑफिसर्स हैं।

देश में सिर्फ 1,707 पंजीकृत बूचड़खाने

एफएसएसएआई (fsssai) की रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत देश में पंजीकृत बूचड़खानों की संख्या 1,707 है। एक अनुमान के अनुसार, देश में चल रहे बूचड़खानों में से 55 फीसद ही पंजीकृत हैं। तमिलनाडु में 425, मध्यप्रदेश में 262 और महाराष्ट्र में 249 बूचड़खाने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत हैं। उत्तर प्रदेश में 44 बूचड़खाने पंजीकृत हैं तो असम में 51, बिहार में पांच, छत्तीसगढ़ में 111, दिल्ली में 14, गोवा में चार, गुजरात में चार, हरियाणा में 18, हिमाचल प्रदेश में 82, जम्‍मूकश्‍मीर में 23, झारखंड में 11, कर्नाटक में 30, केरल में 50, लक्षद्वीप में 65, मणिपुर में चार और मेघालय में एक बूचड़खाने को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत किया गया है। इनके अलावा ओडिशा में पांच, पुडुचेरी में दो, पंजाब में 112, राजस्थान में 84, उत्तराखंड में 22 और पश्चिम बंगाल में पांच बूचड़खाने पंजीकृत हैं।