• सलाहुद्दीन के पांच बेटे कश्मीर घाटी में करते हैं सरकारी नौकरी
  • खुद पाकिस्‍तान में बैठकर आतंकवादी हमलों को दे रहा अंजाम
  • पहले डॉक्‍टर फिर सिविल सेवा में जाना चाहता था सलाहुद्दीन
  • 1987 में हुए विधानसभा चुनाव हारने के बाद पहुंच गया था जेल

बीते 26 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने आतंकी संगठन हिज़बुल मुजाहिदीन के नेता मोहम्मद यूसुफ़ शाह उर्फ़ सैयद सलाहुद्दीन का नाम अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों की सूची में शामिल किया है। जाहिर है, यह घोषणा भारत के लिए बहुत बड़ी कूटनीतिक कामयाबी है। भारत सरकार सलाहुद्दीन को कई आतंकवादी घटनाओं के लिए ज़िम्मेदार मानती है। भारत के मुताबिक़ सलाहुद्दीन पाकिस्तान में रहकर कश्मीर में अभियान चला रहा है। उसके नेतृत्व में ही हिजबुल के लड़ाके कश्मीर में आतंक की फैक्ट्री चला रहे हैं। भारत ने मई, 2011 में पाकिस्तान को 50 मोस्ट वांटेड लोगों की जो सूची सौंपी थी, उसमें सलाहुद्दीन का भी नाम है। आतंक का आका बनने से पहले सलाहुद्दीन कश्‍मीर में रहता था, लेकिन सियासत में मिली एक नाकामी ने उसे आतंकवाद की ओर मोड़ दिया। प्रस्‍तुत है the2is.com के लिए धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी की रिपोर्ट

सैयद सलाहुद्दीन के नाम से मशहूर हिजबुल का मुखिया 1990 से पहले कश्मीर में यूसुफ शाह के नाम से जाना जाता था। यूसुफ का जन्म कश्मीर घाटी के बडगाम जिले के सोयबाग गांव में हुआ था। वह अपने माता-पिता की सातवीं संतान है। उसके पिता डाक विभाग में नौकरी करते थे। जब भारत और पाकिस्‍तान के बीच कश्‍मीर का बंटवारा हुआ तो यूसुफ अभी बच्‍चा ही था। यूसुफ डॉक्टरी की पढ़ाई करना चाहता था। फिर बाद में उसकी इच्छा सिविल सेवा में जाने की हुई तो उसने इसकी तैयारी शुरू कर दी। कश्मीर विश्वविद्यालय में पढ़ते-पढ़ते वह आतंकवादी संगठन जमात-ए-इस्लामी संगठन के संपर्क में आ गया। इसके बाद वह उस अभियान का हिस्सा बन गया, जिसमें मुसलिम महिलाओं के लिए हिजाब पहनना जरूरी बताया गया था। वह कुछ दिनों तक एक मदरसे में टीचर भी रहा।


सलाहुद्दीन ने साल 1987 में हुए विधानसभा चुनाव से सियासत में कदम रखा। उसने इस चुनाव में श्रीनगर की अमीरा कादल विधानसभा सीट से मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के टिकट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। माना जा रहा था कि इस सीट से यूसुफ़ शाह की जीत पक्‍की है, लेकिन जब नतीजे घोषित हुए तो नेशनल कॉन्फ्रेंस के गुलाम मोहिउद्दीन शाह विजयी घोषित किए गए। कुछ लोगों का आरोप था कि चुनाव नतीजों में जमकर धांधली की गई, बड़े पैमाने पर बूथ कब्जे की घटना हुई और पुलिस ने जनता की शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया।

यूसुफ शाह ने इन चुनाव नतीजों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद तत्कालीन नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार ने उसे जेल में डाल दिया। बताते हैं कि शाह को उसके पोलिंग एजेंटों के साथ मतदान केंद्र से जबरन खींच लिया गया था जिनमें जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख मोहम्मद यासिन मलिक भी थे। 1989 में रिहा होने के बाद यूसुफ ने कश्‍मीर मसले को बंदूक के जरिए हल करने का फैसला किया।

1990 में मुजफ्फराबाद पहुंचा सलाहुद्दीन

5 नवंबर, 1990 को यूसुफ शाह नाम बदलकर सैयद सलाहुद्दीन बन गया और सीमा पार कर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मुजफ्फराबाद इलाके में पहुंच गया। 90 के दशक में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की स्थापना मुहम्मद अहसान डार ने की थी। सलाउद्दीन भी हिजबुल से जुड़ गया और उसने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों की शुरुआत की। डार के संगठन से अलग होने के बाद वह हिजबुल मुजाहिदीन का मुखिया बन गया। तभी से कश्मीर घाटी में आतंकवाद फैलाने के मकसद से हिजबुल सरगना सलाहुद्दीन युवाओं को ट्रेनिंग देता है।

सैयद सलाहुद्दीन

‘‘हम पाकिस्‍तान की लड़ाई कश्‍मीर में लड़ रहे हैं। अगर पा‍किस्‍तान अपना समर्थन वापस लेता है तो युद्ध पाकिस्‍तान के भीतर लड़ा जाएगा।’’ – सैयद सलाहुद्दीन 

जून, 2012  में दिए गए एक इंटरव्‍यू में सलाहुद्दीन ने स्‍वीकार किया था कि कश्‍मीर में लड़ाई के लिए पाकिस्‍तान हिजबुल मुजाहिदीन का समर्थन कर रहा था। उसने घोषणा की थी कि अगर पाकिस्‍तान ने कश्‍मीर में जेहादियों को समर्थन देना बंद किया तो वह पाकिस्‍तान पर हमला कर देगा। उसका दावा था कि जेहादी कश्‍मीर में पाकिस्‍तान की ही लड़ाई लड़ रहे हैं।

कश्मीर को जवानों की कब्रगाह बनाने की धमकी

सलाहुद्दीन के संगठन हिजबुल ने जम्मू-कश्मीर में हुईं कई आतंकी घटनाओं की जिम्मेदारी ली है। 6 अप्रैल, 2014 को कश्‍मीर में हुए धमाके  में सलाहुद्दीन का हाथ था,  इसमें 17 लोग घायल हुए थे। यही नहीं, सलाहुद्दीन ने 2016 में धमकी दी थी कि वह जम्मू-कश्मीर को भारतीय सैनिकों की कब्रगाह बना देगा और वहां शांति बहाली की किसी भी कोशिश को कामयाब नहीं होने देगा।

जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले की ज़िम्मेदारी यूनाइटेड जिहाद काउंसिल ने ली थी, जिसका प्रमुख 71 वर्षीय सैयद सलाहुद्दीन ही है। यूनाइडेट जिहाद काउंसिल कोई चरमपंथी संगठन नहीं बल्कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में सक्रिय दर्जन भर से ज़्यादा आतंकवादी संगठनों का गठबंधन है। इसमें हिज़बुल मुजाहिदीन, अल-उमर मुजाहिदीन, तहरीक-उल मुजाहिदीन आदि आतंकी संगठन शामिल हैं। सलाहुद्दीन ने कश्‍मीर मुद्दे पर भारत पर परमाणु हमले की भी धमकी दी है। उसने भारत को ये धमकी 2016 में कराची में जमात-ए-इस्लामी नेताओं की कश्मीर मुद्दे पर हुई ज्वॉइंट न्यूज कॉन्फ्रेंस के दौरान दी थी। सलाहुद्दीन ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर भारत-पाकिस्तान में परमाणु युद्ध हो सकता है।

राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सलाहुउद्दीन को मोस्ट वॉन्टेड घोषित कर रखा है।

सलाहुद्दीन के पांचो बेटे कश्मीर में करते हैं सरकारी नौकरीकश्मीर को हिंसा की आग में झोंकनेवाले खूंखार आतंकवादी सैयद सलाहुदद्दीन के पांच बेटे और दो बेटियां हैं।

सलाहुद्दीन का सबसे बड़ा बेटा शकील यूसुफ श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में चिकित्‍सा सहायक है। दूसरा बेटा जावेद यूसुफ शिक्षा विभाग में कम्प्यूटर ऑपरेटर है। तीसरा बेटा शाहिद यूसुफ शेर-ए-कश्मीर एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय में शोध कर रहा है। चौथा बेटा वाहिद यूसुफ शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट और मेडिकल साइंसेज में डॉक्टर है। सबसे छोटा बेटा मुईद यूसुफ कश्मीर के उद्यमिता विकास संस्थान में नौकरी कर रहा है।