लखनऊ जैसे शहर में डेढ़ से दो हजार ई-रिक्शा चल रहे हैं। यह तादाद रोजाना बढ़ती ही जा रही है। जरूरतमंदों को ई-रिक्शे तो बांट दिए गए लेकिन उनको चलाने के लिए बैटरी भी चार्ज करनी पड़ती है, इस बारे में सरकार ने नहीं सोचा। हालांकि सरकार ने इसके लिए पेट्रोल पम्‍पों पर चार्जिंग पॉइंट्स की व्यवस्था की बात कही है लेकिन कुछ एक पेट्रोल पंप छोड़ दें तो कहीं पर ई-चार्जिंग पॉइंट नहीं हैं। कहीं ई-रिक्शा चार्ज होते दिखाई भी नहीं देते। आखिर सड़कों पर व्यावसायिक तौर पर चलने वाले ई-रिक्शा वाले अपनी बैट्री कैसे चार्ज करते हैं ? पड़ताल की है the2is.com के हरिओम त्रिपाठी ने :

किसी भी छोटे-बड़े शहर या कस्बे में ई-रिक्शा की मौजूदगी सामान्‍य बात है। हालांकि लखनऊ में कितने ई-रिक्शा चल रहे हैं,  इस बारे में आरटीओ को कोई जानकारी नहीं है। अगर लखनऊ में चलने वाले ई-रिक्‍शों की संख्‍या डेढ़ हजार ही मान लें तो भी रोजाना इनको चार्ज करना टेढ़ी खीर है।

कंटिया यानी चोरी की बिजली से चार्जिंग 

ज्यादातर ई-रिक्शा कंटिया लगा कर चार्ज किए जा रहे हैं। लखनऊ में ही चार्जिंग करने का धंधा जोरों से जारी है। सुनसान इलाकों, पुराने शहर की गलियों में एक साथ दर्जन भर रिक्शा चार्ज किए जाते हैं। इसमें बिजली की लाइन पर कंटिया लगा दी जाती है फिर एक डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स के जरिये अलग-अलग बैटरी जोड़ दी जाती हैं। अधिकारी भी मानते हैं कि ई-रिक्शा बहुत जगहों पर चोरी की बिजली से चार्ज होते हैं। गोमती बंधे के किनारे, बालू अड्डा, कुकरैल बंधे के आसपास, ठाकुरगंज, निराला नगर पोस्ट ऑफिस आदि इलाकों में तो बाकायदा ‘चार्जिंग माफिया’ सक्रिय हैं।



मीटर में चोरी

घरेलू बिजली कनेक्‍शन से भी अवैध रूप से ई-रिक्‍शा चार्ज किए जा रहे हैं। कुछ ई-रिक्शा वालों के घरों में सीधे मीटर से बिजली चोरी की जाती है। ये लोग रिक्शा को चार्ज करने के लिए घरों में लगे मीटर के दो तारों को बाहर से काट कर वहां से अलग तार जोड़कर बिजली की चोरी करते हैं। कुछ लोग ठेके पर बहुत कम दर में (35 से 40 रुपए) ई-रिक्शा चार्ज करने का व्यवसाय कर रहे हैं।

आइसक्रीम के ठेलों का भी यही हाल

शाम होते ही शहर में आइसक्रीम के जगमगाते ठेले नजर आने लगते हैं। इनकी रोशनी के पीछे भी चोरी का यही खेल है। कपूरथला के पास आइसक्रीम के ठेलेवालों ने बताया कि हनुमान सेतु के पास बंधा वाली सड़क पर चार्जिंग होती है। यहाँ झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले कुछ लोग यही धंधा करते हैं। ये लोग कंटिया डालकर बिजली की चोरी करते हैं यानी रंग लगे न फिटकरी और रंग चोखा ही चोखा।  

पेट्रोल पम्पों पर भी नहीं है सुविधा

सरकार द्वारा शहरों के पेट्रोल पम्पों पर ई-रिक्शा चार्जिंग की सुविधा दी गई है लेकिन the2is.com के रिपोर्टर ने जब कुछ पेट्रोल पम्पों के मैनेजर से बात की तो पता चला कि किसी भी पेट्रोल पम्प पर ई-रिक्शा चार्ज करने की कोई सुविधा नहीं है। ई–रिक्शा चालक अपने नजदीकी चार्जिंग एजेंसियों के पास 50 रुपए में अपना रिक्शा चार्ज करते हैं जो दिनभर में 60-70 किलोमीटर तक चलता है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

आरटीओ के अरुण दीक्षित कहते हैं कि लखनऊ में कितने रजिस्टर्ड ई–रिक्शा अभी चल रहे हैं, ये बता पाना मुश्किल है। उन्‍होंने कहा कि ई-रिक्शा कंपनियों और उससे जुड़ी एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वो ई–रिक्शा के चार्जिंग की व्यवस्था करें।

उत्‍तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के एमडी विशाल चौहान का कहना है कि सारा दोष बिजली विभाग को देना सही नहीं है। हालांकि ये बात सच है कि बिजली कर्मचारियों के सहयोग से ही अवैध रूप से ई-रिक्शा चार्ज हो रहे हैं। चौहान ने कहा कि ई-रिक्शा चार्जिंग में चोरी की बिजली और अवैध रूप से चार्जिंग की जानकारी अभी तक हमारे पास नहीं थी। लेकिन जब खबर मिली तो हमने जहाँ–जहाँ अवैध रूप से ई-रिक्‍शा चार्ज हो रहे थे वहां छापे मारे।

वास्‍तव में the2is.com द्वारा घरेलू बिजली से अवैध रूप से ई-रिक्शा चार्जिंग के बाबत पूछने के बाद ही बिजली विभाग ने 29 जून को लखनऊ के इटौंजा भवन हाउस छाछी कुआं, पानी की टंकी निकट सिटी स्टेशन, राजाजीपुरम और मूंगफली मंडी में छापे मारे। यहां अवैध रूप से ई-रिक्‍शा चार्ज करते हुए पकड़े गए।

कहाँ कर सकते हैं शिकायत

बिजली चोरी से सम्बंधित शिकायत मध्‍यांचल लखनऊ के एमडी अरविन्द राजवेदी और चीफ इंजीनियर को शिकायती पत्र देकर कर सकते हैं।