एक रिसर्च के मुताबिक देश में साल 2024 तक आरओ का बिजनेस 26.65 हज़ार करोड़ तक पार हो जाएगा। लखनऊ में अलग – अलग आर ओ कंपनियों के डेढ़ सौ से भी ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर्स है। तो क्या देश का पानी इतना ख़राब हो गया है कि हर कोई आरओ का पानी पीना चाहता है ? या सिर्फ कंपनियों की मार्केटिंग के कारण लोग आरओ खरीदते जा रहे हैं। क्या लोगों को वास्तव में आरओ की जरुरत है?

लखनऊ जैसे महानगर जहाँ का पानी अन्य शहरो के मुकाबले ठीक माना जाता  है, वहां महीने में लगभग 6000 से ज्यादा आर ओ वाटर प्यूरीफाई बेचे जा रहे हैं।

the2is.com के हरिओम त्रिपाठी की पड़ताल

उत्तर प्रदेश में पानी सप्लाई के लिए जिम्मेदार विभाग जल निगम के जूनियर इंजीनियरसुनील मेहरोत्रा का दावा हैकि जल निगम के अधिकारी और कर्मचारी भी बिना आरओ का पानी पीते हैं। उनका कहना है कि निगम रोज पानी की टंकियों की जाँच करता है और समय – समय पर घरों में जाकर पानी का टेस्ट करता है।

इस बारे में जब टेक्सोलोजिस्ट डॉ. अमित कुमारसे बात की तो उन्होंने बताया कि रिवर्स ओसमोसिस (RO) बोरिंग से आने वाले पानी के भारीपन को हल्का करता है। आरओ या अन्य वाटर प्यूरीफाई लखनऊ में कुछ ही एरिया में शहरों के लिए सही है। डॉ. अमित के अनुसार 80एमजी/लीटर से कम टीडीएस (टोटल डीजोल्वड सॉलिड) का पानी पीने से हाई ब्लडप्रेशर और कोरोनरी हृदय रोग, गैस्ट्रिक और अल्सर, क्रोनिक गैस्ट्रिटिस, गोइटर, गर्भावस्था संबंधी समस्या,पीलिया, एनीमिया, फ्रैक्चर और नवजात शिशुओं में विकास विकारों से सम्बंधित कई समस्या हो सकती है। आरो से साफ हुए पानी का टीडीएस लेवल 40 से 50 का होता है।



आर्थोपेडिक कंसल्ट डॉ. कौशलकान्त मिश्रा कहते हैं कि जब पानी का कंटेंट कम होता है तो उसकी वजह से मिनरल की कमी हो जाती है। तब हड्डियों में जमा मिनरल्स बॉडी के मिनरल लेवल को मेंटेन करने की कोशिश करते हैं। इससे हड्डियों में कमजोरी आ सकती है और मिनरल के बिगड़े संतुलन से हार्मोन्स का संतुलन भी बिगड़ सकता है।

पॉल्यूशन कण्ट्रोल बोर्ड की सेंट्रल लेबोरेटरी के अधिकारी का कहना है पानी में टीडीएस 1000 से ज्यादा है तो वो पानी पीने के योग्य नहीं होता। बोरिंग का पानी तो आसानी से पिया जा सकता है। सरफेस वाटर के क्वालीफार्म्स बैक्टीरिया को दूर करने के लिए आर ओ की जरुरत पड़ती है। आर ओ में टीडीएस अर्जेस्ट लाइन कंट्रोलर भी होता है जिससे आप पानी का टीडीएस लेवल बढ़ा सकते हैं।

आरओ लेड, पारा, क्लोरीन जैसी अशुद्धियों को दूर करने में सक्षम है। इसके साथ ही सूक्ष्म पैरासाइट को भी ख़त्म करने की क्षमता रखता है। इसलिए घर पर आने वाले पानी और अपनी जरूरतों को पूरी तरह समझ कर ही किसी जलशोधक को अपनाना चाहिए।     

आरओ डिस्ट्रीब्यूटर शेखर गुप्ता ने बताया कि अगर लखनऊ की बात करें तो यहाँ के पानी का टीडीएस लेवल 300 है इसका मतलब है कि लखनऊ का पानी आराम से बिना आरओ के पिया जा सकता है। हालाँकि कुछ जगहों पर पाइप या अन्य खराबियों से वाइरस और अन्य मेटेलिक अशुद्धियाँ आ जाती है, जहाँ आरओ की जरुरत पड़ती है। फिर भी ये बात साफ़ है कि लखनऊ के हर इलाकों में आरओ की जरुरत नहीं है।

गोमती नगर और इंद्रा नगर के एरिया में ज्यादातर अधिकारी टीडीएस लेवल 10 से 20 ही रखवाते हैं। ये बिसलेरी और एक्वा बोतल के पानी को मैच करता है।

आरओ के अलावा बाजार में अन्य वाटर प्यूरीफाई भी उपलब्ध हैं वो भी पानी से अशुद्धियाँ निकालने का काम करते हैं। जिसकी जरुरत उन एरियों में हैं जहाँ का पानी सिर्फ पीला और बद्बूदार हो।

अन्य शहरों का हाल

कहाँ है जरूरत आर. ओ की?लखनऊ में हुसैनगंज, नरही, डालीगंज जैसे एरिया में पानी अच्छा नहीं है. इन क्षेत्रो में वाटर प्यूरीफाई की जरूरत है क्योंकि नार्मल पानी पीने के लायक नहीं होता। इसके अलाव पानी को उबाल कर पिया जा सकता है।

रायबरेली, लखीमपुर, दिल्ली और मुबई जैसे शहरों में जरुरत है आरओ की।

आर ओ वाटर प्यूरीफाई के क्या हैं फायेदे और नुक्सान

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खुद कैसे टेस्ट कर सकते हैं घर के पानी का टी डी एस?

टीडीएस मानक सिस्टम की मदद से पानी की टीडीएस का स्तर आसानी से मापा जा सकता है। टीडीएस मापने की मशीन की कीमत 2000 रूपए तक होती है, जिसमें बाद में केवल बैटरी बदलने का ही खर्च आता है। जल निगम या जल संसथान को एक एप्प्लीकेशन देकर घर के पानी को टेस्ट कराया जा सकता है। टीडीएस मापक सिस्टम से कोई भी अपने घर के पानी का टीडीएस लेवल का पता लगा सकता है।