1901 से 1991 तक देश के लैंगिक अनुपात में लगातार गिरावट

भारत को एक युवा राष्ट्र माना जाता है क्‍योंकि यहां युवाओं की जनसंख्या अधिक है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 10 से 24 साल की उम्र के 35.6 करोड़ लोगों के साथ भारत सबसे अधिक युवा आबादी वाला देश है। भारत में युवाओं की जनसंख्‍या में तेजी से वृद्धि हुई है। वर्ष 1971 में उनकी संख्‍या 16.8 करोड़ थी जो 2011 में बढ़कर 42.2 करोड़ हो गई। 1971  में भारत के युवाओं की समग्र विकास दर 30.6% थी, जो 2011 में बढ़कर 34.8% हो गई। आजादी के बाद भारत में युवा जनसंख्या के क्षेत्र में सबसे निराशाजनक बात जो सामने आई है, वह है भारत में लिंग अनुपात में गिरावट। महिलाओं की उपेक्षा कर समाज के समग्र विकास की कल्‍पना नहीं की जा सकती। लिंग असमानता पर आधारित समाज एक आधुनिक और संवेदनशील समाज होने का दावा नहीं कर सकता। लैंगिक असमानता के कारण महिलाओं के प्रति अपराधों का ग्राफ भी बढ़ता जा रहा है। प्रस्‍तुत है the2is.com के लिए धर्मेन्द्र त्रिपाठी और ईशी आर्या की रिपोर्ट :



जनसंख्या, वृद्धि दर, जन्म मृत्यु दर और लिंगानुपात (1901-2011) | स्रोत : जनगणना 2011, भारत सरकार

केंद्र सरकार के जनसंख्‍या के आंकड़ों को देखें तो 1901 से लेकर 1991 तक देश के लैंगिक अनुपात में लगातार गिरावट आई है (देखें टेबल)। 2001 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में सिर्फ चार ऐसे राज्य हैं (केरल, सिक्किम, त्रिपुरा व मिजोरम) जहां यह गिरावट बढ़ी नहीं है, हालांकि यहां भी वयस्क लिंग अनुपात की तुलना में बाल लिंग अनुपात नीचा ही है। 1991 के बाद इसमें थोड़ा सुधार जरूर हुआ है, लेकिन उसे पर्याप्‍त नहीं कह सकते। विश्‍व आर्थिक मंच (WEF) के 2014 के असमानता सूचकांक में 142 देशों में भारत का 114वां स्‍थान है। वैसे इस निराशाजनक पहलू के साथ रोचक तथ्य यह है कि 2011 की जनगणना में महिलाओं की वृद्धि दर पुरुषों के मुकाबले अधिक रही। पुरुष 17.19% तो महिलाएं 18.12% की दर से बढ़ीं। गिरते लिंग अनुपात के बीच उम्‍मीद की एक और किरण यह दिखाई देती है कि 15 से 19 वर्ष उम्र के बीच की लड़कियों की शादी की संख्या में कमी आई है। 1961 में 15 से 19 वर्ष के बीच विवाहित लड़कियों का प्रतिशत 69.57 था जो 2011 में घटकर 19.47% हो गया।

विभिन्‍न राज्‍यों में महिलाओं की शादी की औसत आयु (ग्रामीण और शहरी)

लड़कियों की शादी की औसत उम्र 1995 में 19.4 साल थी जो 2014 में बढ़कर 22.3 साल हो गई। 1995 में देश में शादी की न्‍यूनतम आयु सबसे कम आंध्र प्रदेश में 18.1 वर्ष थी, जबकि 2014 में शादी की न्यूनतम औसत आयु 21.5 वर्ष दर्ज की गई जो पश्चिम बंगाल में थी। हालांकि महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश में लड़कियों की शादी की औसत आयु में उल्‍लेखनीय वृद्धि हुई है और केरल तो इस मामले में हमेशा से ही आगे रहा है।

भारत में साक्षरता दर: 1951-2011

भारत जैसे देश में शिक्षा एक बड़ी चिंता है जहां बहुतायत संख्‍या युवाओं की है। आजादी के समय भारत की साक्षरता दर महज 12% थी। आजादी के बाद पहली जनगणना के समय 1951 में साक्षरता दर 18.33% दर्ज की गई, जो 2001 में 64.83% हो गई (देखें टेबल)। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में साक्षरता दर 74.4% है, जो विश्‍व की औसत साक्षरता दर से 10% कम है। साक्षरता में पुरुषों की तुलना में महिलाएं काफी पीछे हैं। 2011 में पुरुषों की साक्षरता दर जहां 82.14% है, वहीं दूसरी तरफ केवल 65.46% महिलाएं ही साक्षर हैं। हालांकि वर्ष 1991 से 2011 के बीच देश में महिलाओं की साक्षरता के प्रतिशत में अप्रत्‍याशित बढ़ोतरी हुई (देखें टेबल)। जैसा कि टेबल में दिए गए आंकड़ों से स्‍पष्‍ट है कि कि 1991 में जहां 39.29% महिलाएं ही साक्षर थीं, वहीं 2001 में यह आंकड़ा बढ़कर 63.67% पहुंच गया, अर्थात महिलाओं की साक्षरता में 34.38% की वृद्धि हुई।

2011 में भारत में अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रम में कुल 2 करोड़ 71 लाख 72 हजार 300 लोग पंजीकृत थे। इनमें 1.4 करोड़ पुरुष और 1.2 करोड़ महिलाएं थीं। यहां पुरुषों व महिलाओं की संख्‍या में बहुत ज्‍यादा अंतर नहीं है। इसके विपरीत पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम के आंकड़े एक अलग कहानी बयां करते हैं। पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम में 2011 में कुल 38 लाख 53 हजार 400 लोग पंजीकृत हुए जिनमें पुरुषों की संख्‍या 18 लाख और महिलाओं की 19 लाख थी। एम.फिल, पीजी और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों में पुरुषों से ज्‍यादा महिलाओं के रजिस्‍ट्रेशन से यह साबित होता है कि शिक्षा प्राप्‍त करने में महिलाओं की गहरी दिलचस्पी है।

हालांकि हमारे देश में युवा उच्च शिक्षा प्राप्‍त हैं लेकिन वे बड़ी संख्‍या में बेरोजगार हैं। 2001 की जनगणना में जहां 23% लोग बेरोजगार थे, वहीं 2011 में इनकी संख्या बढ़कर 28% हो गई। नौकरी की तलाश करने वालों में लगभग आधी महिलाएं हैं। युवाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति का एक मुख्‍य कारण बेरोजगारी भी है। बेरोजगार युवा हताश हो जाते हैं और अपराध के मार्ग पर चल पड़ते हैं। वे नशाख़ोरी के शिकार हो जाते हैं और फिर नशे की लत को पूरा करने के लिए अपराध भी कर बैठते हैं। देश में हो रही 70 प्रतिशत आपराधिक गतिविधियों में युवाओं की संलिप्तता पाई गई है। नेशनल क्राइम रिकॉ‍र्ड (NCR) के आंकड़ों के अनुसार, 2015 में 41,385 किशोरों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से 40,468 लड़के और केवल 917 लड़कियां थीं।

Source: http://mospi.nic.in/sites/default/files/publication_reports/Youth_in_India-2017.pdf