• एनजीटी का आदेश है, शहरों में कहीं भी खुले में कूड़ा नहीं जलाया जाएगा
  • कहीं पानी के प्राकृतिक स्रोत से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी
  • नदियों के स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी
  • खेत में फसल के अवशेष नहीं जलाए जाएंगे

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी पर पर्यावरण की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। इन जिम्मेदारियों के तहत एनजीटी ने सख्त नियम बनाए हैं, जिनमें कूड़ा जलाना, खेतों में फसल के अवशेष जलाना आदि प्रतिबंधित कर दिया गया है। लेकिन इन नियमों को लागू करा पाने में एनजीटी फेल है, बता रही हैं the2is.com की दीपाली अग्रहरि :

सब आदेश और नियम अपनी जगह हैं। असलियत में इनका पालन नहीं हो रहा। शहरों की सड़कों पर खुले आम कूड़ा जल रहा हैं। शहरों में कूड़े के डंपिंग ग्राउंड में कूड़ा जहां-तहां पड़ा रहता है और सुलगता रहता है(देखें वीडियो)। भारत में सुन्दरीकरण के नाम पर गंगा और गोमती नदियों का स्वरूप ही बदल दिया गया है। इसकी वजह है आदेशों और नियमों को लागू न होना। सिर्फ कूड़े की ही बात करें तो इसके प्रबंधन कि जिम्मेदारी शहरों की नगर निगमों को है लेकिन खुद उनके कर्मचारी ही नियम तोड़ रहे हैं।



शहरों का लैंडफिल

राज्यों के शहरों में कूड़ा इकठ्ठा करके डंपिंग क्षेत्रों में लाया जाता है। हाल यह है कि हर समय शहरों के डंपिंग क्षेत्रों में कूड़ा सुलगता रहता है। डंपिंग क्षेत्र से दो से चार किलोमीटर के दायरे में धुएं की परत हर समय बनी रहती है। नगर निगम कूड़ा उठाने से लेकर कूड़ा डंप करने तक के नियम बनाता है और उसे लागू कराने की जिम्‍मेदारी भी उसी पर रहती है।

  • बनारस में जलते कूड़े से फैलता प्रदूषण
    बनारस में जलते कूड़े से फैलता प्रदूषण
  • गोरखपुर  में जलते कूड़े से फैलता प्रदूषण
    गोरखपुर में जलते कूड़े से फैलता प्रदूषण
  • लखनऊ में जलते कूड़े से फैलता प्रदूषण
    लखनऊ में जलते कूड़े से फैलता प्रदूषण

बनारस नगर आयुक्त श्री हरी प्रसाद शाही, आगरा नगर आयुक्त अरुण प्रकाश, कानपूर नगर आयुक्त अविनाश सिंह, गोरखपुर नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश सिंह और लखनऊ नगर आयुक्त उदय राज सिंह से जब इस विषय पर बात की तो उनका कहना है कि कूड़े में आग लगने का कारण कूड़े से निकलने वाली मेथेन गैस है जिससे कूड़े में खुद ब खुद आग लगती है और कूड़ा सुलगता रहता है। लेकिन कुछ नागरिक यहां-वहां कूड़ा जला देते हैं, जिसका पता लगाना मुश्किल होता है कि किसने जलाया। नगर आयुक्त ये भी मानते हैं ,‘लूप होल्‍स हर सिस्‍टम में होते हैं। नियम बनने से पहले ही उसे तोड़ने वाले तैयार हो जाते हैं।‘

हालाँकि एन एम आर आर्गेनिक केमेस्ट्री के प्रोफेसर डॉ. अनिल मिश्रा इसे सही नहीं मानते उनका कहना है कि कूड़ा जहाँ इकठ्ठा होता है, उसमें नमी के कारण मेथेन गैस बनने लगती है जिससे कूड़ा सुलगता रहता है। लेकिन उससे आग नहीं लगती और जितना धुंआ वीडियो और फोटो में है, उतना नहीं होता। ये तभी पॉसिबल है जब जानबूझ कर कूड़ा जलाया जाए।

नगर निगम भी कम नहीं

सड़कों की सफाई करने वाले नगर निगम कर्मचारी खुद ही कूड़ा जलाते हैं। शहरों के नगर निगम आयुक्त बताते हैं कि नियम तोड़ने वालों पर कारवाई होती है, लेकिन अब तक कितनों लोगों पर जुर्माना हुआ और क्या कार्रवाई की गई, यह नगर आयुक्त नहीं बता पाए। बस कुछ कर्मचारियों पर जुर्माना लगाकर सारे पुण्य कम लेने की कोशिश करते रहें। नगर आयुक्तों का कहना है कि आग को कम करने के लिए जलते कूड़े पर पानी का छिड़काव किया जाता है।

लोगों का जीना हुआ मुश्किल

शहरों में जहाँ कूड़ा डंप होता है वहाँ आसपास तमाम बस्तियां हैं, गांव हैं। यहां के रहने वाले लोग कूड़े से निकलने वाले धुएं के कारण बेहद परेशान हैं।

लखनऊ के किशन लाल बताते हैं कूड़ा जलने से बस्ती के लोगों में सांस की तकलीफ, एलर्जी, आंखों की बीमारियां आम हो गई हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

  • लखनऊ, बनारस, कानपूर, गोरखपुर और आगरा जैसे शहरों में रोजाना लगभग 1400 टन कूड़ा इकठ्ठा होता है। नगर निगम द्वारा कर्मचारियों को समय–समय पर कूड़े को डंप करने की ट्रेनिंग दी जाती है। लेकिन कहाँ और कब ट्रेनिंग दी जाती है इसकी जानकीरी नहीं दे सकते।

उदय राज सिंह, नगर आयुक्त

  • जब कूड़ा ज्यादा हो जाता है तो कूड़े को कम करने के लिए कुछ नागरिक या नगर निगम के कर्मचारी कूड़े को जला देते हैं या जलता हुआ कूड़ा उठाकर उसे डंपिंग क्षेत्र में डाल देते हैं, जिससे बाकी कूड़े में भी आग लग जाती है। ये शायद सॉलिड वेस्ट के वॉल्यूम को कम करने की कोशिश का भी हिस्सा हो सकता है। उससे लगातार धुआं निकलता रहता है जो वातावरण को प्रदूषित करता है। पॉल्यूशनकण्ट्रोल बोर्ड की भूमिका सिर्फ एक गाइडेंस एजेंसी के रूप में होती है।

अमित चंद्रा, नोडल ऑफिसर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

कहां कर सकते हैं शिकायत

अमित चंद्रा बताते हैं कि कूड़ा जलने की शिकायत निम्‍नलिखित तरीके से कर सकते हैं –

1.पॉल्‍यूशन कंट्रोल बोर्ड के ई-मेल [email protected]uppcb.comपर

2. पॉल्‍यूशन कंट्रोल बोर्ड के संबंधित अधिकारी को

3. पॉल्‍यूशन कंट्रोल बोर्ड के रीजनल ऑफिसर को

और

4. नगर नगम की वेबसाइट ​www.consumercomplaints.in/municipal-corporation-of-lucknow​के कम्प्लेन बॉक्स में

एनजीटी का रोल

एनजीटी का काम पर्यावरण से संबंधित कानूनी प्रावधानों को लागू करवाना और व्‍यक्तियों व संपत्तियों को हुए नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति दिलाना है। इसके अलावा कूड़ा न जले, इस पर एनजीटी गाइड लाइन तैयार करती है और नगर निगम द्वारा उसे लागू कराती है।एनजीटीके आदेश का उल्‍लंघन करने पर तीन साल की कैद और 10 करोड़ रुपये तकका जुर्माना या दोनों ही हो सकते हैं।

जनवरी 2015 तक एनजीटी के पास कुल 7768 केस आए। इनमें से 5167 में फैसले दे दिए गए, पर 2601 मामलों में फैसले आने अभी बाकी हैं।

लखनऊ में किसी नागरिक पर पहला जुर्माना

7 जून, 2017 को नगर निगम के चीफ इंस्पेक्टर आशीष बाजपेई ने इंदिरा नगर के सेक्‍टर-19 में ओम प्‍लाजा के सामने सड़क पर कूड़ा जलाने पर फातिमा से 5000 रुपये का जुर्माना वसूला। फातिमा झुग्‍गी बस्‍ती में रहती है और कूड़ा बीनने का काम करती है। आशीष बाजपेई का कहना है कि उनकी ड्यूटी में अब तक का ये पहला जुर्माना है। लेकिन कुकरैल के आस – पास रोजाना जलता हुआ कूड़ा इन्हें नहीं दिखाई दिया।