अल्मोड़ा जिले का प्राचीन सोमेश्वर महादेव मंदिर कोसी नदी के किनारे स्थित है। १२वीं सदी के इस मंदिर की देखभाल बारी – बारी से 45 परिवार करते हैं। हर परिवार को देखभाल के लिए 5 दिन मिलते हैं। सोमेश्वर मंदिर के बारे में बता रहे हैं the2is.com के रिपोटर हरिओम त्रिपाठी

भगवन शिव से नाता :

सोमेश्वर मंदिर के पुजारी भुवन भारती के अनुसार सैकड़ों वर्षों से उनके पूर्वज मंदिर की सेवा करते आ रहे हैं। भुवन भारती (गोस्वामी) ने बताया कि उनकी जाति शिव जी से सम्बंधित है और शिव को चढ़ने वाले चढ़ावे और दान पर उनका अधिकार हैमंदिर का नियम रहा है कि मंदिर के लिए बनने वाला प्रसाद केवल पुरुष ही बनायेंगे। हर परिवार पांच – पांच दिन पर मंदिर की सेवा करता है मंदिर में आने वाला चढ़ावा और दान से उस परिवार का पालन पोषण होता है। जितने दिन तक परिवार सेवा में नहीं रहता, उतने दिन वो परिवार गौ पालन और खेती किसानी से जुड़े कामों में व्यस्त रहता है।



सावन में भंडारा

हर साल सावन में मंदिर में एक महीने तक भण्डारा चलता है जिसका सारा खर्च श्रद्धालु वहन करते हैं। सावन के  दौरान 5 दिन में लगभग 7000 रुपये का चढ़ावा और खाने की चीज़ें मंदिर के लोगों के लिए आ जाती है। सामान्य दिनों में रोजाना 400 से 500 रुपये तक चढ़ावा आता है। मंदिर परिसर में कई छोटे – छोटे मंदिर भी हैं जहाँ अन्य देवी देवताओं की मूर्तियाँ हैं।

सोमेश्वर महादेव मंदिर, अल्मोढ़ा जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूरी पर कोसी नदी के तट पर स्थित है।यह कौसानी से लगभग 12 किलोमीटर दूरी पर है।