लखनऊ के टूरिज्म मैप पर चाहते है १०१ फीट की हनुमान जी की प्रतिमा

स्टेट बैंक के रिटायर अफसर प्रेम नारायण मेहरोत्रा भगवान राम और हनुमान के बहुत बड़े भक्त हैं और करीब 5 साल से लखनऊ जेल में कैदियों से ‘राम’ का नाम लिखवा रहे हैं. प्रेम नारायण का कहना है कि स्वयं भगवान हनुमान उनसे यह काम करवाते हैं. the2is के लिए शैली अस्थाना ने प्रेम नारायण मेहरोत्रा से की बातचीत के चुनिंदा अंश :

आप अपने बारे में कुछ बताइए?

अध्यात्मिक कृपा से मैंने २००१ में स्टेट बैंक से वीआरएस ले लिया था. मेरे ऊपर ईश्वर की कृपा है और इसी के चलते अब तक मेरी 11 किताबें छप चुकी हैं. यह सब राम और हनुमान स्तुति की हैं. मैं काफी पहले से अध्यामिक गीत लिखता रहा हूँ. २००६ में मेरी अपनी पहली पुस्तक प्रकाशित हुयी थी.

धार्मिक कार्यों के अलावा किस चीज़ में है आपकी दिलचस्पी?

आध्यामिक कार्यों के अलावा और किसी चीज़ में रूचि नहीं है. अलीगंज स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में महीने के पहले – दूसरे और तीसरे शनिवार को शाम को भजन करवाता हूँ. इसके अलावा पंचमुखी हनुमान मंदिर,  हनुमान सेतु और ५१ शक्तिपीठ में भी मैंने भजन संध्या प्रारंभ करवाई है.

प्रेम नारायण मेहरोत्रा

प्रेम नारायण मेहरोत्रा

जेल में कैदियों से राम नाम लिखवाने का विचार कैसे आया ?

एक बार मुझे किसी से जेल में मिलने जाना पड़ा जिसकी वजह से मैं बहुत दुखी था. स्वयं हनुमान जी ने इस राम लेखन शुरू करने के लिए कहा. मैंने उनके आदेश का पालन किया और एक बंडल कापियां  लेकर जेल पंहुचा और वहां पर डिप्टी जेलर से बात करके कार्य शुरू करवाया. कैदियों के कहने पर मैंने वहां भी भजन करवाए है. आज भी वहां निरंतर राम लेखन चल रहा है.

जेल में अन्य धर्म के कैदियों ने क्या कभी इस कार्य पर कोई आपत्ति जताई?

धर्म जाति ये सब राजनीति दलों का बनाया हुआ खेल है. जेल में हर इंसान बहुत ही साधारण है. हिन्दू-मुस्लिम, सिख-ईसाई वहां नहीं चलता.

अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के बारे में बताइए?

मैं लखनऊ में १०१ फुट ऊंची हनुमान जी की मूर्ती स्थापित करना चाहता हूँ, इसके लिए जमीन खोजी जा रही है. मुझे यकीन है कि मुझे लोग सपोर्ट करेंगे और इसमें पैसे की कोइए अड़चन नहीं  आएगी. लखनऊ में हनुमान जी कि ऊंची मूर्ती टूरिस्ट अट्रैक्शन का हिस्सा भी बनेगी.

प्रेम नारायण मेहरोत्रा ने सुनाया : ‘’हनुमन तुमने ही पकड़ाई राम नाम अमृत माला, अंतर में प्रेरणा जगाई लिखो राम नाम की मधुशाला.’’

तुमसे बड़ा नाम का साकी नहीं है कोई इस धरती पर, अमृत जाम बनाते जाओ, पूरी होगी मधुशाला.

राम नाम हर श्वास में मेरी तुम हो सदा भरा प्याला,बतलाते जाना तुम महिमा मैं तो बस लिखने वाला.