यूनाइटेड नेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार सदी के अंत तक मानव जनसंख्या 10 बिलियन तक हो सकती है. यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबरा और रूरल कॉलेज ऑफ स्कॉटलैंड के रिसर्चरों ने दावा किया है कि बढ़ती आबादी में फ़ूड सप्लाई की समस्या का समाधान कीड़े-मकोड़े कर सकते हैं. उनका मानना है कि चिकन – मटन की जगह अगर झींगुर और अन्य कीट-पतंगों खाया जाए तो खेती के लिए एक तिहाई जमीन बचाई जा सकती हैं. हम भारतीय भी ऐसा करें तो अच्छा होगा, बता रही हैं दीपाली अग्रहरी :

लखनऊ की न्यूट्रीशनिस्ट डॉ. स्मिता सिंह के अनुसार सभी कीड़े-मकोड़े खाने योग्य नहीं होते. हाँ, जो खाने योग्य हैं वह फायदा तो करते हैं लेकिन तभी जब उन्हें नियंत्रित स्थिति में पैदा किया गया हो. चिकन और मटन में प्रोटीन होता है लेकिन उसका अधिक सेवन शरीर में फैट बढ़ा देता है. खाने योग्य कीट-पतंगों में आयरन, सोडियम, पोटाशियम, जिंक, फस्फोरस, मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स होते हैं, जो हमारे शरीर में पैथजनिक बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने में मदद करते हैं.



न्यूट्रीशनिस्ट डॉ. आज़म खान का कहना है कुछ कीट पतंगे हैं जिन्हें खाने में कोई नुकसान नहीं है, जैसे कि चीटियाँ. इनमें काफी प्रोटीन होता है और ये खाने में मीठी होती हैं. कॉकरोच स्वाद में मशरूम की तरह होता है और उसमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा और फैट बहुत कम होता है. येलो मील वार्म के लार्वा में विटामिन B12 होता है. इसी तरह घरों में जो झींगुर पाये जाते हैं उनमें विटामिन और तितलियों में प्रोटीन होता है. लाल लार्वा में विटामिन E होता है.

डाईटीशियन डॉ अभिषेक वर्मा बताते हैं कि कुछ कीट-पतंगे इकोसिस्टम को बनाये रखते हैं और उनको खाया नहीं जा सकता. जैसे कि टिड्डी को अगर बिना पैर हटाये खाएं तो उससे ब्लॉकेज की समस्या हो सकती है. जिन्हें समुद्री खाना सूट नहीं करता उन्हें कीट-पतंगे खाने से एलर्जी हो सकती है. ये तभी हमारे लिए फायदा करेंगे जब पता हो कि इंसेक्ट्स खुद क्या खाते हैं और कहाँ रहते हैं.

कुछ खाने योग्य कीट पतंगे:

चीटियाँ- मीठी और नटीकॉ

करोच- मशरूम

पानी में रहने वाले कीट- मछली जैसा स्वाद

मीलीबग्स- आलू जैसा स्वाद

भारत में दिल्ली का बग्स कैफे इंसेक्ट्स फ़ूड के लिए काफी मशहूर है| इसके अलावा कीट-पतंगों की तरह-तरह की वेरायटीज के लिए मेघालय, नागालैंड, असम में इनका मजा लिया जा सकता है.

http://bugs-cafe.e-monsite.com/pages/food-menu.html

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएँ –

http://www.zmescience.com/science/news-science/insects-not-meat/