कुत्‍ता पालना आजकल लाइफ स्टाइल में शुमार

सबसे ज्यादा लॉयल और इमोशनल होता है कुत्‍ता

कुत्ते इंसान के सबसे अच्छे दोस्त तो होते ही हैं, एक नए शोध के अनुसार इंसानों के संग कुत्तों की इमोशनल बॉन्डिंग भी जबरदस्त होती है। कुत्ते अपने मालिक के इमोशन अच्छी तरह समझते हैं और उसी के अनुरूप व्यवहार करते हैं। मतलब यह कि आपका डॉगी सिर्फ सुरक्षा और मनबहलाव की ही चीज़ नहीं है, वह आपका इमोशनल साझीदार भी होता है। डॉगी और इंसानों के रिश्तों पर दीपाली अग्रहरि की एक रिपोर्ट :



2015 में हुए एक अध्ययन से ये साबित होता है कि कुत्ते इंसान के चेहरे के अलग–अलग इमोशनल एक्सप्रेशन के बीच अंतर करने में भी सक्षम होते हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ वेटेरिनरी मेडिसिन, वियना के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि कुत्तों ने उन पैटर्नों पर प्रतिक्रिया दी जो मनुष्य और कुत्तों की नकारात्मक आवाज़ों के लिए भावुक संवेदना दर्शाते हैं।

कुत्‍ता पालना

कुत्ता सबसे वफादार जानवर

लखनऊ में जानकीपुरम विस्तार स्थित श्री पेट क्लिनिक के डॉ. सतेन्द्र कुमार गुप्ता कहते हैं कि चूंकि आजकल ज्यादातर परिवार न्यूक्लियर हैं, इसलिए लोगों में कुत्ता पालने का शौक बढ़ता जा रहा है। रोज के स्ट्रेस, जॉब प्रेशर और बिजी लाइफ में अपने कुत्ते के साथ अलग तरह का इत्‍मीनान मिलता है। इसके अलावा न्यूक्लियर फेमिली में तीन-चार सदस्य होने के कारण डॉगी भी परिवार का अभिन्न सदस्य बन जाता है। इससे इमोशनल बॉन्डिंग बनती ही है। दरअसल कुत्तों में फीलिंग फ्रीक्वेंसी बहुत तेज होती है। इसका नतीजा यह होता है कि जैसा ओनर होगा, उसका कुत्ता भी वैसा ही व्यवहार करेगा। ओनर काफी स्ट्रिक्ट है, तो उसका कुत्ता भी वैसा व्यवहार करेगा। ओनर अगर फिजिकली फिट है, तो कुत्ता  भी एक्टिव और फिट रहता है क्योंकि ये जिनके साथ भी रहते हैं उनकी एक्टिविटी को जल्दी ही सीख लेते हैं।



कुत्‍ता पालना

इंसान का सबसे अच्छा दोस्त

पुरनिया, लखनऊ के वेटेरनरी डॉ. एस. के खान का कहना है कि लोगों में कुत्ता  पालने का चलन लाइफ स्टाइल में शुमार हो गया है। पहले लोग कुत्तों को घर के बाहर ही रखना पसंद करते थे, पर आज अपने साथ लेकर घूमते हैं, अपने साथ बिठाते-लिटाते हैं।

केनाइन पेट और वेटेरनरी क्‍लीनिक के डॉ. राजीव पाण्डेय कहते हैं कि इंसानों से ज्यादा लोग जानवरों पर भरोसा करते हैं क्योंकि वो धोखा नहीं देते और इनमें कुत्ता ही ऐसा जानवर है जो सबसे ज्यादा लॉयल और इमोशनल होता है। अपने बच्चों से ज्यादा लोग कुत्तों को प्यार करते हैं।

लखनऊ की सुनीता शर्मा बताती हैं कि उनके कुत्ते (रॉकी) को उन्होंने कानपुर हाईवे से घायल हालत में उठाया था। सुनीता ने काफी केयर भी की रॉकी की, लेकिन रॉकी सुनीता के पति अशोक के ऑर्डर्स फॉलो करता है क्योंकि रॉकी जानता है कि घर का मालिक कौन है।

लखनऊ के डॉग लवर राहुल श्रीवास्तव बताते हैं कि जब वह गुस्सा होते हैं तो उनका हीरो (कुत्ता) उनके मूड को देखकर शांत बैठ जाता है, जब वह इमोशनल होते हैं तो हीरो भी इमोशनल हो जाता है। वह किसी खतरे में हों तो उनका कुत्ता उस खतरे से लड़ने के लिए पहले ही तैयार हो जाता है।

कुत्‍ता पालना

गोमती नगर निवासी एयरफोर्स से रिटायर पंकज यादव बताते हैं कि वो रोजाना सुबह 6 से 7 के बीच लोहिया पार्क के पास स्ट्रीट डॉग्स को बिस्कुट खिलाने के लिए जाते हैं और वो स्ट्रीट डॉग्स उनके आने से पहले ही वहां मौजूद होते हैं। वो कहते हैं कि कुत्तों को खिलाने में बहुत अच्छी फीलिंग होती है।

क्या है भावनात्मक लगाव?

भावनात्मक लगाव सहनुभूति का आधार है, जो दो लोगों के बीच तब बनता है जब उनके दुःख या तकलीफ को हम उसी तरह महसूस करते हैं जैसे वो कर रहे हैं। ये भाव स्वयं ही बनता है, चाहे वो दो लोग इंसान हों, इंसान और जानवर हों या दोनों जानवर हों।

अध्ययनों से भी ये साबित हुआ है कि कुत्तों में भी इंसानों जैसे अन्य स्पीसीज के प्रति भावनात्मक लगाव होता है।

कुत्ते भी इंसानों की भावनात्मक स्थिति के प्रति काफी सेंसटिव होते हैं। यह भावना किसी अन्य पशु-पक्षी में नहीं पाई जाती।

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